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Yamuna Nagar News: कुत्ते ने आठ मजदूरों को काटा
Sat, 07 Feb 2026 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 07 Feb 2026 01:26 AM IST
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यमुनानगर बस स्टैंड परिसर में बैठा कुत्ता। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर में बेसहारा कुत्तों का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है। जगाधरी क्षेत्र में बूड़िया रोड पर बेसहारा कुत्ते ने दो महिलाओं समेत आठ लोगों को काटकर जख्मी कर दिया। सभी एक प्लाईवुड फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर बताए जा रहे हैं। घटना के बाद आसपास के लोगों में डर का माहौल है।
सभी मजदूर फैक्टरी के बाहर खड़े होकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान अचानक एक कुत्ते ने वहां मौजूद एक मजदूर पर हमला कर दिया। अन्य मजदूर उसे बचाने के लिए आगे आए तो कुत्ते ने एक के बाद एक सभी पर झपट्टा मार दिया। कुछ ही मिनटों में रीमा, चंद्रिका, राजेश, अजय, रिंकू, अमोश, अनीश, बनवारी कुत्ते के हमले का शिकार हो गए।
सभी घायलों को उपचार के लिए ट्रामा सेंटर ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने सभी की मरहम-पट्टी की और एहतियात के तौर पर रैबीज के इंजेक्शन लगाए। डॉक्टरों के सभी मजदूरों को रैबीज के सभी इंजेक्शन लेने की सलाह दी। अनीश व बनवारी ने बताया वह हम रोज की तरह काम के बाद दोपहर में लंच टाइम में बाहर खड़े थे। अचानक कुत्ते ने हमला कर दिया। बचने का मौका तक नहीं मिला। घायल मजदूर राजेश ने बताया कि कुत्ते को भगाने की कोशिश करने पर वह और उग्र हो गया। ऐसा लगा जैसे वह पागल हो चुका हो।
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शहर में बढ़ती जा रही कुत्तों संख्या
इस घटना ने शहर में बेसहारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को फिर से उजागर कर दिया। शहर की सड़कों से लेकर कॉलोनियों की गलियों तक दिनभर कुत्तों के झुंड नजर आते हैं। कई जगह लोगों के घरों के गेट के सामने कुत्ते बैठे रहते हैं, जिससे खासकर बच्चों और बुजुर्गों में डर बना रहता है। हालत यह है कि कई सरकारी कार्यालयों में भी कुत्ते आराम से बैठे देखे जा सकते हैं। नगर निगम द्वारा बेसहारा कुत्तों को पकड़ कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण का अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इसका असर फिलहाल जमीन पर नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय निवासी अनिल कुमार का कहना है कि लगता है निगम की कार्रवाई कागजों तक ही सीमित है। जब एक दिन में आठ लोगों को कुत्ते काट लें, तो हालात की गंभीरता समझी जा सकती है। प्रशासन से मांग की है कि शहर में बेसहारा कुत्तों की समस्या पर ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
हर माह कुत्ते काटने के 700 से 800 मामले
जिला नागरिक अस्पताल में हर माह लगभग 700 से 800 लोग रैबीज का टीका लगवाने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह आंकड़ा केवल सरकारी अस्पताल का है। इसके अलावा निजी अस्पतालों में जाकर इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या भी ज्यादा है। नगर निगम ने कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए 7082410824 नंबर जारी किया है। कुत्ते पकड़वाने के लिए शहरवासी इस नंबर पर शिकायत कर सकते है।
अब तक 300 कुत्तों की नसबंदी
एजेंसी ने शहर में कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण का कार्य शुरू कर दिया है। चनेटी रोड पर चिन्हित जगह पर कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण किया जा रहा है। अब तक एजेंसी करीब 300 कुत्तों की नसबंदी कर चुकी है। नसबंदी के बाद इन्हें पांच से सात दिन तक निगरानी में रखा जाता है। अंबाला मार्ग पर तीन डॉग शेल्टर बनाए गए हैं, जिनमें ऐसे 250 कुत्तों को रखने की व्यवस्था है।
2015 में हुई थी 16170 कुत्तों की नसबंदी
नगर निगम ने वर्ष 2015 में कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण कराया था। तब 16170 कुत्तों की नसबंदी करवाई गई थी। इस पर 1.42 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद नसबंदी नहीं हुई। कुत्तों की संख्या में बढ़ोतरी व काटने की घटनाओं की लगातार शिकायतें मिलने पर नगर निगम सदन में कुत्तों की नसबंदी करने का प्रस्ताव पास किया था।
कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण का कार्य एजेंसी के माध्यम से करवाया जा रहा है। एजेंसी ने काम शुरू कर दिया है। करीब 300 कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है। वहीं डॉग शेल्टर होम भी ठीक तरह से काम कर रहे हैं। जल्द ही कुत्तों की संख्या में कमी आएगी। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।
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यमुनानगर। शहर में बेसहारा कुत्तों का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है। जगाधरी क्षेत्र में बूड़िया रोड पर बेसहारा कुत्ते ने दो महिलाओं समेत आठ लोगों को काटकर जख्मी कर दिया। सभी एक प्लाईवुड फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर बताए जा रहे हैं। घटना के बाद आसपास के लोगों में डर का माहौल है।
सभी मजदूर फैक्टरी के बाहर खड़े होकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान अचानक एक कुत्ते ने वहां मौजूद एक मजदूर पर हमला कर दिया। अन्य मजदूर उसे बचाने के लिए आगे आए तो कुत्ते ने एक के बाद एक सभी पर झपट्टा मार दिया। कुछ ही मिनटों में रीमा, चंद्रिका, राजेश, अजय, रिंकू, अमोश, अनीश, बनवारी कुत्ते के हमले का शिकार हो गए।
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सभी घायलों को उपचार के लिए ट्रामा सेंटर ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने सभी की मरहम-पट्टी की और एहतियात के तौर पर रैबीज के इंजेक्शन लगाए। डॉक्टरों के सभी मजदूरों को रैबीज के सभी इंजेक्शन लेने की सलाह दी। अनीश व बनवारी ने बताया वह हम रोज की तरह काम के बाद दोपहर में लंच टाइम में बाहर खड़े थे। अचानक कुत्ते ने हमला कर दिया। बचने का मौका तक नहीं मिला। घायल मजदूर राजेश ने बताया कि कुत्ते को भगाने की कोशिश करने पर वह और उग्र हो गया। ऐसा लगा जैसे वह पागल हो चुका हो।
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शहर में बढ़ती जा रही कुत्तों संख्या
इस घटना ने शहर में बेसहारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को फिर से उजागर कर दिया। शहर की सड़कों से लेकर कॉलोनियों की गलियों तक दिनभर कुत्तों के झुंड नजर आते हैं। कई जगह लोगों के घरों के गेट के सामने कुत्ते बैठे रहते हैं, जिससे खासकर बच्चों और बुजुर्गों में डर बना रहता है। हालत यह है कि कई सरकारी कार्यालयों में भी कुत्ते आराम से बैठे देखे जा सकते हैं। नगर निगम द्वारा बेसहारा कुत्तों को पकड़ कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण का अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इसका असर फिलहाल जमीन पर नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय निवासी अनिल कुमार का कहना है कि लगता है निगम की कार्रवाई कागजों तक ही सीमित है। जब एक दिन में आठ लोगों को कुत्ते काट लें, तो हालात की गंभीरता समझी जा सकती है। प्रशासन से मांग की है कि शहर में बेसहारा कुत्तों की समस्या पर ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
हर माह कुत्ते काटने के 700 से 800 मामले
जिला नागरिक अस्पताल में हर माह लगभग 700 से 800 लोग रैबीज का टीका लगवाने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह आंकड़ा केवल सरकारी अस्पताल का है। इसके अलावा निजी अस्पतालों में जाकर इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या भी ज्यादा है। नगर निगम ने कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए 7082410824 नंबर जारी किया है। कुत्ते पकड़वाने के लिए शहरवासी इस नंबर पर शिकायत कर सकते है।
अब तक 300 कुत्तों की नसबंदी
एजेंसी ने शहर में कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण का कार्य शुरू कर दिया है। चनेटी रोड पर चिन्हित जगह पर कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण किया जा रहा है। अब तक एजेंसी करीब 300 कुत्तों की नसबंदी कर चुकी है। नसबंदी के बाद इन्हें पांच से सात दिन तक निगरानी में रखा जाता है। अंबाला मार्ग पर तीन डॉग शेल्टर बनाए गए हैं, जिनमें ऐसे 250 कुत्तों को रखने की व्यवस्था है।
2015 में हुई थी 16170 कुत्तों की नसबंदी
नगर निगम ने वर्ष 2015 में कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण कराया था। तब 16170 कुत्तों की नसबंदी करवाई गई थी। इस पर 1.42 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद नसबंदी नहीं हुई। कुत्तों की संख्या में बढ़ोतरी व काटने की घटनाओं की लगातार शिकायतें मिलने पर नगर निगम सदन में कुत्तों की नसबंदी करने का प्रस्ताव पास किया था।
कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण का कार्य एजेंसी के माध्यम से करवाया जा रहा है। एजेंसी ने काम शुरू कर दिया है। करीब 300 कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है। वहीं डॉग शेल्टर होम भी ठीक तरह से काम कर रहे हैं। जल्द ही कुत्तों की संख्या में कमी आएगी। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।

यमुनानगर बस स्टैंड परिसर में बैठा कुत्ता। संवाद