{"_id":"5fc541d68ebc3e9bc919b048","slug":"the-fog-did-not-see-the-way-yamuna-nagar-news-knl526316111","type":"story","status":"publish","title_hn":"धुंध से रेंगते रहे वाहन, सुबह दस बजे तक दृश्यता शून्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धुंध से रेंगते रहे वाहन, सुबह दस बजे तक दृश्यता शून्य
विज्ञापन
the fog did not see the way
- फोटो : Yamuna Nagar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्षेत्र में सीजन की पहली धुंध का आगाज हो चुका है। सोमवार सुबह जिले में धुंध ही धुंध नजर आई। चंडीगढ़-सहारनपुर हाईवे और छछरौली नेशनल हाइवे समेत अन्य सड़कों पर कोहरे के कारण वाहन रेंगते हुए नजर आए।
हालांकि पिछले साल की अपेक्षा इस बार कोहरा कुछ देरी से आया है। पिछले साल सीजन की धुंध अठारह नवंबर को ही आ गई थी। धुंध की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी हाइवे पर चल रहे वाहनों को होती है। नेशनल हाइवे पर धुंध में सफर करने के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं किए गए हैं। जिसकी वजह से हाइवे पर हादसों की संख्या में भी धुंध आते ही इजाफा हो जाता है।
जगाधरी पावंटा साहिब नेशनल हाईवे पर जगाधरी मंडी में लकड़ी लेकर जाने वाले ट्रैक्टर चालक वहीद व राजपाल का कहना है कि धुंध का सीजन शुरू हो चुका है। लक्कड़ मंडी सुबह चार बजे शुरू हो जाती है और उसी समय किसानों की लकड़ी लेकर मंडी जाना पड़ता है। धुंध का असर उसी समय सबसे ज्यादा होता है। धुंध इतनी होती है कि सामने से आने वाले वाहन तो दूर की बात है। जिस सड़क पर चलते हैं वह भी नजर नहीं आती। सबसे बड़ी समस्या टूटी हुई सड़क से आती है। धुंध की वजह से सड़क में हो रहे गड्ढे नजर नहीं आते। एकदम से गड्ढों में ट्रैक्टर का पहिया गिरने से संतुलन बिगड़ जाता है। जिससे बड़े हादसे हो जाते हैं।
विज्ञापन
क्षेत्र में लगे क्रशर जोन की वजह से खिजराबाद से जगाधरी तक नेशनल हाईवे पर वाहनों का ज्यादा दबाव रहता है। क्रशर जोन से रोजाना हजारों की संख्या में रेत बजरी से भरे वाहन निकलते हैं। इन वाहनों का नेशनल हाईवे पर ज्यादातर समय रात के दस बजे से सुबह के सात बजे तक होता है। इस समय में ही धुंध का असर ज्यादा होता है। जिसकी वजह से जगाधरी से खिजराबाद तक रेत बजरी से भरे वाहन धुंध की वजह से ज्यादा दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। करीब छह साल पहले धुंध की वजह से पानीपत निवासी चार रेत बजरी सप्लायरों की इनोवा कार पिपली माजरा के पास पेड़ से टकराकर चकनाचूर हो गई थी। जिसमें चारों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
फोटो-24
विज्ञापन
हालांकि पिछले साल की अपेक्षा इस बार कोहरा कुछ देरी से आया है। पिछले साल सीजन की धुंध अठारह नवंबर को ही आ गई थी। धुंध की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी हाइवे पर चल रहे वाहनों को होती है। नेशनल हाइवे पर धुंध में सफर करने के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं किए गए हैं। जिसकी वजह से हाइवे पर हादसों की संख्या में भी धुंध आते ही इजाफा हो जाता है।
विज्ञापन
जगाधरी पावंटा साहिब नेशनल हाईवे पर जगाधरी मंडी में लकड़ी लेकर जाने वाले ट्रैक्टर चालक वहीद व राजपाल का कहना है कि धुंध का सीजन शुरू हो चुका है। लक्कड़ मंडी सुबह चार बजे शुरू हो जाती है और उसी समय किसानों की लकड़ी लेकर मंडी जाना पड़ता है। धुंध का असर उसी समय सबसे ज्यादा होता है। धुंध इतनी होती है कि सामने से आने वाले वाहन तो दूर की बात है। जिस सड़क पर चलते हैं वह भी नजर नहीं आती। सबसे बड़ी समस्या टूटी हुई सड़क से आती है। धुंध की वजह से सड़क में हो रहे गड्ढे नजर नहीं आते। एकदम से गड्ढों में ट्रैक्टर का पहिया गिरने से संतुलन बिगड़ जाता है। जिससे बड़े हादसे हो जाते हैं।
विज्ञापन
क्षेत्र में लगे क्रशर जोन की वजह से खिजराबाद से जगाधरी तक नेशनल हाईवे पर वाहनों का ज्यादा दबाव रहता है। क्रशर जोन से रोजाना हजारों की संख्या में रेत बजरी से भरे वाहन निकलते हैं। इन वाहनों का नेशनल हाईवे पर ज्यादातर समय रात के दस बजे से सुबह के सात बजे तक होता है। इस समय में ही धुंध का असर ज्यादा होता है। जिसकी वजह से जगाधरी से खिजराबाद तक रेत बजरी से भरे वाहन धुंध की वजह से ज्यादा दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। करीब छह साल पहले धुंध की वजह से पानीपत निवासी चार रेत बजरी सप्लायरों की इनोवा कार पिपली माजरा के पास पेड़ से टकराकर चकनाचूर हो गई थी। जिसमें चारों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
फोटो-24