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Yamuna Nagar News: साध्वी ने साधक के गुणों का किया वर्णन
Mon, 12 May 2025 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 12 May 2025 12:42 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग हुआ। इसमें साध्वी सरस्वती भारती ने साधक के गुणों का वर्णन किया। उपस्थित संगत से कहा कि साधारण व्यक्ति से साधक बनने की यात्रा को तय करना सरल नहीं है, पर इस यात्रा को पूर्ण करके लक्ष्य को प्राप्त करना असंभव भी नहीं है।
साध्वी ने कहा कि जो साधना में मन, वचन व कर्म को साध लेता है, वो सच्चा साधक कहलाता है। साधक संसार में साधारण व्यक्ति की तरह विचरण करता है, पर अंतरात्मा से विरक्त व निर्मोही हो जाता है। इस पर किसी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। साधक कीचड़ में खिले कमल के फूल की तरह रहता है, जो पोषण तो कीचड़ से लेता है, पर सदैव सूर्य की ओर उन्मुख रहता है।
एक साधक जीवन में आने वाली कष्टदायक परिस्थितियों को भी आध्यात्मिक उन्नति की सीढ़ी बना लेता है। पत्थर से मूर्ति बनने की प्रक्रिया पत्थर के लिए कष्टदायक अवश्य होती है, पर इस संघर्ष द्वारा पत्थर के जीवन की सार्थकता सिद्ध हो जाती है। सत्संग कार्यक्रम के अंत में साध्वी बहनों ने प्रेरणा दायक भजनों का गायन किया, जिन्हें सुनकर उपस्थित संगत मंत्रमुग्ध हो गई।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग हुआ। इसमें साध्वी सरस्वती भारती ने साधक के गुणों का वर्णन किया। उपस्थित संगत से कहा कि साधारण व्यक्ति से साधक बनने की यात्रा को तय करना सरल नहीं है, पर इस यात्रा को पूर्ण करके लक्ष्य को प्राप्त करना असंभव भी नहीं है।
साध्वी ने कहा कि जो साधना में मन, वचन व कर्म को साध लेता है, वो सच्चा साधक कहलाता है। साधक संसार में साधारण व्यक्ति की तरह विचरण करता है, पर अंतरात्मा से विरक्त व निर्मोही हो जाता है। इस पर किसी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। साधक कीचड़ में खिले कमल के फूल की तरह रहता है, जो पोषण तो कीचड़ से लेता है, पर सदैव सूर्य की ओर उन्मुख रहता है।
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एक साधक जीवन में आने वाली कष्टदायक परिस्थितियों को भी आध्यात्मिक उन्नति की सीढ़ी बना लेता है। पत्थर से मूर्ति बनने की प्रक्रिया पत्थर के लिए कष्टदायक अवश्य होती है, पर इस संघर्ष द्वारा पत्थर के जीवन की सार्थकता सिद्ध हो जाती है। सत्संग कार्यक्रम के अंत में साध्वी बहनों ने प्रेरणा दायक भजनों का गायन किया, जिन्हें सुनकर उपस्थित संगत मंत्रमुग्ध हो गई।
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