फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   The definition of Ram Rajya was told to the devotees

Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को बताई रामराज्य की परिभाषा

Tue, 19 Nov 2024 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 19 Nov 2024 02:22 AM IST
विज्ञापन
The definition of Ram Rajya was told to the devotees
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

जगाधरी। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से इंदिरा मार्केट के सामने आयोजित श्रीराम कथा में साध्वी श्रेया भारती ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के शासन का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीराम मार्गदर्शन में अयोध्या का राज्य सभी प्रकार से उन्नत था।
उन्होंने कहा कि क्या यही रामराज्य की वास्तविक परिभाषा है तो इसका जवाब है नहीं। अगर यही रामराज्य की सही परिभाषा है तो लंका भी तो भौतिक सम्पन्नता, समृद्धि, ऐश्वर्य, सुव्यवस्थित सेना में अग्रणी थी, परंतु फिर भी उसे राम राज्य के समतुल्य नहीं कहा जाता क्योंकि लंकावासी मानसिक स्तर पर पूर्णता अविकसित थे।
विज्ञापन

उनके भीतर आसुरी प्रवृत्तियों का बोलबाला था। वहां की वायु तक में भी अनीति, अनाचार और पाप की दुर्गंध थी, जहां चारों और भ्रष्टाचार और चरित्रहीनता का ही साम्राज्य फैला हुआ था। भारती ने बताया कि राम के राज्य की बात सुनते ही अकसर मन में विचार आते हैं, कि रामराज्य आज भी होना चाहिये। वर्तमान समय में भी यदि हम ऐसे ही अलौकिक राम राज्य की स्थापना करना चाहतें हैं, तो सर्व प्रथम प्रभु राम को जानना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रभु श्रीराम का प्राक्ट्य अपने भीतर करवाना होगा परंतु हम अपनी संकीर्ण बुद्धि एवं लौकिक इंद्रियों से त्रेता के इस युग-प्रणेता को नहीं जान सकते। वे केवल अयोध्या के ही आदर्श संचालक नहीं थे, अपितु संपूर्ण सृष्टि के नियामक तत्व हैं। ऐसे ब्रह्म स्वरूप श्रीराम जी को केवल ब्रह्म ज्ञान के द्वारा ही जाना जा सकता है।

श्री राम हमारे हृदय में निवास करते हैं और उनका दर्शन केवल दिव्य नेत्र द्वारा होता है। जिसके बारे में हमारे सभी धार्मिक शास्त्रों में बताया गया है। जब तक हमें एक पूर्ण सद्गुरु से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति नहीं होती, तब तक हम ईश्वर का साक्षात्कार नहीं कर सकते। सद्गुरु दीक्षा देते समय इस दिव्य नेत्र को खोल देते है, जिसके खुलते ही जिज्ञासु अपने भीतर ईश्वर के वास्तविक रूप का प्रत्यक्ष दर्शन करता है। जब हृदय के सिंहासन पर राम विराजमान होते हैं, तब रामराज्य की स्थापना होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed