{"_id":"66dcc4f11719dbb9760dcde7","slug":"the-promise-of-bringing-the-saraswati-stream-to-the-surface-is-incomplete-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-124996-2024-09-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: सरस्वती की धारा धरातल पर लाने का वादा अधूरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: सरस्वती की धारा धरातल पर लाने का वादा अधूरा
Sun, 08 Sep 2024 02:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 08 Sep 2024 02:56 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश सरकार की ओर से सरस्वती नदी की धारा को धरा पर लाने के लिए सरस्वती हेरिटेज बोर्ड बनाकर करोड़ों रुपये की योजनाओं पर पानी की तरह पैसा बहाया गया। वहीं कस्बा में साढौरा मार्ग पर अजात आश्रम के समीप सरस्वती नदी महज एक गंदे नाले में तबदील हो गई है। इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप मिटने की कगार पर है। कस्बे का गंदे नाले सीधे सरस्वती में डाले जा रहे है। इस प्राचीन जल धारा के तट के समीप गंदगी के ढेर लगे है।
कस्बा से एक किलोमीटर पश्चिम में सरस्वती नदी के तट पर बने अजात आश्रम के आसपास तो विकास के कुछ कार्य हुए है। सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच ने भी कुछ दिन पूर्व आश्रम के समीप से बह रही सरस्वती नदी के किनारों को दुरूस्त करवा सुंदरीकरण की योजना बनाई थी, लेकिन इस पर अभी तक कोई कार्य नहीं हुआ। जिसको लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
अजात आश्रम संचालकों व कस्बा के गणमान्य लोगों ने अनेक बार प्रशासनिक अधिकारियों व नेताओं से मदद की गुहार लगाई, लेकिन आज तक किसी ने भी इस ओर मुड़ कर नहीं देखा। कपालमोचन में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय मेले के दौरान व अन्य पर्वाें पर भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान करने के लिए आते हैं, लेकिन घाट के पर गंदगी और कमियों को देखकर उनको निराशा मिलती है।
विज्ञापन
घाट के आसपास फैले जल क्षेत्र में काई व घास का साम्राज्य स्थापित हो चुका है। राज्यस्तरीय कपालमोचन मेले के दौरान भी सरस्वतीनदी की दुर्दशा को सुधारने के लिए आज तक कोई कार्य नहीं किया गया। पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालु वेदपाल, संदीप कुमार, संजीव कुमार का कहना है कि पानी के गंदा होने व बदबू होने के कारण अब उन्होंने स्नान करना ही छोड़ दिया है। बरसात में पानी जमा होने से परेशानी ओर बढ़ जाती है।
प्रशासन की ओर से कस्बा के गंदे नालों का रुख दूसरी तरफ मोड़ने की योजना बनाई थी, लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ पाई। प्रदेश सरकार द्वारा घाड़ क्षेत्र के रूलाहेड़ी व मुगलवाली से सरस्वती नदी की खोदाई कर पानी को धरा पर बहाने का प्रयास किया गया, लेकिन अभी तक इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली है।
कागजी योजना न बनाएं
बिलासपुर निवासी एडवोकेट प्रदीप नेहरा का कहना है कि करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा देने के बाद भी सरस्वती की दशा वैसी की वैसी है। प्रदेश सरकार सरस्वती नदी को धरा पर लाने के लिए केवल कागजी योजना न बनाए बल्कि इसे अमलीजामा पहना कर लागू करे ताकि श्रद्धालुओं की आस्था सरस्वती नदी के प्रति बनी रहे।
करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी
बिलासपुर निवासी शिव कुमार बंसल का कहना है कि सरस्वती की पवित्र धारा से देश के करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। जिसके जीर्णाेंद्धार के लिए योजना बना कर विकास कार्य करना जरूरी है। सरस्वती नदी को लेकर शुरू हुए विकास कार्य समय से पूरे होने चाहिए। अब यह केवल गंदे नाले का रूप ले चुकी है। इसलिए इस पर गंभीरता से काम करना होगा।
विशेष योजना बनाई जाए
सुभाष मोदगिल का कहना है कि कस्बा में अजात आश्रम के समीप से गुजरने वाली सरस्वती नदी की दशा का सुधारने के लिए कार्य करना बहुत जरूरी है। सरस्वती नदी से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। जिसके उद्धार के लिए कार्य किया जाना बहुत जरूरी है। प्रदेश सरकार विशेष योजना बना कर सुंदरीकरण के कार्य को पूरा किया जाए।
विज्ञापन
बिलासपुर। प्रदेश सरकार की ओर से सरस्वती नदी की धारा को धरा पर लाने के लिए सरस्वती हेरिटेज बोर्ड बनाकर करोड़ों रुपये की योजनाओं पर पानी की तरह पैसा बहाया गया। वहीं कस्बा में साढौरा मार्ग पर अजात आश्रम के समीप सरस्वती नदी महज एक गंदे नाले में तबदील हो गई है। इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप मिटने की कगार पर है। कस्बे का गंदे नाले सीधे सरस्वती में डाले जा रहे है। इस प्राचीन जल धारा के तट के समीप गंदगी के ढेर लगे है।
कस्बा से एक किलोमीटर पश्चिम में सरस्वती नदी के तट पर बने अजात आश्रम के आसपास तो विकास के कुछ कार्य हुए है। सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच ने भी कुछ दिन पूर्व आश्रम के समीप से बह रही सरस्वती नदी के किनारों को दुरूस्त करवा सुंदरीकरण की योजना बनाई थी, लेकिन इस पर अभी तक कोई कार्य नहीं हुआ। जिसको लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
विज्ञापन
अजात आश्रम संचालकों व कस्बा के गणमान्य लोगों ने अनेक बार प्रशासनिक अधिकारियों व नेताओं से मदद की गुहार लगाई, लेकिन आज तक किसी ने भी इस ओर मुड़ कर नहीं देखा। कपालमोचन में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय मेले के दौरान व अन्य पर्वाें पर भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान करने के लिए आते हैं, लेकिन घाट के पर गंदगी और कमियों को देखकर उनको निराशा मिलती है।
विज्ञापन
घाट के आसपास फैले जल क्षेत्र में काई व घास का साम्राज्य स्थापित हो चुका है। राज्यस्तरीय कपालमोचन मेले के दौरान भी सरस्वतीनदी की दुर्दशा को सुधारने के लिए आज तक कोई कार्य नहीं किया गया। पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालु वेदपाल, संदीप कुमार, संजीव कुमार का कहना है कि पानी के गंदा होने व बदबू होने के कारण अब उन्होंने स्नान करना ही छोड़ दिया है। बरसात में पानी जमा होने से परेशानी ओर बढ़ जाती है।
प्रशासन की ओर से कस्बा के गंदे नालों का रुख दूसरी तरफ मोड़ने की योजना बनाई थी, लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ पाई। प्रदेश सरकार द्वारा घाड़ क्षेत्र के रूलाहेड़ी व मुगलवाली से सरस्वती नदी की खोदाई कर पानी को धरा पर बहाने का प्रयास किया गया, लेकिन अभी तक इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली है।
कागजी योजना न बनाएं
बिलासपुर निवासी एडवोकेट प्रदीप नेहरा का कहना है कि करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा देने के बाद भी सरस्वती की दशा वैसी की वैसी है। प्रदेश सरकार सरस्वती नदी को धरा पर लाने के लिए केवल कागजी योजना न बनाए बल्कि इसे अमलीजामा पहना कर लागू करे ताकि श्रद्धालुओं की आस्था सरस्वती नदी के प्रति बनी रहे।
करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी
बिलासपुर निवासी शिव कुमार बंसल का कहना है कि सरस्वती की पवित्र धारा से देश के करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। जिसके जीर्णाेंद्धार के लिए योजना बना कर विकास कार्य करना जरूरी है। सरस्वती नदी को लेकर शुरू हुए विकास कार्य समय से पूरे होने चाहिए। अब यह केवल गंदे नाले का रूप ले चुकी है। इसलिए इस पर गंभीरता से काम करना होगा।
विशेष योजना बनाई जाए
सुभाष मोदगिल का कहना है कि कस्बा में अजात आश्रम के समीप से गुजरने वाली सरस्वती नदी की दशा का सुधारने के लिए कार्य करना बहुत जरूरी है। सरस्वती नदी से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। जिसके उद्धार के लिए कार्य किया जाना बहुत जरूरी है। प्रदेश सरकार विशेष योजना बना कर सुंदरीकरण के कार्य को पूरा किया जाए।