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Yamuna Nagar News: तीन स्वर्ण पदक जीतने पर पावरलिफ्टिंग खिलाड़ी किया स्वागत
Sun, 21 Dec 2025 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 21 Dec 2025 12:05 AM IST
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स्वर्ण पदक विजेता का गांव पहुंचने पर स्वागत करते ग्रामीण। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
सरस्वतीनगर। ब्लॉक के गांव ऊंचा चंदना निवासी जसप्रीत सिंह ने हाल ही में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन स्वर्ण पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। स्वर्ण पदक जीतकर गांव लौटने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उसका स्वागत किया।
यह चैंपियनशिप कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज करनाल में आयोजित की गई थी, जिसमें 27 देशों के करीब 200 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। ओपन वरिष्ठ वर्ग में जसप्रीत सिंह ने डेडलिफ्ट में 340 किलोग्राम, स्क्वाट में 320 किलोग्राम और बेंच प्रेस में 190 किलोग्राम भार उठाकर तीनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
जसप्रीत के पिता किसान हैं। उन्होंने बताया कि बेटे को यहां तक पहुंचाने के लिए उन्होंने अपनी सीमित आय से खर्च उठाया है, लेकिन अब आगे का रास्ता मुश्किल नजर आ रहा है। जसप्रीत का सपना डब्लूडब्लूई तक पहुंचकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराना है, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उसके सपने में बाधा बन रही है।
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परिजनों का कहना है कि यदि सरकार से समय रहते सहयोग मिला तो जसप्रीत निश्चित रूप से डब्लूडब्लूई तक पहुंचकर देश के लिए पदक जीत सकता है। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार से जसप्रीत की प्रतिभा को देखते हुए वित्तीय सहायता देने की मांग की है, ताकि एक होनहार खिलाड़ी का सपना अधूरा न रह जाए।
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सरस्वतीनगर। ब्लॉक के गांव ऊंचा चंदना निवासी जसप्रीत सिंह ने हाल ही में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन स्वर्ण पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। स्वर्ण पदक जीतकर गांव लौटने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उसका स्वागत किया।
यह चैंपियनशिप कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज करनाल में आयोजित की गई थी, जिसमें 27 देशों के करीब 200 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। ओपन वरिष्ठ वर्ग में जसप्रीत सिंह ने डेडलिफ्ट में 340 किलोग्राम, स्क्वाट में 320 किलोग्राम और बेंच प्रेस में 190 किलोग्राम भार उठाकर तीनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
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जसप्रीत के पिता किसान हैं। उन्होंने बताया कि बेटे को यहां तक पहुंचाने के लिए उन्होंने अपनी सीमित आय से खर्च उठाया है, लेकिन अब आगे का रास्ता मुश्किल नजर आ रहा है। जसप्रीत का सपना डब्लूडब्लूई तक पहुंचकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराना है, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उसके सपने में बाधा बन रही है।
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परिजनों का कहना है कि यदि सरकार से समय रहते सहयोग मिला तो जसप्रीत निश्चित रूप से डब्लूडब्लूई तक पहुंचकर देश के लिए पदक जीत सकता है। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार से जसप्रीत की प्रतिभा को देखते हुए वित्तीय सहायता देने की मांग की है, ताकि एक होनहार खिलाड़ी का सपना अधूरा न रह जाए।