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Yamuna Nagar News: सियासी समीकरणों में अटका सीनियर डिप्टी व डिप्टी मेयर का चुनाव
Sun, 04 Jan 2026 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 04 Jan 2026 01:22 AM IST
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नगर निगम यमुनानगर जगाधरी कार्यालय। आर्काइव
राजेश कुमार
यमुनानगर। नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव अब तक नहीं हो सका है। यह स्थिति शहर की राजनीति में कई सवाल खड़े कर रही है।
पिछले वर्ष 24 मार्च को मेयर सुमन बहमनी के शपथ ग्रहण के साथ ही निगम का गठन पूरा हो गया था, लेकिन नेतृत्व की दूसरी पंक्ति आज भी खाली है। इसके पीछे राजनीतिक समीकरणों को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। नगर निगम में कुल 22 पार्षद हैं, जिनमें से 21 भाजपा के हैं। विपक्ष लगभग न के बराबर होने के बावजूद पार्टी अंदरूनी संतुलन साधने में उलझी है। सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के दो पदों को लेकर भाजपा के भीतर अलग-अलग खेमे सक्रिय हैं।
चर्चा है कि इन पदों को लेकर मौजूदा कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और पूर्व मंत्री कंवरपाल गुर्जर के समर्थकों के बीच संतुलन बनाना पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार सीनियर डिप्टी मेयर का पद सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पद मेयर के बाद निगम में सबसे ज्यादा प्रभावशाली होता है। इसी वजह से दोनों ही वरिष्ठ नेताओं का जोर अपने-अपने समर्थक पार्षद को इस पद पर बिठाने को लेकर है। डिप्टी मेयर का पद भी इसी राजनीतिक संतुलन का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि किसी एक गुट को अधिक प्रभाव न मिल जाए।
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इस पूरे समीकरण में विधानसभा क्षेत्रों की भूमिका भी अहम है। नगर निगम के पांच वार्ड रादौर विधानसभा क्षेत्र में आते हैं, जबकि सात वार्ड जगाधरी विधानसभा के अंतर्गत हैं। दोनों ही क्षेत्रों के नेता चाहते हैं कि निगम में उनके क्षेत्र के पार्षद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिले। इससे न केवल स्थानीय राजनीति मजबूत होगी, बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों में भी इसका असर पड़ेगा।
वहीं साढौरा विधानसभा क्षेत्र में भी निगम का कुछ क्षेत्र आता है। भाजपा यहां दो चुनाव से विधायक नहीं बना सकी है। ऐसे में यहां से किसी को प्रतिनिधित्व देकर साढौरा विधानसभा की जनता को एक संदेश देने का भी प्रयास हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि यदि जल्दबाजी में चुनाव कराया गया तो पार्टी को पार्षदों की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। जिन पार्षदों को पद नहीं मिलेगा, उनमें असंतोष पनप सकता है, जो संगठनात्मक एकजुटता के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इसी कारण पार्टी नेतृत्व किसी अंतिम फैसले से पहले हर स्तर पर संतुलन बैठाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल राजनीतिक समीकरणों के चलते निगम के ये अहम पद खाली हैं। शहरवासियों को इंतजार है कि बहुमत की सरकार कब आपसी सहमति बनाकर निगम को पूरा नेतृत्व दे पाएगी। संवाद
पार्टी हाईकमान के निर्देश का इंतजार : जिलाध्यक्ष
भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा का कहना है कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव पार्टी हाईकमान के निर्देश पर ही कराया जाएगा। जैसे ही शीर्ष नेतृत्व से हरी झंडी मिलेगी, चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। फिलहाल दोनों पदों पर चुनाव कराने की कोई जल्दबाजी नहीं है।
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यमुनानगर। नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव अब तक नहीं हो सका है। यह स्थिति शहर की राजनीति में कई सवाल खड़े कर रही है।
पिछले वर्ष 24 मार्च को मेयर सुमन बहमनी के शपथ ग्रहण के साथ ही निगम का गठन पूरा हो गया था, लेकिन नेतृत्व की दूसरी पंक्ति आज भी खाली है। इसके पीछे राजनीतिक समीकरणों को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। नगर निगम में कुल 22 पार्षद हैं, जिनमें से 21 भाजपा के हैं। विपक्ष लगभग न के बराबर होने के बावजूद पार्टी अंदरूनी संतुलन साधने में उलझी है। सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के दो पदों को लेकर भाजपा के भीतर अलग-अलग खेमे सक्रिय हैं।
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चर्चा है कि इन पदों को लेकर मौजूदा कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और पूर्व मंत्री कंवरपाल गुर्जर के समर्थकों के बीच संतुलन बनाना पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार सीनियर डिप्टी मेयर का पद सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पद मेयर के बाद निगम में सबसे ज्यादा प्रभावशाली होता है। इसी वजह से दोनों ही वरिष्ठ नेताओं का जोर अपने-अपने समर्थक पार्षद को इस पद पर बिठाने को लेकर है। डिप्टी मेयर का पद भी इसी राजनीतिक संतुलन का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि किसी एक गुट को अधिक प्रभाव न मिल जाए।
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इस पूरे समीकरण में विधानसभा क्षेत्रों की भूमिका भी अहम है। नगर निगम के पांच वार्ड रादौर विधानसभा क्षेत्र में आते हैं, जबकि सात वार्ड जगाधरी विधानसभा के अंतर्गत हैं। दोनों ही क्षेत्रों के नेता चाहते हैं कि निगम में उनके क्षेत्र के पार्षद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिले। इससे न केवल स्थानीय राजनीति मजबूत होगी, बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों में भी इसका असर पड़ेगा।
वहीं साढौरा विधानसभा क्षेत्र में भी निगम का कुछ क्षेत्र आता है। भाजपा यहां दो चुनाव से विधायक नहीं बना सकी है। ऐसे में यहां से किसी को प्रतिनिधित्व देकर साढौरा विधानसभा की जनता को एक संदेश देने का भी प्रयास हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि यदि जल्दबाजी में चुनाव कराया गया तो पार्टी को पार्षदों की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। जिन पार्षदों को पद नहीं मिलेगा, उनमें असंतोष पनप सकता है, जो संगठनात्मक एकजुटता के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इसी कारण पार्टी नेतृत्व किसी अंतिम फैसले से पहले हर स्तर पर संतुलन बैठाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल राजनीतिक समीकरणों के चलते निगम के ये अहम पद खाली हैं। शहरवासियों को इंतजार है कि बहुमत की सरकार कब आपसी सहमति बनाकर निगम को पूरा नेतृत्व दे पाएगी। संवाद
पार्टी हाईकमान के निर्देश का इंतजार : जिलाध्यक्ष
भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा का कहना है कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव पार्टी हाईकमान के निर्देश पर ही कराया जाएगा। जैसे ही शीर्ष नेतृत्व से हरी झंडी मिलेगी, चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। फिलहाल दोनों पदों पर चुनाव कराने की कोई जल्दबाजी नहीं है।