फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   The importance of karma told to the devotees, Yamunanagar

श्रद्धालुओं को बताया कर्म का महत्व

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Dec 2021 12:45 AM IST
विज्ञापन
The importance of karma told to the devotees, Yamunanagar
साप्ताहिक सत्संग के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग करवाया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी पूजा भारती ने श्रद्धालुओं को कर्म का महत्व बताया।
साध्वी पूजा भारती ने कहा कि जब एक जीव संसार में मानव शरीर लेकर पैदा होता है, तो उसे कर्म सिद्धांत के चक्र को परिवर्तित करने का मौका मिलता है। 84 लाख में से केवल मनुष्य को छोड़कर अन्य सभी भोग योनि हैं। केवल मनुष्य ही कर्म योनि है, मानव जीवन कर्म आधारित है। अन्य योनियों में जीव अपना आत्म कल्याण नहीं कर सकता है। वह अपने बाध्य कर्म करने के लिए ही जीवन का निर्वाह करता है। किंतु मानव जीवन प्राप्त करके भी प्रत्येक आत्मा अपना कल्याण नहीं कर सकती।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि बहुत कम जीवात्मा ऐसी होती हैं, जिनमें जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होने और परमात्मा को जानने की जिज्ञासा होती है। हमारे संत महापुरुष कहते हैं, प्रभु की अनुकंपा से ही हमें मानव तन में रहते हुए पूर्ण सद्गुरु की शरण में जाने का सौभाग्य प्राप्त होता है। गुरु ही हमें कर्म बंधनों के जंजाल से मुक्त होने की युक्ति बता देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

साध्वी ने बताया कि यदि एक साधक निरंतर अपने गुरु की आज्ञा का अनुसरण करते हुए जीवन यापन करता है, तो वह जल्द ही संसार सागर के सभी बंधनों से मुक्त होकर उस अविनाशी, अनंत परमात्मा में सदा के लिए विलीन हो जाता है। लेकिन जो मनुष्य इस दुर्लभ अवसर से चूक जाते हैं और अन्य पशु पक्षियों की तरह ही अपने व्यवहारिक कार्यों में जीवन बर्बाद करते हैं। ऐसी आत्मा बार बार अन्य योनियों को भोगने के लिए बाध्य होते हैं। कर्म बंधनों को काटने की बजाय वे अपने लिए नए कर्म बंधनों का निर्माण कर लेते हैं। जिनसे जन्मों तक छुटकारा असंभव हो जाता है।

उन्होंने कहा कि कर्मों से मुक्ति ही वास्तविक मुक्ति है, जो हमें केवल तभी प्राप्त हो सकती है जब हम सद्गुरु द्वारा प्राप्त ब्रह्मज्ञान की निरंतर ध्यान साधना का अभ्यास करें। गुरु के दिखाए मार्ग पर पूरी निष्ठा और श्रद्धा से चलते रहे। चूंकि केवल एक गुरु में ही वह सामर्थ्य होता है, जो हमारे भीतर उस दिव्य शक्ति को जागृत करता है, जिसके द्वारा कर्म बंधनों को छोड़ना नहीं पड़ता, वह स्वयं छूट जाते हैं। जब साधक केवल गुरु के हाथों का यंत्र बनकर मन, वचन, कर्म से किसी को आहत किए बिना कार्य करता है, तो वह गुरु कृपा से ही जन्म मरण के बंधनों से मुक्ति पा लेता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed