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भगवान शिव की कथा शिक्षाओं से ओतप्रोत : गौरी
Sun, 31 Aug 2025 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 31 Aug 2025 12:03 AM IST
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कथा में भजनों को श्रवण कर झूमते श्रद्धालु। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से शिव मंदिर पाबनी कलां में चल रही शिव कथा के अंतिम दिन साध्वी गौरी भारती ने बताया की भगवान शिव की कथा मानव जीवन को सुंदर बनाने के लिए अनंत शिक्षाओं से ओतप्रोत है। उन्होंने कहा कि कैलाश में परस्पर प्रेम के साथ निवास कर रहा शिव परिवार समाज को एकत्व के सूत्र में बंधने का संदेश देता है।
साध्वी ने कहा कि यदि हम भगवान शिव के परिवार का अवलोकन कर देखें तो पाएंगे कि भगवान शिव का वाहन नंदी है,मां पार्वती सिंह की सवारी करती हैं, कार्तिकेय का वाहन मोर,गणेश का वाहन चूहा है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का परिवार मानव समाज को संगठन शक्ति में बंधने की प्रेरणा देता है।
हमारे भारत की उक्ति है की संगठन में ही शक्ति होती है। संगठित लोग बड़ी से बड़ी समस्या व आपदा का सामना आसानी से कर सकते हैं। संगठित समाज सदैव विजयी होता है, परंतु आज समाज में संगठन कहीं नहीं रहा। जब भगवान शिव बारात लेकर चलते हैं तो बैल पर सवार हुए। बैल साक्षात धर्म का प्रतीक है।
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वह हमें बताना चाहते हैं कि हर इंसान को अपना कार्य धर्म में स्थित होकर करना चाहिए, परंतु आज वास्तविक को न जानने के कारण मानव समाज दानवों का समाज बन गया है। उन्होंने बताया कि मानव जीवन शिव व पार्वती के मिलन का एक दुर्लभ अवसर है। शिव भाव परमात्मा तथा पार्वती अर्थात आत्मा। लेकिन आज का मानव अपने इस वास्तविक लक्ष्य से अनभिज्ञ है।
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यमुनानगर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से शिव मंदिर पाबनी कलां में चल रही शिव कथा के अंतिम दिन साध्वी गौरी भारती ने बताया की भगवान शिव की कथा मानव जीवन को सुंदर बनाने के लिए अनंत शिक्षाओं से ओतप्रोत है। उन्होंने कहा कि कैलाश में परस्पर प्रेम के साथ निवास कर रहा शिव परिवार समाज को एकत्व के सूत्र में बंधने का संदेश देता है।
साध्वी ने कहा कि यदि हम भगवान शिव के परिवार का अवलोकन कर देखें तो पाएंगे कि भगवान शिव का वाहन नंदी है,मां पार्वती सिंह की सवारी करती हैं, कार्तिकेय का वाहन मोर,गणेश का वाहन चूहा है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का परिवार मानव समाज को संगठन शक्ति में बंधने की प्रेरणा देता है।
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हमारे भारत की उक्ति है की संगठन में ही शक्ति होती है। संगठित लोग बड़ी से बड़ी समस्या व आपदा का सामना आसानी से कर सकते हैं। संगठित समाज सदैव विजयी होता है, परंतु आज समाज में संगठन कहीं नहीं रहा। जब भगवान शिव बारात लेकर चलते हैं तो बैल पर सवार हुए। बैल साक्षात धर्म का प्रतीक है।
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वह हमें बताना चाहते हैं कि हर इंसान को अपना कार्य धर्म में स्थित होकर करना चाहिए, परंतु आज वास्तविक को न जानने के कारण मानव समाज दानवों का समाज बन गया है। उन्होंने बताया कि मानव जीवन शिव व पार्वती के मिलन का एक दुर्लभ अवसर है। शिव भाव परमात्मा तथा पार्वती अर्थात आत्मा। लेकिन आज का मानव अपने इस वास्तविक लक्ष्य से अनभिज्ञ है।