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Yamuna Nagar News: मौसम ने दिया साथ, धान की पैदावार में पांच क्विंटल का इजाफा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 01:59 AM IST
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Weather cooperates; paddy yield increases by five quintals.
यमुनानगर के खेतों में लहलहाती धान की फसल। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। इस बार जिले के खेतों में लहलहा रही धान की फसल को देख कर किसानों के चेहरे खुशी से लाल हो गए हैं। सामान्य बारिश, बाढ़ नहीं आने और फसल में बीमारियों का प्रकोप कम रहने से धान की पैदावार में अच्छा इजाफा हुआ है। अब तक जिन खेतों में धान की कटाई हो चुकी है, वहां औसतन 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिल रहा है। वहीं कुछ खेतों में 32 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान की पैदावार हुई है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पिछले साल औसतन करीब 25 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन हुआ था। जिले में इस बार करीब 86 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल की रोपाई हुई थी। किसानों का कहना है कि मौसम ने पूरे सीजन में फसल का साथ दिया। समय-समय पर हुई सामान्य बारिश से फसल को पर्याप्त पानी मिला, जबकि बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनी। इससे खेतों में लंबे समय तक पानी जमा नहीं रहा और फसल को नुकसान से बचाया जा सका। तेज बारिश नहीं होने से बरसाती नदियों व यमुना नदी में भी उफान नहीं आया। जिससे पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाया।
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भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष संजू गुंदियाना ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल रहने का सीधा असर धान की पैदावार पर देखने को मिल रहा है। अभी तक जिन खेतों में कटाई हुई है, उनमें औसतन 30 क्विंटल प्रति एकड़ धान निकल रही है। कुछ खेतों में उत्पादन 32 क्विंटल तक पहुंचा है। किसान विक्रांत ससौली, नवाब सिंह गुंदियाना, संदीप टोपरा और जंगशेर गुंदियाना ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में धान की कटाई पूरी कर ली है। पिछले साल की तुलना में इस बार उत्पादन काफी बेहतर रहा है। किसानों के अनुसार यदि हर साल मौसम इसी तरह अनुकूल रहे तो धान की पैदावार अच्छी रहने के साथ खेती से होने वाली आय में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
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कृषि विशेषज्ञ बोले- बीमारी का भी नहीं पड़ा खास असर
कृषि विज्ञान केंद्र दामला के जिला समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने बताया कि इस बार बारिश सामान्य रही और बाढ़ भी नहीं आई। इससे धान की फसल को किसी बड़े नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा। धान में पत्ता लपेट बीमारी का असर जरूर देखने को मिला, लेकिन इसका प्रकोप इतना अधिक नहीं था कि उत्पादन पर खास असर पड़े। मौसम अनुकूल रहने और बीमारी का असर सीमित रहने के कारण इस बार पिछले साल की तुलना में औसतन पांच क्विंटल प्रति एकड़ अधिक धान उत्पादन मिल रहा है।

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इस बार खेतों में धान की फसल पिछले साल से अच्छी है। यह सही है कि इस बार धान में बीमारी भी कम आई। वहीं बारिश सामान्य हुई, जिससे किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
- डॉ. आदित्य डबास, उपनिदेशक, कृषि विभाग।
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