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Yamuna Nagar News: आत्म साक्षात्कार का दिया संदेश
Wed, 11 Feb 2026 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 11 Feb 2026 01:00 AM IST
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अंसल टाउन में आयोजित भजन संध्या में उपस्थित शहरवासी। प्रवक्ता
- फोटो : 1
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हुडा सेक्टर-20 स्थित अंसल टाउन में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में नगरवासी शामिल हुए और भजन, आरती में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ आत्मचिंतन का संदेश दिया गया।
साध्वी दिविशा भारती व अन्य ने भजनों के साथ-साथ कई बहुमूल्य आध्यात्मिक सूत्रों को भी सरल शब्दों में उजागर किया। साध्वी दिविशा ने भजन का वास्तविक अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि जो मन के विकारों और जीवन के दुखों का सहज ही भंजन कर दे, वही वास्तविक भजन है। भजन संध्या हमारे जीवन के उन क्षणों को प्रभु स्मरण में समर्पित करने का सुंदर माध्यम है, लेकिन आज के समय में भजन, पूजा-पाठ को केवल नाच-गाने और मनोरंजन तक सीमित कर देना एक बड़ी विडंबना है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे देखने में बांस और गन्ना एक जैसे लगते हैं, लेकिन एक मीठे रस से भरा होता है और दूसरा शुष्क व कठोर, उसी प्रकार आज समाज में लोग भजन तो कर रहे हैं, लेकिन यह विचार नहीं करते कि क्या उस भजन से उनके दुखों का भंजन हो रहा है या नहीं। कथा, सेमिनार, माता की चौकी, सत्संग और भजन न के आयोजन का उद्देश्य आध्यात्मिक जागृति के माध्यम से सामाजिक क्रांति लाना है।
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यमुनानगर। हुडा सेक्टर-20 स्थित अंसल टाउन में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में नगरवासी शामिल हुए और भजन, आरती में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ आत्मचिंतन का संदेश दिया गया।
साध्वी दिविशा भारती व अन्य ने भजनों के साथ-साथ कई बहुमूल्य आध्यात्मिक सूत्रों को भी सरल शब्दों में उजागर किया। साध्वी दिविशा ने भजन का वास्तविक अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि जो मन के विकारों और जीवन के दुखों का सहज ही भंजन कर दे, वही वास्तविक भजन है। भजन संध्या हमारे जीवन के उन क्षणों को प्रभु स्मरण में समर्पित करने का सुंदर माध्यम है, लेकिन आज के समय में भजन, पूजा-पाठ को केवल नाच-गाने और मनोरंजन तक सीमित कर देना एक बड़ी विडंबना है।
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उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे देखने में बांस और गन्ना एक जैसे लगते हैं, लेकिन एक मीठे रस से भरा होता है और दूसरा शुष्क व कठोर, उसी प्रकार आज समाज में लोग भजन तो कर रहे हैं, लेकिन यह विचार नहीं करते कि क्या उस भजन से उनके दुखों का भंजन हो रहा है या नहीं। कथा, सेमिनार, माता की चौकी, सत्संग और भजन न के आयोजन का उद्देश्य आध्यात्मिक जागृति के माध्यम से सामाजिक क्रांति लाना है।
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