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बच्चों को एनीमिया मुक्त करने का उठाया बीड़ा
यमुनानगर
Updated Tue, 18 Feb 2014 12:07 AM IST
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बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग
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ही नहीं कई विभाग काम करेंगे। इसके लिए राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य
कार्यक्रम चलाया गया है।
इसमें बच्चों की उम्र के हिसाब से जरूरतों को समझा जाएगा और उन्हें एक काबिल इंसान बनाने के लिए काम किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत 2015 तक प्रदेश को एनीमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग के इस कार्यक्रम का शुभारंभ डीसी मंदीप सिंह बराड़ ने किया।
इसमें स्वास्थ्य विभाग, खेल विभाग, डीडीपीओ, बाल कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग और अन्य कई विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि इसे सफल बनाने के लिए बच्चों के साथ-साथ अध्यापकों एवं अभिभावकों के सक्रिय सहयोग जरूरी है।
एनीमिया से न केवल बच्चे शारीरिक रूप से अस्वस्थ रहते हैं, बल्कि वे मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण शिक्षा, खेलों व अन्य गतिविधियों में भी सफल नहीं हो पाते। उन्होंने बताया कि ‘राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम’ का उद्देश्य प्रदेश में 10 से 19 वर्ष की आयु के किशोरों की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार लाना और उनके शारीरिक विकास से संबंधित जरूरतों को पूरा करना है, जिनमें किशोरों की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करना, पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना, उनका बौद्धिक विकास, घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा से रोकथाम, नशावृत्ति से रोकथाम तथा गैर संचारी रोगों एवं एनीमिया से रोकथाम शामिल है।
बच्चों पर वातावरण का पड़ता है प्रभाव
डीसी ने बताया कि बच्चों के जीवन में उनके परिवार, विद्यालय, सहयोगियों और आसपास के वातावरण का बहुत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि मां-बाप को युवा अवस्था न केवल बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए बल्कि उनकी समस्याओं को समझकर उन्हें दूर करने और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इसके साथ-साथ अध्यापकों का भी यह नैतिक जिम्मेदारी है कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ यौन संबंधी समस्याओं को बताने व समझाने में अपना योगदान दें। इसी प्रकार युवा अवस्था में बच्चों के सहयोगियों के आचरण से भी उनका जीवन प्रभावित होता है। उन्होंने युवाआें से अनुरोध किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ नियमित रूप से खेलों में भाग लें और धूम्रपान, शराब व अन्य नशों से परहेज करें तथा कोई भी समस्या होने पर बिना संकोच के उसका निदान करने के लिए अभिभावकों से मशविरा करें।
खोले गए किशोर मित्रता क्लीनिक
मंदीप सिंह ने बताया कि इस जिले में किशोरावस्था प्रजनन एवं यौन स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘अर्श’ के तहत सभी जिलों के सामान्य अस्पतालों पर ‘किशोर मित्रता क्लीनिक’ खोले गए हैं। जहां युवा लड़के व लड़कियों को यौन एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के साथ उचित चिकित्सीय परामर्श एवं इलाज की सुविधा दी जाती है। युवा अवस्था में शरीर में कई बदलाव आते हैं और युवाओं को इनके बारे में उचित जानकारी प्राप्त करना अति आवश्यक है।
युवाओं का किया जाएगा चयन
सिविल सर्जन डॉ. एमआर पासी ने बताया कि कार्यक्रम के तहत एक हजार की जनसंख्या वाले हर गांव से 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के दो लड़के व दो लड़कियां का चयन पियर एजुकेटर के रूप में किया जाएगा और उन्हें चिकित्सकों की ओर से किशोर स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पियर एजुकेटर गांव में किशोरों को उनकी स्वास्थ्य समस्याओं एवं जरूरतों के प्रति जागरूक करेंगे।
बदलेगा जीवन
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय दहिया का कहना है कि इस तरह का कार्यक्रम बदलते समय की जरूरत है। बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति तो ध्यान देना बहुत जरूरी है। सरकार का यह कदम इस दिशा में काफी सराहनीय है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य में काफी सुधार आएगा। इस मौके पर इस अवसर पर नगराधीश नवीन आहुजा, डीडीपीओ जगराम मान, उप सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार, उप सिविल सर्जन प्रतिरक्षण डा. सुमिंद्र कौर, डॉ. बुलबुल कटारिया, जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. परमजीत शर्मा, पीओ आईसीडीएस राजबाला कटारिया, खेल विभाग से शिव सिंह राणा, बॉक्सिंग कोच धर्मेंद्र मेहता मौजूद रहे।
इसमें बच्चों की उम्र के हिसाब से जरूरतों को समझा जाएगा और उन्हें एक काबिल इंसान बनाने के लिए काम किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत 2015 तक प्रदेश को एनीमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग के इस कार्यक्रम का शुभारंभ डीसी मंदीप सिंह बराड़ ने किया।
इसमें स्वास्थ्य विभाग, खेल विभाग, डीडीपीओ, बाल कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग और अन्य कई विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि इसे सफल बनाने के लिए बच्चों के साथ-साथ अध्यापकों एवं अभिभावकों के सक्रिय सहयोग जरूरी है।
एनीमिया से न केवल बच्चे शारीरिक रूप से अस्वस्थ रहते हैं, बल्कि वे मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण शिक्षा, खेलों व अन्य गतिविधियों में भी सफल नहीं हो पाते। उन्होंने बताया कि ‘राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम’ का उद्देश्य प्रदेश में 10 से 19 वर्ष की आयु के किशोरों की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार लाना और उनके शारीरिक विकास से संबंधित जरूरतों को पूरा करना है, जिनमें किशोरों की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करना, पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना, उनका बौद्धिक विकास, घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा से रोकथाम, नशावृत्ति से रोकथाम तथा गैर संचारी रोगों एवं एनीमिया से रोकथाम शामिल है।
बच्चों पर वातावरण का पड़ता है प्रभाव
डीसी ने बताया कि बच्चों के जीवन में उनके परिवार, विद्यालय, सहयोगियों और आसपास के वातावरण का बहुत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि मां-बाप को युवा अवस्था न केवल बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए बल्कि उनकी समस्याओं को समझकर उन्हें दूर करने और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इसके साथ-साथ अध्यापकों का भी यह नैतिक जिम्मेदारी है कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ यौन संबंधी समस्याओं को बताने व समझाने में अपना योगदान दें। इसी प्रकार युवा अवस्था में बच्चों के सहयोगियों के आचरण से भी उनका जीवन प्रभावित होता है। उन्होंने युवाआें से अनुरोध किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ नियमित रूप से खेलों में भाग लें और धूम्रपान, शराब व अन्य नशों से परहेज करें तथा कोई भी समस्या होने पर बिना संकोच के उसका निदान करने के लिए अभिभावकों से मशविरा करें।
खोले गए किशोर मित्रता क्लीनिक
मंदीप सिंह ने बताया कि इस जिले में किशोरावस्था प्रजनन एवं यौन स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘अर्श’ के तहत सभी जिलों के सामान्य अस्पतालों पर ‘किशोर मित्रता क्लीनिक’ खोले गए हैं। जहां युवा लड़के व लड़कियों को यौन एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के साथ उचित चिकित्सीय परामर्श एवं इलाज की सुविधा दी जाती है। युवा अवस्था में शरीर में कई बदलाव आते हैं और युवाओं को इनके बारे में उचित जानकारी प्राप्त करना अति आवश्यक है।
युवाओं का किया जाएगा चयन
सिविल सर्जन डॉ. एमआर पासी ने बताया कि कार्यक्रम के तहत एक हजार की जनसंख्या वाले हर गांव से 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के दो लड़के व दो लड़कियां का चयन पियर एजुकेटर के रूप में किया जाएगा और उन्हें चिकित्सकों की ओर से किशोर स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पियर एजुकेटर गांव में किशोरों को उनकी स्वास्थ्य समस्याओं एवं जरूरतों के प्रति जागरूक करेंगे।
बदलेगा जीवन
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय दहिया का कहना है कि इस तरह का कार्यक्रम बदलते समय की जरूरत है। बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति तो ध्यान देना बहुत जरूरी है। सरकार का यह कदम इस दिशा में काफी सराहनीय है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य में काफी सुधार आएगा। इस मौके पर इस अवसर पर नगराधीश नवीन आहुजा, डीडीपीओ जगराम मान, उप सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार, उप सिविल सर्जन प्रतिरक्षण डा. सुमिंद्र कौर, डॉ. बुलबुल कटारिया, जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. परमजीत शर्मा, पीओ आईसीडीएस राजबाला कटारिया, खेल विभाग से शिव सिंह राणा, बॉक्सिंग कोच धर्मेंद्र मेहता मौजूद रहे।