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Yamuna Nagar News: सरकारी स्कूलों में दाखिलों का लक्ष्य रह गया अधूरा
Fri, 20 Sep 2024 02:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 20 Sep 2024 02:57 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से बड़े स्तर पर काम किया गया। इस दौरान विभिन्न तरीकों से सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं व योजनाओं के लाभ का प्रचार किया गया। स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को लेकर अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई थी। परंतु अध्यापकों के तबादले, लोकसभा चुनाव की ड्यूटियों ने शिक्षा विभाग का गणित बिगाड़ दिया गया।
इस दौरान विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों ने गलियों में घूम-घूम कर घरों के दरवाजे भी खटखटाए और लोगों को सरकारी स्कूल में बच्चों को भेजने के लिए प्रेरित किया। परंतु इस दौरान इन तमाम प्रयासों के बाद भी अपेक्षाकृत स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ नहीं पाई है। हालांकि जिला विभाग उनके विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की बात कह रहा है।
वहीं यह संख्या बालवाटिका के बच्चों को मिलाकर है। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या का ग्राफ 0.76 प्रतिशत कम हुआ है। इस बार सरकारी स्कूलों में पिछली बार से करीब चार हजार विद्यार्थी कम हैं। जबकि विभाग की ओर से अगस्त के अंत तक स्कूलों में दाखिले किए गए थे।
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जिले में पिछले साल की तुलना में इस बार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटी है। पिछले साल की तुलना में इस बार 3755 विद्यार्थी कम हुए हैं। पिछले साल जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या करीब 105000 थी। जबकि इस बार प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की कुल संख्या 101245 है। इस साल प्राथमिक पाठशालों में 41350 बच्चे पढ़ रहे हैं। जबकि माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 29106 है। वहीं, उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में 30789 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
विभाग की ओर से स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई थी। इसके लिए शिक्षकों ने गलियों-गलियों दौड़ भी लगाई। घर-घर पहुंचकर लोगों को सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं व योजनाओं के लाभ के बारे बताया। लोगों को उनके बच्चे सरकारी स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। वहीं, इस बीच लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लग गई। इस दौरान शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई।
पहले शिक्षक दाखिलों के लिए घर-घर जा रहे थे, चुनाव ड्यूटी के बाद वे मतदाता सूची लेकर सर्वे कर रहे थे। इसके चलते विभाग अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया। हालांकि निदेशालय ने कम दाखिले होने वाले जिलों के अधिकारियों से जवाब तलबी की बात कही है। परंतु अभी इसे लेकर किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिली है।
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को लेकर शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। जिला दाखिलों में पिछड़ा नहीं है। पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा दाखिले हुए हैं। कुछेक स्कूलों में दाखिले कम हुए हैं, लेकिन अन्यों में वृद्धि हुई है। जिले के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की संख्या में कमी नहीं आई है। - शिव कुमार धीमान, उप जिला शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से बड़े स्तर पर काम किया गया। इस दौरान विभिन्न तरीकों से सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं व योजनाओं के लाभ का प्रचार किया गया। स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को लेकर अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई थी। परंतु अध्यापकों के तबादले, लोकसभा चुनाव की ड्यूटियों ने शिक्षा विभाग का गणित बिगाड़ दिया गया।
इस दौरान विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों ने गलियों में घूम-घूम कर घरों के दरवाजे भी खटखटाए और लोगों को सरकारी स्कूल में बच्चों को भेजने के लिए प्रेरित किया। परंतु इस दौरान इन तमाम प्रयासों के बाद भी अपेक्षाकृत स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ नहीं पाई है। हालांकि जिला विभाग उनके विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की बात कह रहा है।
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वहीं यह संख्या बालवाटिका के बच्चों को मिलाकर है। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या का ग्राफ 0.76 प्रतिशत कम हुआ है। इस बार सरकारी स्कूलों में पिछली बार से करीब चार हजार विद्यार्थी कम हैं। जबकि विभाग की ओर से अगस्त के अंत तक स्कूलों में दाखिले किए गए थे।
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जिले में पिछले साल की तुलना में इस बार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटी है। पिछले साल की तुलना में इस बार 3755 विद्यार्थी कम हुए हैं। पिछले साल जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या करीब 105000 थी। जबकि इस बार प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की कुल संख्या 101245 है। इस साल प्राथमिक पाठशालों में 41350 बच्चे पढ़ रहे हैं। जबकि माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 29106 है। वहीं, उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में 30789 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
विभाग की ओर से स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई थी। इसके लिए शिक्षकों ने गलियों-गलियों दौड़ भी लगाई। घर-घर पहुंचकर लोगों को सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं व योजनाओं के लाभ के बारे बताया। लोगों को उनके बच्चे सरकारी स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। वहीं, इस बीच लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लग गई। इस दौरान शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई।
पहले शिक्षक दाखिलों के लिए घर-घर जा रहे थे, चुनाव ड्यूटी के बाद वे मतदाता सूची लेकर सर्वे कर रहे थे। इसके चलते विभाग अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया। हालांकि निदेशालय ने कम दाखिले होने वाले जिलों के अधिकारियों से जवाब तलबी की बात कही है। परंतु अभी इसे लेकर किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिली है।
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को लेकर शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। जिला दाखिलों में पिछड़ा नहीं है। पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा दाखिले हुए हैं। कुछेक स्कूलों में दाखिले कम हुए हैं, लेकिन अन्यों में वृद्धि हुई है। जिले के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की संख्या में कमी नहीं आई है। - शिव कुमार धीमान, उप जिला शिक्षा अधिकारी।