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सच्चे मन से प्रभु का ध्यान करने वाले को मिलती है मुक्ति : सुचेता
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एसएस जैन सभा में प्रवचन करतीं साध्वी सुचेता व अन्य। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 10वें दिन महा साध्वी सुचेता ने भजनों से महावीर स्वामी की भक्ति का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि सच्चे मन, सच्चे वचन और सच्ची काया से जो भी प्राणी प्रभु वीतराग का ध्यान करता है उसका जन्म मरण का बंधन खत्म हो जाता है और उसे मुक्ति प्राप्त होती है।
भजन के माध्यम से उन्होंने दया, करुणा और दान की महिमा समझाई। उन्होंने कहा कि यदि दान देते हुए व्यक्ति के मन में कुछ प्राप्ति की इच्छा होती है या अहंकार होता है कि मैं दान दे रहा हूं तो उस दान का कोई भी लाभ नहीं होता। दान देते हुए नजरें नीचे होनी चाहिए। जैसे रहीम दास ने कहा था देनहार कोई और है, देवत है दिन रैन, लोग भरम मुझ पर करें तासु नीचे नैन, इसी प्रकार महा साध्वी ने समझाया कि यदि आप अपने मन में कुछ बुरा सोच भी रहे हो तो जैन धर्म के अनुसार आपने कर्म बंधन कर लिया है। केवल सोचने मात्र से भी आपको उस पाप कर्म के फल को भोगना पड़ेगा। साध्वी समीक्षा महाराज ने सामयिक के गुण और सामयिक में अनायास होने वाले दोषों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि केवल 48 मिनट प्रभु का ध्यान करने से हम उस मार्ग की तरफ चल पड़ते हैं, जिस मार्ग को प्रभु वीतराग ने अपनाया था। यदि हम सच्चे मन से सामयिक करें और उसमें होने वाले दोषों से बचने का प्रयास करें तो हमें मोक्ष प्राप्ति अवश्य होगी। भजन के माध्यम से उन्होंने अहिंसा का महत्व समझाया। जैन धर्म हर जीव में आत्मा का वास है। इस सिद्धांत पर विश्वास करता है, इसलिए जैन धर्म में मांसाहार निषेध है।
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 10वें दिन महा साध्वी सुचेता ने भजनों से महावीर स्वामी की भक्ति का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि सच्चे मन, सच्चे वचन और सच्ची काया से जो भी प्राणी प्रभु वीतराग का ध्यान करता है उसका जन्म मरण का बंधन खत्म हो जाता है और उसे मुक्ति प्राप्त होती है।
भजन के माध्यम से उन्होंने दया, करुणा और दान की महिमा समझाई। उन्होंने कहा कि यदि दान देते हुए व्यक्ति के मन में कुछ प्राप्ति की इच्छा होती है या अहंकार होता है कि मैं दान दे रहा हूं तो उस दान का कोई भी लाभ नहीं होता। दान देते हुए नजरें नीचे होनी चाहिए। जैसे रहीम दास ने कहा था देनहार कोई और है, देवत है दिन रैन, लोग भरम मुझ पर करें तासु नीचे नैन, इसी प्रकार महा साध्वी ने समझाया कि यदि आप अपने मन में कुछ बुरा सोच भी रहे हो तो जैन धर्म के अनुसार आपने कर्म बंधन कर लिया है। केवल सोचने मात्र से भी आपको उस पाप कर्म के फल को भोगना पड़ेगा। साध्वी समीक्षा महाराज ने सामयिक के गुण और सामयिक में अनायास होने वाले दोषों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि केवल 48 मिनट प्रभु का ध्यान करने से हम उस मार्ग की तरफ चल पड़ते हैं, जिस मार्ग को प्रभु वीतराग ने अपनाया था। यदि हम सच्चे मन से सामयिक करें और उसमें होने वाले दोषों से बचने का प्रयास करें तो हमें मोक्ष प्राप्ति अवश्य होगी। भजन के माध्यम से उन्होंने अहिंसा का महत्व समझाया। जैन धर्म हर जीव में आत्मा का वास है। इस सिद्धांत पर विश्वास करता है, इसलिए जैन धर्म में मांसाहार निषेध है।
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