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पक्के मकान बनवाने का वादा निकाला कच्चा
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पांच साल पहले शहर में रहने वाले लोगों ने सपना देखा था कि प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत उनका भी अपना पक्का घर होगा। पक्के घर की लालसा में उन्होंने अपने घर की कच्ची छत भी तोड़ दी और अब वे किस्त के लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। अपना घर होते हुए भी लोग बेघर हो गए। कोई किराये पर रहने को मजबूर है तो किसी ने आसपास की धर्मशाला या पड़ोसी के घर में सामान रखा हुआ है।
जानकारी के अनुसार पिछले पांच साल में योजना के तहत 753 परिवार ही तीनों किस्तें मिलने पर घर बनवा सके हैं। 1201 परिवार ऐसे हैं जो घर का निर्माण पूरा कराने के लिए किस्तों की आस में नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इनमें से कई परिवार ऐसे हैं। जिनके घर की केवल मियाद ही भरी जा सकी है तो किसी को घर की दीवारों पर लेंटर डलने का इंतजार है।
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अंतर्गत वर्ष 2017 में 4375 लोगों ने नगर निगम कार्यालय में घर बनाने के लिए आवेदन किया था। जांच करने पर अधिकारियों ने 2421 आवेदनों को अपात्र बताकर उन्हें रिजेक्ट कर दिया। शेष बचे 1954 लाभार्थियों को घर बनाने के लिए स्वीकृति पत्र जारी किए थे। योजना के तहत लाभार्थी को कुल ढाई लाख रुपये मिलते हैं। इसमें से एक लाख रुपये की पहली किस्त मकान की नींव रखे जाने के बाद, एक लाख की दूसरी किस्त मकान की दीवारें के लेंटर तक पहुंचने पर और 50 हजार रुपये की तीसरी किस्त लेंटर डाले जाने के बाद लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा कराई जाती है।
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1954 में से अब तक 1671 परिवारों को पहली, 1393 को दूसरी व 753 को तीसरी किस्त जारी की जा चुकी है। यानि 753 घर ही अब तक पूरे हो सके हैं। शर्तों के मुताबिक दूसरी व तीसरी किस्त के लिए पात्र लोगों ने नगर निगम अधिकारियों के पास आवेदन किया है, लेकिन उन्हें राशि नहीं मिल रही। जब लोग जानकारी लेने जाते हैं तो कर्मचारी जवाब दे देते हैं कि सरकार ने अभी बजट जारी नहीं किया है। पात्रों में 283 परिवार तो ऐसे हैं जिन्हें दूसरी, तीसरी तो दूर की बात अब तक पहली किस्त भी नहीं मिली है।
पार्षद देवेंद्र सिंह का कहना है कि योजना के तहत केंद्र सरकार से कब बजट आया और कर्मचारियों ने कब पात्रों के खाते में जमा कराया इसकी जांच होनी चाहिए। लोगों ने पक्के घर के चक्कर में अपने कच्चे मकान भी तोड़ दिए। किस्त के नाम पर अधिकारी लोगों को परेशान कर रहे हैं।
पार्षद निर्मल चौहान का कहना है कि पीएमएवाई का लाभ लेने के लिए लोगों ने पुराने घर तोड़ दिए। वह यह सोच कर किराये पर रहने लगे कि दो-तीन माह में उनका घर तैयार हो जाएगा। अब तक किसी को दूसरी तो किसी को तीसरी किस्त नहीं मिली। चार-पांच साल से लोग किराये पर या धर्मशाला में रह रहे हैं। इतने सालों में लाखों रुपये तो लोगों ने किराये पर खर्च कर दिए। घर अब भी पूरे नहीं हुए। इस योजना की विजिलेंस जांच होनी चाहिए।
नगर निगम कमिश्नर आयुष सिन्हा का कहना है कि पीएमएवाई योजना के तहत जिन पात्रों के किस्त के लिए आवेदन आते हैं उनके खाते में राशि जारी कर दी जाती है। इसी सप्ताह 179 लोगों को पहली व दूसरी किस्त जारी करने को मंजूरी दी गई है। किस्त देने की एवज में यदि कोई कर्मचारी रुपये मांगता है तो वह कार्यालय में शिकायत कर सकता है। रुपये मांगने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जानकारी के अनुसार पिछले पांच साल में योजना के तहत 753 परिवार ही तीनों किस्तें मिलने पर घर बनवा सके हैं। 1201 परिवार ऐसे हैं जो घर का निर्माण पूरा कराने के लिए किस्तों की आस में नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इनमें से कई परिवार ऐसे हैं। जिनके घर की केवल मियाद ही भरी जा सकी है तो किसी को घर की दीवारों पर लेंटर डलने का इंतजार है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अंतर्गत वर्ष 2017 में 4375 लोगों ने नगर निगम कार्यालय में घर बनाने के लिए आवेदन किया था। जांच करने पर अधिकारियों ने 2421 आवेदनों को अपात्र बताकर उन्हें रिजेक्ट कर दिया। शेष बचे 1954 लाभार्थियों को घर बनाने के लिए स्वीकृति पत्र जारी किए थे। योजना के तहत लाभार्थी को कुल ढाई लाख रुपये मिलते हैं। इसमें से एक लाख रुपये की पहली किस्त मकान की नींव रखे जाने के बाद, एक लाख की दूसरी किस्त मकान की दीवारें के लेंटर तक पहुंचने पर और 50 हजार रुपये की तीसरी किस्त लेंटर डाले जाने के बाद लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा कराई जाती है।
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1954 में से अब तक 1671 परिवारों को पहली, 1393 को दूसरी व 753 को तीसरी किस्त जारी की जा चुकी है। यानि 753 घर ही अब तक पूरे हो सके हैं। शर्तों के मुताबिक दूसरी व तीसरी किस्त के लिए पात्र लोगों ने नगर निगम अधिकारियों के पास आवेदन किया है, लेकिन उन्हें राशि नहीं मिल रही। जब लोग जानकारी लेने जाते हैं तो कर्मचारी जवाब दे देते हैं कि सरकार ने अभी बजट जारी नहीं किया है। पात्रों में 283 परिवार तो ऐसे हैं जिन्हें दूसरी, तीसरी तो दूर की बात अब तक पहली किस्त भी नहीं मिली है।
पार्षद देवेंद्र सिंह का कहना है कि योजना के तहत केंद्र सरकार से कब बजट आया और कर्मचारियों ने कब पात्रों के खाते में जमा कराया इसकी जांच होनी चाहिए। लोगों ने पक्के घर के चक्कर में अपने कच्चे मकान भी तोड़ दिए। किस्त के नाम पर अधिकारी लोगों को परेशान कर रहे हैं।
पार्षद निर्मल चौहान का कहना है कि पीएमएवाई का लाभ लेने के लिए लोगों ने पुराने घर तोड़ दिए। वह यह सोच कर किराये पर रहने लगे कि दो-तीन माह में उनका घर तैयार हो जाएगा। अब तक किसी को दूसरी तो किसी को तीसरी किस्त नहीं मिली। चार-पांच साल से लोग किराये पर या धर्मशाला में रह रहे हैं। इतने सालों में लाखों रुपये तो लोगों ने किराये पर खर्च कर दिए। घर अब भी पूरे नहीं हुए। इस योजना की विजिलेंस जांच होनी चाहिए।
नगर निगम कमिश्नर आयुष सिन्हा का कहना है कि पीएमएवाई योजना के तहत जिन पात्रों के किस्त के लिए आवेदन आते हैं उनके खाते में राशि जारी कर दी जाती है। इसी सप्ताह 179 लोगों को पहली व दूसरी किस्त जारी करने को मंजूरी दी गई है। किस्त देने की एवज में यदि कोई कर्मचारी रुपये मांगता है तो वह कार्यालय में शिकायत कर सकता है। रुपये मांगने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।