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Yamuna Nagar News: दिवाली पर 500 करोड़ के बर्तन कारोबार की उम्मीद
Mon, 06 Oct 2025 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 06 Oct 2025 01:54 AM IST
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फैक्टरी में बर्तन तैयार करता श्रमिक। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दिवाली 20 अक्तूबर को है। इसमें 14 दिन शेष रह गए। वहीं बर्तन नगरी ने नया माल तैयार करने में जोर पकड़ लिया है। इकाइयों के अंदर श्रमिक बर्तनों को आकार देने में जुटे हैं। यह सिलसिला दिनरात चल रहा है। इस बार कारोबारियों को 500 करोड़ रुपये का व्यवसाय होने की उम्मीद है।
जगाधरी की फैक्टरियों में बने स्टील, पीतल और एल्युमिनियम के बर्तन करीब 12 से ज्यादा देशों में भेजे जाते हैं। इनमें सऊदी अरब, अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप के कई देश शामिल हैं। जगाधरी मुख्य रूप से पीतल और अब उच्च गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील के बर्तन थाली, कटोरे, पतीले, लोटे, और कढ़ाई बनाने के लिए प्रसिद्ध है।
पहले पीतल का काम होता था, लेकिन अब उच्च लागत के कारण स्टेनलेस स्टील के बर्तनों की गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। वहीं यहां बंट्टा, टौकणी, परात, डैगची जैसे पारंपरिक पीतल के बर्तन भी मिलते हैं। चीन से आने वाले सस्ते माल का भी यहां के कारोबार पर असर हुआ है, लेकिन जगाधरी के बर्तनों की गुणवत्ता ने इसके वजूद को बनाए रखा है।
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यहां से उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, असम, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात सहित दक्षिण भारत के राज्यों में बर्तन भेजे जाते हैं। द मेटल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदर लाल बत्रा का कहना है यह नगरी काफी मंदी के दौर से गुजरी है। दिवाली नजदीक आ चुकी है। इकाइयों के संचालक नए माल को तैयार करने में लगे हैं। इस बार अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है।
जगाधरी में छोटी-बड़ी 800 फैक्टरियां
2020 में दिवाली में करीब 650-700 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। इसके बाद इसमें गिरावट आई है। 2021 और 2022 में कारोबार औसत रहा था। 2023 में दिवाली के मौके पर बेहतर कारोबार हुआ। 2024 में अपेक्षित कारोबार नहीं मिला जगाधरी ऐतिहासिक बर्तन औद्योगिक नगरी है, जहां छोटी-बड़ी 800 फैक्टरियां हैं। यहां कई ऐसी इकाइयां हैं, जिनका संचालन तीसरी और चौथी पीढ़ी कर रही है। तकनीक में बदलाव आया है, लेकिन गुणवत्ता से साख बनी है। यहां स्टील के बर्तन बनाने की भी 450 से 500 छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। एल्युमिनियम की 125 से ज्यादा फैक्टरियां चल रही हैं। पीतल और तांबे की करीब 100 फैक्टरियां हैं। करीब 250 से ज्यादा इकाइयां बर्तनों का निर्यात करती हैं। इनमें 100 इकाइयां अरब देशों में काम कर रही हैं।
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यमुनानगर। दिवाली 20 अक्तूबर को है। इसमें 14 दिन शेष रह गए। वहीं बर्तन नगरी ने नया माल तैयार करने में जोर पकड़ लिया है। इकाइयों के अंदर श्रमिक बर्तनों को आकार देने में जुटे हैं। यह सिलसिला दिनरात चल रहा है। इस बार कारोबारियों को 500 करोड़ रुपये का व्यवसाय होने की उम्मीद है।
जगाधरी की फैक्टरियों में बने स्टील, पीतल और एल्युमिनियम के बर्तन करीब 12 से ज्यादा देशों में भेजे जाते हैं। इनमें सऊदी अरब, अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप के कई देश शामिल हैं। जगाधरी मुख्य रूप से पीतल और अब उच्च गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील के बर्तन थाली, कटोरे, पतीले, लोटे, और कढ़ाई बनाने के लिए प्रसिद्ध है।
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पहले पीतल का काम होता था, लेकिन अब उच्च लागत के कारण स्टेनलेस स्टील के बर्तनों की गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। वहीं यहां बंट्टा, टौकणी, परात, डैगची जैसे पारंपरिक पीतल के बर्तन भी मिलते हैं। चीन से आने वाले सस्ते माल का भी यहां के कारोबार पर असर हुआ है, लेकिन जगाधरी के बर्तनों की गुणवत्ता ने इसके वजूद को बनाए रखा है।
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यहां से उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, असम, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात सहित दक्षिण भारत के राज्यों में बर्तन भेजे जाते हैं। द मेटल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदर लाल बत्रा का कहना है यह नगरी काफी मंदी के दौर से गुजरी है। दिवाली नजदीक आ चुकी है। इकाइयों के संचालक नए माल को तैयार करने में लगे हैं। इस बार अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है।
जगाधरी में छोटी-बड़ी 800 फैक्टरियां
2020 में दिवाली में करीब 650-700 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। इसके बाद इसमें गिरावट आई है। 2021 और 2022 में कारोबार औसत रहा था। 2023 में दिवाली के मौके पर बेहतर कारोबार हुआ। 2024 में अपेक्षित कारोबार नहीं मिला जगाधरी ऐतिहासिक बर्तन औद्योगिक नगरी है, जहां छोटी-बड़ी 800 फैक्टरियां हैं। यहां कई ऐसी इकाइयां हैं, जिनका संचालन तीसरी और चौथी पीढ़ी कर रही है। तकनीक में बदलाव आया है, लेकिन गुणवत्ता से साख बनी है। यहां स्टील के बर्तन बनाने की भी 450 से 500 छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। एल्युमिनियम की 125 से ज्यादा फैक्टरियां चल रही हैं। पीतल और तांबे की करीब 100 फैक्टरियां हैं। करीब 250 से ज्यादा इकाइयां बर्तनों का निर्यात करती हैं। इनमें 100 इकाइयां अरब देशों में काम कर रही हैं।