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फसल न मिलने से प्रदेश का एक मात्र हल्दी प्लांट बंद
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रादौर में बंद पड़ा हल्दी प्लांट।
- फोटो : YAMUNA NAGAR
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हैफेड द्वारा लगभग 10 वर्ष पहले शहर में बापौली रोड पर प्रदेश का पहला व एकमात्र हल्दी प्लांट लगाया था। हल्दी की फसल न मिलने पर यह प्लांट पिछले चार वर्षों से बंद पड़ा है। वर्षों से हल्दी प्लांट बंद होने से प्लांट में लगाई गई लाखों रुपये की मशीनरी बेकार पड़ी है। बता दें कि वर्षों पहले जब शहर में हैफेड द्वारा हल्दी प्लांट लगाया गया था तो क्षेत्र के किसानों को उस समय यह उम्मीद जगी थी कि अब क्षेत्र के किसानों की हल्दी की फसल अच्छे दाम मिलेंगे।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हल्दी की फसल के अच्छे दाम न मिलने पर किसानों ने हल्दी की फसल लगानी छोड़ दी। किसान नरेश, सुरेश, सुरेंद्र, राजकुमार, कर्मसिंह आदि ने बताया कि 2009 में हैफेड द्वारा शहर में लगभग 60 लाख रुपये की लागत से हल्दी प्लांट लगाया था। विभाग ने किसानों को आश्वासन दिया था कि उनकी हल्दी की फसल के बेहतर दाम दिए जाएंगे। जिससे प्रभावित होकर रादौर क्षेत्र में किसानों ने हजारों एकड़ में हल्दी की फसल लगाई थी। लेकिन सरकार ने किसानों की हल्दी की फसल औने पौने दामों पर खरीदी।
जिसके बाद किसानों ने हल्दी की फसल लगानी बंद कर दी। हैफेड ने प्लांट चलाने के लिए पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब व अन्य राज्यों से हल्दी की फसल आयात की। इसके बावजूद हल्दी प्लांट को भारी घाटा हुआ। जिसके बाद प्लांट हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। क्षेत्र के किसानों के लिए हैफेड का हल्दी प्लांट सफेद हाथी साबित हुआ। उधर हैफेड मैनेजर पवन कांबोज ने बताया कि क्षेत्र में किसानों द्वारा उगाई गई हल्दी की फसल की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। जिसके बाद हल्दी प्लांट बंद कर दिया गया। वहीं किसानों को भी हल्दी की फसल के उचित दाम नहीं मिल पाए थे। चार वर्ष से प्लांट बंद पड़ा हुआ है।
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लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हल्दी की फसल के अच्छे दाम न मिलने पर किसानों ने हल्दी की फसल लगानी छोड़ दी। किसान नरेश, सुरेश, सुरेंद्र, राजकुमार, कर्मसिंह आदि ने बताया कि 2009 में हैफेड द्वारा शहर में लगभग 60 लाख रुपये की लागत से हल्दी प्लांट लगाया था। विभाग ने किसानों को आश्वासन दिया था कि उनकी हल्दी की फसल के बेहतर दाम दिए जाएंगे। जिससे प्रभावित होकर रादौर क्षेत्र में किसानों ने हजारों एकड़ में हल्दी की फसल लगाई थी। लेकिन सरकार ने किसानों की हल्दी की फसल औने पौने दामों पर खरीदी।
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जिसके बाद किसानों ने हल्दी की फसल लगानी बंद कर दी। हैफेड ने प्लांट चलाने के लिए पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब व अन्य राज्यों से हल्दी की फसल आयात की। इसके बावजूद हल्दी प्लांट को भारी घाटा हुआ। जिसके बाद प्लांट हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। क्षेत्र के किसानों के लिए हैफेड का हल्दी प्लांट सफेद हाथी साबित हुआ। उधर हैफेड मैनेजर पवन कांबोज ने बताया कि क्षेत्र में किसानों द्वारा उगाई गई हल्दी की फसल की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। जिसके बाद हल्दी प्लांट बंद कर दिया गया। वहीं किसानों को भी हल्दी की फसल के उचित दाम नहीं मिल पाए थे। चार वर्ष से प्लांट बंद पड़ा हुआ है।
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