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Yamuna Nagar News: नहीं सूखे खेत, 50 एकड़ फसल अभी भी जलमग्न
Fri, 30 Jan 2026 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 30 Jan 2026 11:42 PM IST
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खेतों में भरा बरसात का पानी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। क्षेत्र के रायपुर-डमौली गांवों में बीते शुक्रवार को हुई बरसात के एक सप्ताह बाद भी खेतों में पानी भरा है। हालात ऐसे हैं कि 50 एकड़ से अधिक भूमि पर खड़ी गेहूं व सरसों की फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। कई खेतों में तो बरसाती सीजन के बाद लगातार बनी नमी के कारण समय पर बुआई तक नहीं हो सकी थी।
किसानों का कहना है कि खेतों के पास बहने वाली नदी इस समस्या की बड़ी वजह बन चुकी है। किसान सोहन, सुल्तान, मांगा, सुभाष और संजीव ने बताया कि करीब दो दशक पहले तक यह नदी काफी चौड़ी और गहरी हुआ करती थी। समय के साथ नदी में हर साल रेत और मिट्टी जमा होती गई, जिससे नदी उथली हो गई और आसपास के खेतों की ऊंचाई लगभग नदी के तल के बराबर पहुंच गई।
नतीजतन बारिश होते ही नदी का पानी खेतों में भर जाता है और लंबे समय तक निकासी नहीं हो पाती। खेतों में पानी भरे रहने से गन्ने की खड़ी फसल की कटाई भी नामुमकिन नजर आ रही है। किसानों को आशंका है कि अप्रैल-मई तक भी खेत सूख नहीं पाएंगे, जिससे नुकसान और बढ़ सकता है। किसानों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है।
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उनका कहना है कि नदी की नियमित सफाई कराई जाए और किनारों को पक्का किया जाए, ताकि पानी खेतों में न घुसे। कुछ किसानों ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नदी अधिग्रहण, पक्के तटबंध और ऊपर की ओर डैम निर्माण की भी मांग रखी है, ताकि बाढ़ से राहत के साथ-साथ सालभर सिंचाई की सुविधा मिल सके।
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छछरौली। क्षेत्र के रायपुर-डमौली गांवों में बीते शुक्रवार को हुई बरसात के एक सप्ताह बाद भी खेतों में पानी भरा है। हालात ऐसे हैं कि 50 एकड़ से अधिक भूमि पर खड़ी गेहूं व सरसों की फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। कई खेतों में तो बरसाती सीजन के बाद लगातार बनी नमी के कारण समय पर बुआई तक नहीं हो सकी थी।
किसानों का कहना है कि खेतों के पास बहने वाली नदी इस समस्या की बड़ी वजह बन चुकी है। किसान सोहन, सुल्तान, मांगा, सुभाष और संजीव ने बताया कि करीब दो दशक पहले तक यह नदी काफी चौड़ी और गहरी हुआ करती थी। समय के साथ नदी में हर साल रेत और मिट्टी जमा होती गई, जिससे नदी उथली हो गई और आसपास के खेतों की ऊंचाई लगभग नदी के तल के बराबर पहुंच गई।
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नतीजतन बारिश होते ही नदी का पानी खेतों में भर जाता है और लंबे समय तक निकासी नहीं हो पाती। खेतों में पानी भरे रहने से गन्ने की खड़ी फसल की कटाई भी नामुमकिन नजर आ रही है। किसानों को आशंका है कि अप्रैल-मई तक भी खेत सूख नहीं पाएंगे, जिससे नुकसान और बढ़ सकता है। किसानों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है।
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उनका कहना है कि नदी की नियमित सफाई कराई जाए और किनारों को पक्का किया जाए, ताकि पानी खेतों में न घुसे। कुछ किसानों ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नदी अधिग्रहण, पक्के तटबंध और ऊपर की ओर डैम निर्माण की भी मांग रखी है, ताकि बाढ़ से राहत के साथ-साथ सालभर सिंचाई की सुविधा मिल सके।