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Yamuna Nagar News: मेहनत के धागों से बुन रहीं किस्मत
Sat, 20 Dec 2025 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 20 Dec 2025 12:35 AM IST
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मलिक रोजी आनंद।
- फोटो : सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करती छात्राएं।
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर के मॉडल टाउन निवासी मलिक रोजी आनंद ने महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐसा काम किया है, जो आज प्रदेशभर में मिसाल बन चुका है। अब महिलाएं मेहनत के धागों के अपनी किस्मत बुन रही हैं। महिलाएं न केवल हुनरमंद बनी हैं, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार और समाज को भी संबल दे रही हैं।
वर्ष 2003 में मात्र छह महिलाओं के साथ शुरू हुई उनकी पहल आज एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है। मलिक रोजी आनंद के नेतृत्व में सखी संस्था के बैनर तले प्रदेशभर में करीब 250 सिलाई प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर वर्तमान में तीन हजार से अधिक महिलाएं सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। प्रत्येक केंद्र पर 10 से 15 महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद दक्ष महिलाओं को ही आगे प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, जिससे यह श्रृंखला लगातार आगे बढ़ रही है।
अब तक 60 हजार से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीन उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। इसके साथ ही महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से मोबाइल ब्यूटी किट भी प्रदान की जा रही हैं, ताकि वे घर बैठे या मोहल्ले में ही काम शुरू कर सकें। मलिक रोजी आनंद के अनुसार, अब तक 12 हजार से अधिक महिलाएं पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
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उन्होंने बताया कि समाज सेवा का जज्बा उनमें बचपन से ही रहा है। उन्होंने बीएड, एमएड, एलएलबी के साथ चार विषयों में एमए की पढ़ाई की और वर्ष 2012 तक प्रिंसिपल के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2003 में उन्होंने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से सर्वे कराया। अचार, मुरब्बा और पापड़ जैसे उत्पादों पर भी विचार किया, लेकिन बाजार की चुनौतियों को देखते हुए सिलाई को सबसे उपयुक्त माध्यम चुना।
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यमुनानगर। शहर के मॉडल टाउन निवासी मलिक रोजी आनंद ने महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐसा काम किया है, जो आज प्रदेशभर में मिसाल बन चुका है। अब महिलाएं मेहनत के धागों के अपनी किस्मत बुन रही हैं। महिलाएं न केवल हुनरमंद बनी हैं, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार और समाज को भी संबल दे रही हैं।
वर्ष 2003 में मात्र छह महिलाओं के साथ शुरू हुई उनकी पहल आज एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है। मलिक रोजी आनंद के नेतृत्व में सखी संस्था के बैनर तले प्रदेशभर में करीब 250 सिलाई प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर वर्तमान में तीन हजार से अधिक महिलाएं सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। प्रत्येक केंद्र पर 10 से 15 महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद दक्ष महिलाओं को ही आगे प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, जिससे यह श्रृंखला लगातार आगे बढ़ रही है।
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अब तक 60 हजार से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीन उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। इसके साथ ही महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से मोबाइल ब्यूटी किट भी प्रदान की जा रही हैं, ताकि वे घर बैठे या मोहल्ले में ही काम शुरू कर सकें। मलिक रोजी आनंद के अनुसार, अब तक 12 हजार से अधिक महिलाएं पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
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उन्होंने बताया कि समाज सेवा का जज्बा उनमें बचपन से ही रहा है। उन्होंने बीएड, एमएड, एलएलबी के साथ चार विषयों में एमए की पढ़ाई की और वर्ष 2012 तक प्रिंसिपल के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2003 में उन्होंने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से सर्वे कराया। अचार, मुरब्बा और पापड़ जैसे उत्पादों पर भी विचार किया, लेकिन बाजार की चुनौतियों को देखते हुए सिलाई को सबसे उपयुक्त माध्यम चुना।