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Yamuna Nagar News: दो प्रदेशों में बसा गांव, हरियाणा में दिन तो यूपी में बीतती है रात
Thu, 25 Jan 2024 04:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 25 Jan 2024 04:30 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर/बागपत। यहां एक ऐसा गांव है जो दो प्रदेशों यूपी और हरियाणा में बसा है। यह चौंकाने वाला जरूर है। लेकिन यमुना की धारा बदलने से यूपी के नंगला बहलोलपुर गांव की जमीन हरियाणा के सोनीपत जाने के कारण लोगों ने वहां भी अस्थाई मकान बना लिए है। इससे गांव के अधिकतर लोगों का हरियाणा में दिन और यूपी में रात बीतती है।
यूपी के बागपत जिले के नंगला बहलोलपुर गांव में करीब 200 परिवार हैं और गांव की आबादी 1100 के आसपास है। यमुना की धारा बदलने पर करीब तीस साल पहले नंगला बहलोलपुर की जमीन हरियाणा के सोनीपत में खुर्मपुर गांव की तरफ चली गई। गांव के लोग बताते है कि करीब 1250 बीघा जमीन हरियाणा की तरफ गई हैं। उस जमीन पर खेती करने के लिए किसानों को यमुना पार करने में जूझना पड़ता था तो जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद भी होता रहता था।
इस पर करीब 40 परिवारों ने हरियाणा की तरफ भी अस्थाई मकान बना लिए। अब नंगला बहलोलपुर गांव यूपी की तरफ बसा हुआ है और हरियाणा की तरफ भी मकान बने हुए है। ग्रामीण खेती करने के लिए दिन में हरियाणा की तरफ जाते हैं और वहां खेतों में काम करने के साथ ही उधर मकानों में दिन में रहते हैं।
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वहां से शाम को अधिकतर परिवार वापस यूपी लौट आते हैं, जबकि बाबू प्रजापति, राजबीर पांचाल, बाबू वाल्मिकी, सोहनवीर कश्यप, छोटे खान, जीतराम समेत कई परिवारों से एक-एक सदस्य हरियाणा की तरफ बने मकानों में रुक जाते हैं। इस तरह यमुना की धार ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया है।
जमीन हरियाणा में गई तो मुआवजा भी नहीं मिलता
यमुना में बाढ़ आने पर फसल खराब होती है तो जमीन हरियाणा की तरफ होने के कारण फसलों का मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों की पीड़ा है कि यूपी में यह कहा जाता है कि उनकी जमीन हरियाणा की तरफ है और हरियाणा में जमीन का रिकार्ड नहीं होने की बात कही जाती है। इस तरह मुआवजा देने के लिए पल्ला झाड़ लिया जाता है। यहां पिछले साल आई बाढ़ का मुआवजा भी नहीं मिल सका। इसके अलावा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे और बांध में गई जमीन का मुआवजा भी ऐसे ही विवाद में अटका हुआ है।
किसी का वोट हरियाणा तो किसी का यूपी में
गांव ही केवल दो प्रदेशों में नहीं बसा है, बल्कि किसी ग्रामीण की वोट भी हरियाणा में बनी है और किसी की यूपी में बनी हुई है। जिसने भी हरियाणा की तरफ अस्थाई मकान बना लिया है, उनकी वोट कुछ नेताओं ने चुनाव में फायदा लेने को उधर भी बनवा दी। जबकि ऐसे भी काफी ग्रामीण है, जिनकी दोनों तरफ वोट बनी है।
जमीन वहां जाने के कारण घर बनाने पड़े
नंगला बहलोलपुर गांव के सुंदर यादव बताते है कि हरियाणा की तरफ जमीन जाने के कारण करीब 40 परिवारों ने उधर भी मकान बना लिए है। यहां से सुबह को खेती करने जाते हैं और वहां से शाम को वापस आ जाते हैं। जबकि कुछ परिवार के लोग वहां मकानों में रहते हैं।
मनवीर यादव कहते है कि गांव की 1250 बीघा जमीन हरियाणा की तरफ चली गई है। बाढ़ आने पर फसल खराब हो जाती है तो उसका मुआवजा भी किसी भी तरफ से नहीं मिलता है। समस्या का कोई समाधान नहीं किया जाता है।
तेजपाल कहते है कि जमीन हरियाणा की तरफ चली गई है और वहां जाकर दिन में रहना पड़ता है। काफी लोगों की वोट भी उधर बनी हुई है। नंगला बहलोलपुर गांव यूपी और हरियाणा दोनों तरफ बस गया है।
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यमुनानगर/बागपत। यहां एक ऐसा गांव है जो दो प्रदेशों यूपी और हरियाणा में बसा है। यह चौंकाने वाला जरूर है। लेकिन यमुना की धारा बदलने से यूपी के नंगला बहलोलपुर गांव की जमीन हरियाणा के सोनीपत जाने के कारण लोगों ने वहां भी अस्थाई मकान बना लिए है। इससे गांव के अधिकतर लोगों का हरियाणा में दिन और यूपी में रात बीतती है।
यूपी के बागपत जिले के नंगला बहलोलपुर गांव में करीब 200 परिवार हैं और गांव की आबादी 1100 के आसपास है। यमुना की धारा बदलने पर करीब तीस साल पहले नंगला बहलोलपुर की जमीन हरियाणा के सोनीपत में खुर्मपुर गांव की तरफ चली गई। गांव के लोग बताते है कि करीब 1250 बीघा जमीन हरियाणा की तरफ गई हैं। उस जमीन पर खेती करने के लिए किसानों को यमुना पार करने में जूझना पड़ता था तो जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद भी होता रहता था।
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इस पर करीब 40 परिवारों ने हरियाणा की तरफ भी अस्थाई मकान बना लिए। अब नंगला बहलोलपुर गांव यूपी की तरफ बसा हुआ है और हरियाणा की तरफ भी मकान बने हुए है। ग्रामीण खेती करने के लिए दिन में हरियाणा की तरफ जाते हैं और वहां खेतों में काम करने के साथ ही उधर मकानों में दिन में रहते हैं।
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वहां से शाम को अधिकतर परिवार वापस यूपी लौट आते हैं, जबकि बाबू प्रजापति, राजबीर पांचाल, बाबू वाल्मिकी, सोहनवीर कश्यप, छोटे खान, जीतराम समेत कई परिवारों से एक-एक सदस्य हरियाणा की तरफ बने मकानों में रुक जाते हैं। इस तरह यमुना की धार ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया है।
जमीन हरियाणा में गई तो मुआवजा भी नहीं मिलता
यमुना में बाढ़ आने पर फसल खराब होती है तो जमीन हरियाणा की तरफ होने के कारण फसलों का मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों की पीड़ा है कि यूपी में यह कहा जाता है कि उनकी जमीन हरियाणा की तरफ है और हरियाणा में जमीन का रिकार्ड नहीं होने की बात कही जाती है। इस तरह मुआवजा देने के लिए पल्ला झाड़ लिया जाता है। यहां पिछले साल आई बाढ़ का मुआवजा भी नहीं मिल सका। इसके अलावा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे और बांध में गई जमीन का मुआवजा भी ऐसे ही विवाद में अटका हुआ है।
किसी का वोट हरियाणा तो किसी का यूपी में
गांव ही केवल दो प्रदेशों में नहीं बसा है, बल्कि किसी ग्रामीण की वोट भी हरियाणा में बनी है और किसी की यूपी में बनी हुई है। जिसने भी हरियाणा की तरफ अस्थाई मकान बना लिया है, उनकी वोट कुछ नेताओं ने चुनाव में फायदा लेने को उधर भी बनवा दी। जबकि ऐसे भी काफी ग्रामीण है, जिनकी दोनों तरफ वोट बनी है।
जमीन वहां जाने के कारण घर बनाने पड़े
नंगला बहलोलपुर गांव के सुंदर यादव बताते है कि हरियाणा की तरफ जमीन जाने के कारण करीब 40 परिवारों ने उधर भी मकान बना लिए है। यहां से सुबह को खेती करने जाते हैं और वहां से शाम को वापस आ जाते हैं। जबकि कुछ परिवार के लोग वहां मकानों में रहते हैं।
मनवीर यादव कहते है कि गांव की 1250 बीघा जमीन हरियाणा की तरफ चली गई है। बाढ़ आने पर फसल खराब हो जाती है तो उसका मुआवजा भी किसी भी तरफ से नहीं मिलता है। समस्या का कोई समाधान नहीं किया जाता है।
तेजपाल कहते है कि जमीन हरियाणा की तरफ चली गई है और वहां जाकर दिन में रहना पड़ता है। काफी लोगों की वोट भी उधर बनी हुई है। नंगला बहलोलपुर गांव यूपी और हरियाणा दोनों तरफ बस गया है।