{"_id":"60b9446f8ebc3e375a114126","slug":"thousand-case-pending-in-court-yamuna-nagar-news-knl720090100","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अदालत में हजारों केस पेंडिंग, गिरफ्तारी और जमानत पर सुनवाई, बाकि केसों में मिल रही तारीख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अदालत में हजारों केस पेंडिंग, गिरफ्तारी और जमानत पर सुनवाई, बाकि केसों में मिल रही तारीख
विज्ञापन
कोविड की पहली और दूसरी लहर ने जहां आम जनजीवन को प्रभावित किया है। वहीं अदालतों के कामकाज पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। संक्रमण से न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी एवं वकील भी अछूते नहीं रहे और 100 से ज्यादा अधिवक्ताओं को संक्रमण का दंश झेलना पड़ा। वहीं, कोरोना संक्रमण के चलते दो वकीलों का निधन भी हुआ है।
कोरोना के कहर का न्यायिक प्रक्रिया पर इतना गंभीर असर पड़ा है कि जिले की अदालतों में हजारों की संख्या में मुकदमे लंबित हो गए हैं। इनमें अब सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है। जिला बार एसोसिएशन के मुताबिक 90 फीसदी कामकाज बंद है और वर्तमान में केवल जमानत और ज्यूडिशियल कस्टडी रिमांड यानी न्यायिक हिरासत के प्रार्थना पत्रों पर ही सुनवाई हो रही है। इनमें भी रोस्टर वार न्यायिक अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
ताकि रिमांड और जमानत के प्रार्थना पत्र कम से कम लंबित हों। अदालती कामकाज के लिए कोर्ट परिसर में आने वाले लोग तो परेशान हैं ही, साथ ही अधिवक्ता वर्ग भी बहुत ज्यादा आर्थिक संकट से जूझ रहा है। केसों की सुनवाई न होने की वजह से फिलहाल उनकी आय का साधन भी ठप है। जिसके चलते एसोसिएशन ने सरकार को चिट्ठी लिखकर कोरोना महामारी के समय में जरूरतमंद अधिवक्ताओं के लिए 30 लाख रुपये की ग्रांट उपलब्ध करवाने की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अधिवक्ताओं के लिए दिल्ली की तर्ज पर सोशल सिक्योरिटी स्कीम बनाई जाएं और प्रत्येक वकील को 10 लाख रुपये की मेडिकल, बीमा और अन्य तरह की सहायता उपलब्ध करवाई जाए। जगाधरी ज्यूडिशियल कांप्लेक्स में 17 कोर्ट हैं। जिनमें से रोस्टर के अनुसार रोजाना पांच से सात कोर्ट खुलती हैं। यहां करीब 1800 स्थानीय वकील काम करते हैं।
विज्ञापन
कोट्स
कोरोना के चलते अधिवक्ताओं की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है। अधिकतर अधिवक्ताओं के पास दूसरा कोई काम नहीं था और उनका मुख्य व्यवसाय वकालत ही है। ऐसे में उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि दिल्ली की तर्ज पर सोशल सिक्योरिटी स्कीम बनाकर इस मुश्किल दौर में वकीलों की सहायता की जाएं। वहीं बार काउंसिल से भी आपात ग्रांट मांगी गई है।
- भानू प्रताप सिंह चौहान, प्रेजीडेंट, जगाधरी बार एसोसिएशन
---
पिछले साल दिसंबर में कोरोना के केस कम हो गए थे। ऐसा लगता था कि अब काम चल जाएगा, लेकिन इस साल अप्रैल में कोविड की दूसरी लहर ने फिर कहर बरपा दिया। इस बार हालात ज्यादा गंभीर हो गए हैं। सवा साल से अधिवक्ताओं के पास काम नहीं है। तीसरी लहर की भी बात की जा रही है। अगर ऐसा होता है तो आने वाले समय में वकालत पेशे की कमर टूट जाएगी।
- मोहित छिब्बर, वाइस प्रेजीडेंट, बार एसोसिएशन
---
अदालतों में कोरोना की वजह से हजारों केसों की सुनवाई लटकी पड़ी है। रोस्टर के अनुसार जरूरी केसों की सुनवाई ही की जा रही है। अदालतें बंद होने की वजह से वकीलों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। फिलहाल आय का कोई साधन नहीं बन रहा है। वकीलों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए बार एसोसिएशन के पत्र पर मुख्यमंत्री को कदम उठाने चाहिए।
-जसबीर सिंह बाल्यान, जनरल सेक्रेटरी, बार एसोसिएशन
---
वकीलों का काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। 60 फीसदी अधिवक्ता केवल वकालत ही करते हैं। कोर्ट में कामकाज प्रभावित होने से मुश्किल हो गई है। उम्मीद है कि ये मुश्किल दौर गुजर जाएगा और फिर से कोर्ट में कामकाज शुरू होगा।
हरिओम शर्मा, ज्वाइंट सेक्रेटरी, बार एसोसिएशन
---
कोरोना के चलते स्थिति बेहद खराब होती जा रही है। अदालत परिसर में अधिवक्ताओं के साथ मुंशी, स्टांप वेंडर, टाइपिस्ट, फोटो स्टेट आदि अन्य काम करने वाले भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। सरकार को हर वर्ग को पैकेज देते समय अधिवक्ताओं का भी ख्याल रखना होगा।
सन्नी वर्मा, कोषाध्यक्ष
विज्ञापन
कोरोना के कहर का न्यायिक प्रक्रिया पर इतना गंभीर असर पड़ा है कि जिले की अदालतों में हजारों की संख्या में मुकदमे लंबित हो गए हैं। इनमें अब सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है। जिला बार एसोसिएशन के मुताबिक 90 फीसदी कामकाज बंद है और वर्तमान में केवल जमानत और ज्यूडिशियल कस्टडी रिमांड यानी न्यायिक हिरासत के प्रार्थना पत्रों पर ही सुनवाई हो रही है। इनमें भी रोस्टर वार न्यायिक अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
विज्ञापन
ताकि रिमांड और जमानत के प्रार्थना पत्र कम से कम लंबित हों। अदालती कामकाज के लिए कोर्ट परिसर में आने वाले लोग तो परेशान हैं ही, साथ ही अधिवक्ता वर्ग भी बहुत ज्यादा आर्थिक संकट से जूझ रहा है। केसों की सुनवाई न होने की वजह से फिलहाल उनकी आय का साधन भी ठप है। जिसके चलते एसोसिएशन ने सरकार को चिट्ठी लिखकर कोरोना महामारी के समय में जरूरतमंद अधिवक्ताओं के लिए 30 लाख रुपये की ग्रांट उपलब्ध करवाने की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अधिवक्ताओं के लिए दिल्ली की तर्ज पर सोशल सिक्योरिटी स्कीम बनाई जाएं और प्रत्येक वकील को 10 लाख रुपये की मेडिकल, बीमा और अन्य तरह की सहायता उपलब्ध करवाई जाए। जगाधरी ज्यूडिशियल कांप्लेक्स में 17 कोर्ट हैं। जिनमें से रोस्टर के अनुसार रोजाना पांच से सात कोर्ट खुलती हैं। यहां करीब 1800 स्थानीय वकील काम करते हैं।
विज्ञापन
कोट्स
कोरोना के चलते अधिवक्ताओं की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है। अधिकतर अधिवक्ताओं के पास दूसरा कोई काम नहीं था और उनका मुख्य व्यवसाय वकालत ही है। ऐसे में उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि दिल्ली की तर्ज पर सोशल सिक्योरिटी स्कीम बनाकर इस मुश्किल दौर में वकीलों की सहायता की जाएं। वहीं बार काउंसिल से भी आपात ग्रांट मांगी गई है।
- भानू प्रताप सिंह चौहान, प्रेजीडेंट, जगाधरी बार एसोसिएशन
---
पिछले साल दिसंबर में कोरोना के केस कम हो गए थे। ऐसा लगता था कि अब काम चल जाएगा, लेकिन इस साल अप्रैल में कोविड की दूसरी लहर ने फिर कहर बरपा दिया। इस बार हालात ज्यादा गंभीर हो गए हैं। सवा साल से अधिवक्ताओं के पास काम नहीं है। तीसरी लहर की भी बात की जा रही है। अगर ऐसा होता है तो आने वाले समय में वकालत पेशे की कमर टूट जाएगी।
- मोहित छिब्बर, वाइस प्रेजीडेंट, बार एसोसिएशन
---
अदालतों में कोरोना की वजह से हजारों केसों की सुनवाई लटकी पड़ी है। रोस्टर के अनुसार जरूरी केसों की सुनवाई ही की जा रही है। अदालतें बंद होने की वजह से वकीलों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। फिलहाल आय का कोई साधन नहीं बन रहा है। वकीलों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए बार एसोसिएशन के पत्र पर मुख्यमंत्री को कदम उठाने चाहिए।
-जसबीर सिंह बाल्यान, जनरल सेक्रेटरी, बार एसोसिएशन
---
वकीलों का काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। 60 फीसदी अधिवक्ता केवल वकालत ही करते हैं। कोर्ट में कामकाज प्रभावित होने से मुश्किल हो गई है। उम्मीद है कि ये मुश्किल दौर गुजर जाएगा और फिर से कोर्ट में कामकाज शुरू होगा।
हरिओम शर्मा, ज्वाइंट सेक्रेटरी, बार एसोसिएशन
---
कोरोना के चलते स्थिति बेहद खराब होती जा रही है। अदालत परिसर में अधिवक्ताओं के साथ मुंशी, स्टांप वेंडर, टाइपिस्ट, फोटो स्टेट आदि अन्य काम करने वाले भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। सरकार को हर वर्ग को पैकेज देते समय अधिवक्ताओं का भी ख्याल रखना होगा।
सन्नी वर्मा, कोषाध्यक्ष