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ताले टूटे बिना एलआईसी कार्यालय की तिजोरी से गायब हो गए 40 लाख रुपये
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theft
- फोटो : Yamuna Nagar
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हुड्डा सेक्टर-17 स्थित एलआईसी कार्यालय में उस समय हंगामा मच गया, जब कर्मचारियों को बिना किसी हलचल के कैश काउंटर से 40 लाख रुपये गायब होने का पता चला। काउंटर में 42 लाख रुपये थे, जिसमें से 40 लाख रुपये गायब हो गए और दो लाख वहीं पड़े मिले। हैरत की बात यह कि कॉउंटर का न तो ताला टूटा है और न ही किसी के अंदर आने का पता चला। मामले की सूचना पुलिस को दी। एलआईसी कैश कॉउंटर से 40 लाख रुपये गायब होने की सूचना पर पुलिस में हड़कंप मच गया। दनदनाती पुलिस की गाड़ियां एलआईसी कार्यालय पहुंची। पुलिस यहां सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
शाखा मैनेजर अनिल कुमार ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार को 42 लाख रुपये कैश कॉउंटर की तिजौरी में रखे गए थे। जिसके बाद सोमवार तक छुट्टी रही। मंगलवार को कार्यालय खोला गया। इस दौरान कॉउंटर में देखा तो सिर्फ दो लाख रुपये थे। अनिल ने बताया कि कॉउंटर में गिन कर रुपये रखे गए थे। 27 नवंबर को यह कैश गिन कर रखा गया था और छुटटी होने के कारण बैंक में भी यह कैश जमा नहीं करवाया गया। लेकिन मंगलवार जब बैंक कर्मचारी कैश लेने के लिए यहां पहुंचे तो उन्हें जमा करने के लिए महज दो लाख रुपये ही कॉउंटर में मिले और 40 लाख रुपये गायब थे। तुरंत इस मामले की सूचना पुलिस को दी और सूचना पाते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
कैश काउंटर से रुपये गायब होने का कारनामा किसी अंदर या परिचित व्यक्ति का प्रतित हो रहा है। चूंकि कॉउंटर का ताला सलामत है। वहीं सिर्फ 40 लाख रुपये गायब है, जबकि दो लाख रुपये वहीं पड़े हैं। पुलिस का मानना है कि यदि बाहर वाले ने यह किया होता तो वह 42 लाख रुपये लेकर जाता। वहीं रुपये निकालने के लिए कॉउंटर का ताला तोड़ना पड़ता। वहीं यह भी मान लिया जाए कि गलती से कॉउंटर खुला रह गया, तो दो लाख रुपये वहां छोड़े क्यों गए। पुलिस का मानना है कि यह अंदर से किसी ने अंजाम दिया है।
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कैश काउंटर की तिजौरी से 40 लाख रुपये गायब होने के कर्मचारियों की हवाइयों उड़ी पड़ी हैं। वहीं सभी कर्मचारी पुलिस की रडार पर हैं। पुलिस सभी कर्मचारियों पर शक कर रही है और सभी से पूछताछ की जा रही है। सभी कर्मचारियों के कार्यालय आने और बाहर जाने की जांच की जा रही है। परिस्थितियां कर्मचारियों को संदेह के घेरे में खड़ा कर रही हैं। इसके अलावा कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित आने वाले एजेंटों की भी जानकारी पुलिस जुटा रही है।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की जानकारी लेने के बाद सभी कर्मचारी से फौरी पूछताछ की गई। पुलिस ने कार्यालय की फुटेज खंगाली। लेकिन पुलिस को इस फुटेज से कोई बड़ी सफलता व अहम जानकारी नहीं मिली। ऐसे में पुलिस डीवीआर कब्जे में लेकर जांच कर सकती है। वारदात की परिस्थितियों ने पुलिस के आला अधिकारियों भी परेशान कर दिया है।
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शाखा मैनेजर अनिल कुमार ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार को 42 लाख रुपये कैश कॉउंटर की तिजौरी में रखे गए थे। जिसके बाद सोमवार तक छुट्टी रही। मंगलवार को कार्यालय खोला गया। इस दौरान कॉउंटर में देखा तो सिर्फ दो लाख रुपये थे। अनिल ने बताया कि कॉउंटर में गिन कर रुपये रखे गए थे। 27 नवंबर को यह कैश गिन कर रखा गया था और छुटटी होने के कारण बैंक में भी यह कैश जमा नहीं करवाया गया। लेकिन मंगलवार जब बैंक कर्मचारी कैश लेने के लिए यहां पहुंचे तो उन्हें जमा करने के लिए महज दो लाख रुपये ही कॉउंटर में मिले और 40 लाख रुपये गायब थे। तुरंत इस मामले की सूचना पुलिस को दी और सूचना पाते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
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कैश काउंटर से रुपये गायब होने का कारनामा किसी अंदर या परिचित व्यक्ति का प्रतित हो रहा है। चूंकि कॉउंटर का ताला सलामत है। वहीं सिर्फ 40 लाख रुपये गायब है, जबकि दो लाख रुपये वहीं पड़े हैं। पुलिस का मानना है कि यदि बाहर वाले ने यह किया होता तो वह 42 लाख रुपये लेकर जाता। वहीं रुपये निकालने के लिए कॉउंटर का ताला तोड़ना पड़ता। वहीं यह भी मान लिया जाए कि गलती से कॉउंटर खुला रह गया, तो दो लाख रुपये वहां छोड़े क्यों गए। पुलिस का मानना है कि यह अंदर से किसी ने अंजाम दिया है।
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कैश काउंटर की तिजौरी से 40 लाख रुपये गायब होने के कर्मचारियों की हवाइयों उड़ी पड़ी हैं। वहीं सभी कर्मचारी पुलिस की रडार पर हैं। पुलिस सभी कर्मचारियों पर शक कर रही है और सभी से पूछताछ की जा रही है। सभी कर्मचारियों के कार्यालय आने और बाहर जाने की जांच की जा रही है। परिस्थितियां कर्मचारियों को संदेह के घेरे में खड़ा कर रही हैं। इसके अलावा कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित आने वाले एजेंटों की भी जानकारी पुलिस जुटा रही है।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की जानकारी लेने के बाद सभी कर्मचारी से फौरी पूछताछ की गई। पुलिस ने कार्यालय की फुटेज खंगाली। लेकिन पुलिस को इस फुटेज से कोई बड़ी सफलता व अहम जानकारी नहीं मिली। ऐसे में पुलिस डीवीआर कब्जे में लेकर जांच कर सकती है। वारदात की परिस्थितियों ने पुलिस के आला अधिकारियों भी परेशान कर दिया है।