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Yamuna Nagar News: धान की उठान और भुगतान की रफ्तार सुस्त
Tue, 15 Oct 2024 04:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 15 Oct 2024 04:28 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। अनाज मंडियों में धान की आवक दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद मंडियों से धान का उठान सुस्त गति से चल रहा है। धान का उठान और किसानों की पेमेंट दोनों की रफ्तार कम है। जिससे किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उठान न होने से मंडियों में धान सुखाने के लिए जगह नहीं मिल रही, वहीं पेमेंट न होने से उन्हें यहां वहां सिफारिशें लगानी पड़ रही हैं।
अनाज मंडियां धान की बोरियों से अटी पड़ी हैं। जहां भी नजर जाती है मंडियों में वहां बोरियाें के ढेर ही नजर आ रहे हैं। वहीं खरीद एजेंसियों ने किसानों को अभी तक 54.51 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। इनमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 26.47 करोड़, हैफेड ने 17.19 करोड़ व हरियाणा वेयरहाउस कॉर्पोरेशन ने 10.85 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
किसानों का 250 करोड़ रुपये से ज्यादा है। भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संजू गुंदियाना का कहना है कि किसान सालभर अपनी फसल को खेत में तैयार करता है। उसे इस बात का इंतजार होता है कि कब वह मंडी में फसल को बेचे और उसके हाथ में दो पैसे आएं ताकि जो कर्ज लिया है उसे उतार सके। इसके अलावा परिवार के अन्य कार्य भी होते हैं जो केवल पैसे से ही हो सकते हैं।
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वहीं 72 घंटे में किसानों को पेमेंट करने के सरकार के दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। जिन किसानों ने शुरूआत में अपनी धान मंडी में बेची थी अभी तक उन्हें भी पूरी पेमेंट नहीं हो पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझ कर मंडियों में धान की खरीद कम दिखाई जा रही है ताकि उठान पर अंगुली न उठाई जा सके। नमी ज्यादा बताकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। किसानों को धान की रखवाली करनी पड़ रही है।
उठान का काम तेजी से हो रहा : डीएफएससी
डीएफएससी जीतेश गोयल का कहना है कि अनाज मंडियों में धान उठान का कार्य तेजी से किया जा रहा है। लगभग सभी राइस मिलर्स के ट्रक मंडियों में लगे हुए हैं। 24 घंटे मंडियों में उठान किया जा रहा है। उम्मीद है जल्द ही सारा धान उठा लिया जाएगा।
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यमुनानगर। अनाज मंडियों में धान की आवक दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद मंडियों से धान का उठान सुस्त गति से चल रहा है। धान का उठान और किसानों की पेमेंट दोनों की रफ्तार कम है। जिससे किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उठान न होने से मंडियों में धान सुखाने के लिए जगह नहीं मिल रही, वहीं पेमेंट न होने से उन्हें यहां वहां सिफारिशें लगानी पड़ रही हैं।
अनाज मंडियां धान की बोरियों से अटी पड़ी हैं। जहां भी नजर जाती है मंडियों में वहां बोरियाें के ढेर ही नजर आ रहे हैं। वहीं खरीद एजेंसियों ने किसानों को अभी तक 54.51 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। इनमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 26.47 करोड़, हैफेड ने 17.19 करोड़ व हरियाणा वेयरहाउस कॉर्पोरेशन ने 10.85 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
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किसानों का 250 करोड़ रुपये से ज्यादा है। भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संजू गुंदियाना का कहना है कि किसान सालभर अपनी फसल को खेत में तैयार करता है। उसे इस बात का इंतजार होता है कि कब वह मंडी में फसल को बेचे और उसके हाथ में दो पैसे आएं ताकि जो कर्ज लिया है उसे उतार सके। इसके अलावा परिवार के अन्य कार्य भी होते हैं जो केवल पैसे से ही हो सकते हैं।
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वहीं 72 घंटे में किसानों को पेमेंट करने के सरकार के दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। जिन किसानों ने शुरूआत में अपनी धान मंडी में बेची थी अभी तक उन्हें भी पूरी पेमेंट नहीं हो पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझ कर मंडियों में धान की खरीद कम दिखाई जा रही है ताकि उठान पर अंगुली न उठाई जा सके। नमी ज्यादा बताकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। किसानों को धान की रखवाली करनी पड़ रही है।
उठान का काम तेजी से हो रहा : डीएफएससी
डीएफएससी जीतेश गोयल का कहना है कि अनाज मंडियों में धान उठान का कार्य तेजी से किया जा रहा है। लगभग सभी राइस मिलर्स के ट्रक मंडियों में लगे हुए हैं। 24 घंटे मंडियों में उठान किया जा रहा है। उम्मीद है जल्द ही सारा धान उठा लिया जाएगा।