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Yamuna Nagar News: सेक्टर-15 में 'टिकोमा' के फूलों की आई बहार
Mon, 08 Apr 2024 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 08 Apr 2024 12:40 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सेक्टर 15 में जाते ही आपको टिकोमा फूलों की बहार नजर आएगी। यदि पास से गुजरो तो सुगंध भी मिलेगी। इस पर आजकल यह सेक्टर आकर्षण का केंद्र भी बना हुआ है। यह सब ग्रीनमैन के नाम से पहचाने जाने वाले प्रोफेसर एसएल सैनी की मेहनत से हुआ है। उन्होंने दो-तीन साल पहले इसी सेक्टर में टिकोमा फूलों के पौधे लगाए और खुद देखभाल भी की। अब ये पेड़ बन चुके हैं।
पेड़ों पर अब पीले फूलों की ऐसी बहार आई है कि जिसे देखकर हर कोई चकित है। प्रो. सैनी ने कहते हैं वैसे तो यह पेड़ 15 से 20 फीट का हो जाता है। फूल आने के बाद पेड़ सुंदर दिखे इनकी कटिंग भी खुद कराई। ऐसे में पेड़ गोलाकार होने पर फूल अब छटा बिखेर रहे हैं। प्रो. सैनी पिछले 34 वर्षों से पर्यावरण को बचाने में जुटे हैं। इस दौरान वे शहर में करीब सवा दो लाख से अधिक पौधे अलग-अलग जगहों पर लगा चुके हैं, जो अब बड़े वृक्ष बन चुके हैं।
प्रो. सैनी बताते हैं सन 1991 संस्था हरियाणा एनवायरमेंटल सोसाइटी शुरू की थी। यमुनानगर के अलावा अंबाला, पंचकूला और कुरुक्षेत्र में करीब दो लाख से अधिक पौधे रोपित किए जा चुके हैं। यमुनानगर जिले में उन्होंने बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराया। पर्यावरण के प्रति उनकी समर्पण भावना को देखते हुए वर्ष 2003 में तत्कालीन राज्यपाल बाबू परमानंद के हाथों उन्हें ग्रीन मैन के खिताब से नवाजा गया। पौधों को बड़े होने तक सुरक्षित रखने का जिम्मा भी संस्था उठाती है। इसके लिए बाकायदा पौधों पर ट्री-गार्ड लगाए जाते हैं।
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इस तरह से मिली प्रेरणा
सैनी बताते हैं उन्होंने गणित में पीएचडी करने के बाद बतौर प्रोफेसर काम किया। उन्हें रिटायर हुए अब 16 साल हो चुके हैं। जब वो अपनी जॉब के दौरान फॉरन टीचिंग असाइनमेंट के लिए विदेश गए थे, तो वहां उन्हें एक जापानी प्रोफेसर मिले, जिनके साथ चर्चा के दौरान उन्हें इस सोशल काम की प्रेरणा मिली। यमुनानगर लौटने के बाद उन्होंने देखा कि औद्योगिक होने के कारण यहां हर तरफ बंजर भूमि, धूल मिट्टी और प्रदूषण की भरमार है। तब उन्हें लगा कि पर्यावरण को बचाने के लिए उन्हें यहीं से पहल करनी पड़ेगी। शुरुआत में एक साल तक उन्होंने अपनी जेब से अकेले इस काम को किया।
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यमुनानगर। सेक्टर 15 में जाते ही आपको टिकोमा फूलों की बहार नजर आएगी। यदि पास से गुजरो तो सुगंध भी मिलेगी। इस पर आजकल यह सेक्टर आकर्षण का केंद्र भी बना हुआ है। यह सब ग्रीनमैन के नाम से पहचाने जाने वाले प्रोफेसर एसएल सैनी की मेहनत से हुआ है। उन्होंने दो-तीन साल पहले इसी सेक्टर में टिकोमा फूलों के पौधे लगाए और खुद देखभाल भी की। अब ये पेड़ बन चुके हैं।
पेड़ों पर अब पीले फूलों की ऐसी बहार आई है कि जिसे देखकर हर कोई चकित है। प्रो. सैनी ने कहते हैं वैसे तो यह पेड़ 15 से 20 फीट का हो जाता है। फूल आने के बाद पेड़ सुंदर दिखे इनकी कटिंग भी खुद कराई। ऐसे में पेड़ गोलाकार होने पर फूल अब छटा बिखेर रहे हैं। प्रो. सैनी पिछले 34 वर्षों से पर्यावरण को बचाने में जुटे हैं। इस दौरान वे शहर में करीब सवा दो लाख से अधिक पौधे अलग-अलग जगहों पर लगा चुके हैं, जो अब बड़े वृक्ष बन चुके हैं।
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प्रो. सैनी बताते हैं सन 1991 संस्था हरियाणा एनवायरमेंटल सोसाइटी शुरू की थी। यमुनानगर के अलावा अंबाला, पंचकूला और कुरुक्षेत्र में करीब दो लाख से अधिक पौधे रोपित किए जा चुके हैं। यमुनानगर जिले में उन्होंने बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराया। पर्यावरण के प्रति उनकी समर्पण भावना को देखते हुए वर्ष 2003 में तत्कालीन राज्यपाल बाबू परमानंद के हाथों उन्हें ग्रीन मैन के खिताब से नवाजा गया। पौधों को बड़े होने तक सुरक्षित रखने का जिम्मा भी संस्था उठाती है। इसके लिए बाकायदा पौधों पर ट्री-गार्ड लगाए जाते हैं।
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इस तरह से मिली प्रेरणा
सैनी बताते हैं उन्होंने गणित में पीएचडी करने के बाद बतौर प्रोफेसर काम किया। उन्हें रिटायर हुए अब 16 साल हो चुके हैं। जब वो अपनी जॉब के दौरान फॉरन टीचिंग असाइनमेंट के लिए विदेश गए थे, तो वहां उन्हें एक जापानी प्रोफेसर मिले, जिनके साथ चर्चा के दौरान उन्हें इस सोशल काम की प्रेरणा मिली। यमुनानगर लौटने के बाद उन्होंने देखा कि औद्योगिक होने के कारण यहां हर तरफ बंजर भूमि, धूल मिट्टी और प्रदूषण की भरमार है। तब उन्हें लगा कि पर्यावरण को बचाने के लिए उन्हें यहीं से पहल करनी पड़ेगी। शुरुआत में एक साल तक उन्होंने अपनी जेब से अकेले इस काम को किया।