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हिंसा को सहना खुद के आत्म सम्मान और अधिकारों का हनन है : रजनी
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पानीपत। महिला सरंक्षक एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी ने 2024 में बाल विवाह के 25 मामलों में संज्ञान लेते हुए आरोपियों पर कार्रवाई की है। इन बाल विवाह को रद्द कराया है। लगातार शिविर लगाकर लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है।
महिला सरंक्षक एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएं। यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं है बल्कि आत्म सम्मान, न्याय और समानता की लड़ाई है। घरेलू हिंसा केवल शारीरिक चोट तक सीमित नहीं है। यह मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से महिलाओं और परिवारों को प्रभावित करती है। इस समस्या को गंभीरता से समझने और इससे जड़ से खत्म करने का हमें संकल्प लेना चाहिए।
घरेलू हिंसा एक ऐसी अनोखी समस्या है जिसे अक्सर परिवार का निजी का मामला समझ कर नजर अंदाज कर दिया जाता है। समाज की चुप्पी और पीडि़ता की सहनशीलता इसे और बढ़ावा देती है। हर चोट और अपमान के पीछे एक ही संदेश होता है तुम्हारा कोई मूल्य नहीं, लेकिन यह झूठ है। हर व्यक्ति का जीवन मूल्यवान है और उसे सम्मान व सुरक्षा का अधिकार है।
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हिंसा सहना खुद के आत्म सम्मान और अधिकारों का हनन है। जब हम हिंसा सहते है तो अपराधी को और अधिक ताकतवर बनाते है। यह न केवल मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर करता है बल्कि बच्चों और परिवार पर भी गहरा प्रभाव डालता है। उन्होंने बताया कि बच्चों के सामने हिंसा होने से उनका जीवन अंधकारमय हो सकता है। यह चक्र तभी टूट सकता है जब खुद इसे रोकने का फैसला करें।
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महिला सरंक्षक एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएं। यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं है बल्कि आत्म सम्मान, न्याय और समानता की लड़ाई है। घरेलू हिंसा केवल शारीरिक चोट तक सीमित नहीं है। यह मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से महिलाओं और परिवारों को प्रभावित करती है। इस समस्या को गंभीरता से समझने और इससे जड़ से खत्म करने का हमें संकल्प लेना चाहिए।
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घरेलू हिंसा एक ऐसी अनोखी समस्या है जिसे अक्सर परिवार का निजी का मामला समझ कर नजर अंदाज कर दिया जाता है। समाज की चुप्पी और पीडि़ता की सहनशीलता इसे और बढ़ावा देती है। हर चोट और अपमान के पीछे एक ही संदेश होता है तुम्हारा कोई मूल्य नहीं, लेकिन यह झूठ है। हर व्यक्ति का जीवन मूल्यवान है और उसे सम्मान व सुरक्षा का अधिकार है।
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हिंसा सहना खुद के आत्म सम्मान और अधिकारों का हनन है। जब हम हिंसा सहते है तो अपराधी को और अधिक ताकतवर बनाते है। यह न केवल मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर करता है बल्कि बच्चों और परिवार पर भी गहरा प्रभाव डालता है। उन्होंने बताया कि बच्चों के सामने हिंसा होने से उनका जीवन अंधकारमय हो सकता है। यह चक्र तभी टूट सकता है जब खुद इसे रोकने का फैसला करें।