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Yamuna Nagar News: संभल कर करें सफर, 334 दिनों में 370 सड़क हादसे
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जिले की सड़कों पर संभल कर सफर करें, क्योंकि रोजाना सड़कें खून से लाल हो रही हैं। इस साल जनवरी से नवंबर माह तक 334 दिनों में कुल 370 सड़क हादसे हुए। इनमें 204 लोगों की जान चली गई। लगातार हो रहे इतने हादसे इस बात का प्रमाण है कि सड़कों की खामियां अभी भी दूर नहीं हुई है। टूटी व नियमों पर खरा नहीं उतरने वाली सड़कें वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। कई हादसे तो ऐसे हैं जिनमें एक से ज्यादा लोगों की मौत हुई। यह हाल तब है जब अधिकारी सड़क सुरक्षा की बैठक में हादसों को रोकने के लिए बड़े-बड़े दावे करते हैं। धरातल पर हादसों को रोकने के लिए कोई काम नहीं हो रहा। इंटीग्रेटिड रोड एक्सीडेंट डाटाबेस (आईआरएडी) एजेंसी द्वारा जिले में सड़क हादसों का यह डाटा जुटाया गया है। आईआरएडी न केवल डाटा जुटाती है बल्कि सड़क पर जहां हादसा हुआ है वहां इसके कारणों का पता करके संबंधित विभाग को सूचित भी करती है ताकि भविष्य में वहां दोबारा हादसा न हो।
370 सड़क हादसे में न केवल 204 लोगों की मौत हुई बल्कि 214 गंभीर रूप से घायल भी हुए। वहीं 133 लोग ऐसे हैं जिनकी कम चोट लगने से जान बच गई। आईआरएडी द्वारा जुटाए गए डाटा से पता चलता है कि पिछले 11 महीनों में दिन के समय सबसे ज्यादा 337 सड़क हादसे हुए। जिनमें 181 लोगों की मौत हो गई। कोहरे की वजह से 15 हादसे हुए जिनमें 12 लोगों की जान चली गई।
जिले में 24 प्वाइंट ऐसे हैं जहां पर सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं। यह प्वाइंट गुप्तचर विभाग ने चिन्हित किए हैं। गुप्तचर विभाग के अनुसार इन सभी जगहों पर सड़क हादसे की बड़ी वजह सड़कों पर सफेद व पीली रिफ्लेक्टर पट्टी व सड़क के बीच में सफेद पट्टी का नहीं होना है। साथ ही सड़कों के किनारे खड़े पेड़ों पर रेडियम टेप भी नहीं लगाई गई है। सांकेतिक बोर्ड भी नहीं है। वहीं सड़कों की मरम्मत न होने से भी हादसे हो रहे है। इन 24 प्वाइंट में कैल कचरा प्लांट चौक, बस अड्डा चौक जगाधरी, पंजेटो का अड्डा, भंभौली चौक, थाना छप्पर का चौराहा, जेल चौक जगाधरी, त्रिवेणी चौक छछरौली, तिकोनी चौक छछरौली, भीलपुरा मोड़, भूड़कला मोड़, बूड़िया रोड पर गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर से आधा किलोमीटर आगे, शेरपुर मोड़ छछरौली, दोसड़का चौक साढौरा, सरांवा टी-प्वाइंट, साढौरा में नकटी नदी पर बना पुल, शिव चौक बिलासपुर, मारवा कलां बस अड्डा, सुढल चौक बाईपास, विश्वकर्मा चौक यमुनानगर, त्रिवेणी चौक नजदीक जेएमआईटी कॉलेज रादौर, गुमथला मोड़, बस स्टॉप गुमथला, बस स्टॉप जठलाना, टी-प्वाइंट भोगपुर रादौर शामिल हैं।
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आईआरएडी के जिला मैनेजर जितेंद्र भल्ला ने बताया कि एजेंसी द्वारा सभी सड़क हादसों का ऑनलाइन डाटा तैयार किया जाता है। जहां पर हादसा होता है वहां दो वर्ग किलोमीटर में हादसे के कारणों का पता किया जाता है। मौके पर जाकर ही हादसे के बारे में सारी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाती है। हादसों के कारणों का पता करके उन्हें दूर कराया जाता है।
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370 सड़क हादसे में न केवल 204 लोगों की मौत हुई बल्कि 214 गंभीर रूप से घायल भी हुए। वहीं 133 लोग ऐसे हैं जिनकी कम चोट लगने से जान बच गई। आईआरएडी द्वारा जुटाए गए डाटा से पता चलता है कि पिछले 11 महीनों में दिन के समय सबसे ज्यादा 337 सड़क हादसे हुए। जिनमें 181 लोगों की मौत हो गई। कोहरे की वजह से 15 हादसे हुए जिनमें 12 लोगों की जान चली गई।
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जिले में 24 प्वाइंट ऐसे हैं जहां पर सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं। यह प्वाइंट गुप्तचर विभाग ने चिन्हित किए हैं। गुप्तचर विभाग के अनुसार इन सभी जगहों पर सड़क हादसे की बड़ी वजह सड़कों पर सफेद व पीली रिफ्लेक्टर पट्टी व सड़क के बीच में सफेद पट्टी का नहीं होना है। साथ ही सड़कों के किनारे खड़े पेड़ों पर रेडियम टेप भी नहीं लगाई गई है। सांकेतिक बोर्ड भी नहीं है। वहीं सड़कों की मरम्मत न होने से भी हादसे हो रहे है। इन 24 प्वाइंट में कैल कचरा प्लांट चौक, बस अड्डा चौक जगाधरी, पंजेटो का अड्डा, भंभौली चौक, थाना छप्पर का चौराहा, जेल चौक जगाधरी, त्रिवेणी चौक छछरौली, तिकोनी चौक छछरौली, भीलपुरा मोड़, भूड़कला मोड़, बूड़िया रोड पर गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर से आधा किलोमीटर आगे, शेरपुर मोड़ छछरौली, दोसड़का चौक साढौरा, सरांवा टी-प्वाइंट, साढौरा में नकटी नदी पर बना पुल, शिव चौक बिलासपुर, मारवा कलां बस अड्डा, सुढल चौक बाईपास, विश्वकर्मा चौक यमुनानगर, त्रिवेणी चौक नजदीक जेएमआईटी कॉलेज रादौर, गुमथला मोड़, बस स्टॉप गुमथला, बस स्टॉप जठलाना, टी-प्वाइंट भोगपुर रादौर शामिल हैं।
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आईआरएडी के जिला मैनेजर जितेंद्र भल्ला ने बताया कि एजेंसी द्वारा सभी सड़क हादसों का ऑनलाइन डाटा तैयार किया जाता है। जहां पर हादसा होता है वहां दो वर्ग किलोमीटर में हादसे के कारणों का पता किया जाता है। मौके पर जाकर ही हादसे के बारे में सारी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाती है। हादसों के कारणों का पता करके उन्हें दूर कराया जाता है।