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Yamuna Nagar News: पुण्यतिथि पर महाराजा रणजीत सिंह को दी श्रद्धांजलि
Sun, 28 Jun 2026 03:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 28 Jun 2026 03:09 AM IST
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रादौर। जाट छात्रसंघ एवं जाट सभा की ओर से शनिवार को महाराजा रणजीत सिंह की 188 वीं पुण्यतिथि मनाई गई। छात्रसंघ प्रधान साहिल सिंह बालियान और जाट सभा रादौर प्रधान अधिवक्ता सुरेश पाल बंचल के नेतृत्व में युवाओं ने महाराजा रणजीत सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
साहिल सिंह बालियान ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह महान योद्धा, कुशल शासक और सिख साम्राज्य के संस्थापक थे। उन्हें शेर-ए-पंजाब के नाम से जाना जाता है। उनके नेतृत्व में पंजाब एक सशक्त और संगठित राज्य के रूप में स्थापित हुआ। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह के जीवनकाल में अंग्रेज उनके साम्राज्य पर कब्जा नहीं कर सके और उनकी वीरता का लोहा देश-विदेश तक माना जाता था। महाराजा रणजीत सिंह का जन्म वर्ष 1780 में गुजरांवाला (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। बचपन में चेचक के कारण उनकी एक आंख की रोशनी चली गई थी, लेकिन उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अद्भुत नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। वर्ष 1801 में उन्होंने महाराजा की उपाधि धारण की और लाहौर को अपनी राजधानी बनाया। इसके बाद उन्होंने अफगानों के विरुद्ध कई सफल अभियान चलाकर पश्चिमी पंजाब को सुरक्षित किया। संवाद
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साहिल सिंह बालियान ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह महान योद्धा, कुशल शासक और सिख साम्राज्य के संस्थापक थे। उन्हें शेर-ए-पंजाब के नाम से जाना जाता है। उनके नेतृत्व में पंजाब एक सशक्त और संगठित राज्य के रूप में स्थापित हुआ। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह के जीवनकाल में अंग्रेज उनके साम्राज्य पर कब्जा नहीं कर सके और उनकी वीरता का लोहा देश-विदेश तक माना जाता था। महाराजा रणजीत सिंह का जन्म वर्ष 1780 में गुजरांवाला (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। बचपन में चेचक के कारण उनकी एक आंख की रोशनी चली गई थी, लेकिन उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अद्भुत नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। वर्ष 1801 में उन्होंने महाराजा की उपाधि धारण की और लाहौर को अपनी राजधानी बनाया। इसके बाद उन्होंने अफगानों के विरुद्ध कई सफल अभियान चलाकर पश्चिमी पंजाब को सुरक्षित किया। संवाद
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