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Yamuna Nagar News: दान की थी जमीन, विभाग ने नहीं कराई रजिस्ट्री
Mon, 03 Feb 2025 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 03 Feb 2025 12:26 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से करीब 50 साल पहले की गई एक छोटी सी गलती आज भारी पड़ रही है। रादौर में अस्पताल निर्माण के लिए दान में मिली जमीन को विभाग ने अपने नाम नहीं कराया। इससे रादौर में 50 बेड के अस्पताल का निर्माण अधर में लटक गया है।
अब जमीन के दावे को लेकर मामला अदालत तक पहुंच चुका है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अब उन्हें कोस रहे हैं जो उस वक्त कार्यरत थे। रादौर में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल सरकार के समय में सीएचसी का उद्घाटन हुआ था। हालांकि क्षेत्र में लोगों का कहना है कि इससे कई साल पहले से ही दो कमरों में अस्पताल चल रहा था।
तब सीएचसी निर्माण के लिए कुछ जमीन ग्राम पंचायत ने दी थी। बताया जा रहा है कि जमीन का कुछ हिस्सा गांव के ही एक व्यक्ति ने अस्पताल के लिए दिया था जिस पर अब उनके स्वजन अपना अधिकार बता रहे हैं। कुल दो एकड़ में से आधा एकड़ जमीन का मामला अदालत में चला गया है। जमीन पर अपना दावा करने वाले लोगों ने लोकल कमिश्नर से जमीन की निशानदेही करवाई है। निशानदेही में जमीन दावेदारों की निकली। वहीं राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में जमीन आज भी दावेदारों के नाम पर ही दर्ज है।
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यमुनानगर। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से करीब 50 साल पहले की गई एक छोटी सी गलती आज भारी पड़ रही है। रादौर में अस्पताल निर्माण के लिए दान में मिली जमीन को विभाग ने अपने नाम नहीं कराया। इससे रादौर में 50 बेड के अस्पताल का निर्माण अधर में लटक गया है।
अब जमीन के दावे को लेकर मामला अदालत तक पहुंच चुका है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अब उन्हें कोस रहे हैं जो उस वक्त कार्यरत थे। रादौर में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल सरकार के समय में सीएचसी का उद्घाटन हुआ था। हालांकि क्षेत्र में लोगों का कहना है कि इससे कई साल पहले से ही दो कमरों में अस्पताल चल रहा था।
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तब सीएचसी निर्माण के लिए कुछ जमीन ग्राम पंचायत ने दी थी। बताया जा रहा है कि जमीन का कुछ हिस्सा गांव के ही एक व्यक्ति ने अस्पताल के लिए दिया था जिस पर अब उनके स्वजन अपना अधिकार बता रहे हैं। कुल दो एकड़ में से आधा एकड़ जमीन का मामला अदालत में चला गया है। जमीन पर अपना दावा करने वाले लोगों ने लोकल कमिश्नर से जमीन की निशानदेही करवाई है। निशानदेही में जमीन दावेदारों की निकली। वहीं राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में जमीन आज भी दावेदारों के नाम पर ही दर्ज है।
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