{"_id":"6761cdab6572c53bd809cf27","slug":"well-the-ramgarh-sawai-forest-is-the-target-of-smugglers-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-130039-2024-12-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: खैर तस्करों के निशाने पर रामगढ़ सवाई का जंगल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: खैर तस्करों के निशाने पर रामगढ़ सवाई का जंगल
Wed, 18 Dec 2024 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 18 Dec 2024 12:44 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। खंड के गांव रामगढ़ सवाई का जंगल खैर तस्करों के निशाने पर है। कुछ दिन पहले खैर तस्करों की ओर से जंगल से आधा दर्जन से ज्यादा खैर के पेड़ चोरी छिपे काट लिए गए। विभाग के कर्मचारी जंगल से चोरी हुए पेड़ों के मामले को दबाने में लगे हुए है।
इस बात का अंदाजा इसी लगाया जा सकता है कि पेड़ कटने के चार दिन बाद भी कटे पेड़ों की न तो डैमेज रिपोर्ट काटी गई और न ही पेड़ों के मूल पर डीआर नंबर अंकित किया गया है। जंगलों से आए दिन कीमती पेड़ों की चोरी हो रही है। वन विभाग के कर्मचारी जंगल से कटे पेड़ों की डैमेज रिपोर्ट काटने व एफआईआर दर्ज करने की बात कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं।
वन विभाग कर्मचारियों पर ही पेड़ों की सुरक्षा का जिम्मा है। वन विभाग के उच्च अधिकारी भी जंगलों से हो रहे पेड़ चोरी को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। खैर की लकड़ी बेशकीमती होती है। जिसका बाजार में मूल्य लगभग 10000 रुपये प्रति क्विंटल है। खैर का पेड़ 25 से 30 साल में तैयार होता है।
विज्ञापन
खैर की लकड़ी का इतने महंगे रेट पर बिकना ही तस्करी का मुख्य कारण है। रेंज अधिकारी कृष्ण कुमार का कहना है कि जंगल से खैर के पेड़ काटने के मामले को लेकर रिपोर्ट बना कर उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है। उनके आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विज्ञापन
बिलासपुर। खंड के गांव रामगढ़ सवाई का जंगल खैर तस्करों के निशाने पर है। कुछ दिन पहले खैर तस्करों की ओर से जंगल से आधा दर्जन से ज्यादा खैर के पेड़ चोरी छिपे काट लिए गए। विभाग के कर्मचारी जंगल से चोरी हुए पेड़ों के मामले को दबाने में लगे हुए है।
इस बात का अंदाजा इसी लगाया जा सकता है कि पेड़ कटने के चार दिन बाद भी कटे पेड़ों की न तो डैमेज रिपोर्ट काटी गई और न ही पेड़ों के मूल पर डीआर नंबर अंकित किया गया है। जंगलों से आए दिन कीमती पेड़ों की चोरी हो रही है। वन विभाग के कर्मचारी जंगल से कटे पेड़ों की डैमेज रिपोर्ट काटने व एफआईआर दर्ज करने की बात कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं।
विज्ञापन
वन विभाग कर्मचारियों पर ही पेड़ों की सुरक्षा का जिम्मा है। वन विभाग के उच्च अधिकारी भी जंगलों से हो रहे पेड़ चोरी को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। खैर की लकड़ी बेशकीमती होती है। जिसका बाजार में मूल्य लगभग 10000 रुपये प्रति क्विंटल है। खैर का पेड़ 25 से 30 साल में तैयार होता है।
विज्ञापन
खैर की लकड़ी का इतने महंगे रेट पर बिकना ही तस्करी का मुख्य कारण है। रेंज अधिकारी कृष्ण कुमार का कहना है कि जंगल से खैर के पेड़ काटने के मामले को लेकर रिपोर्ट बना कर उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है। उनके आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।