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Yamuna Nagar News: फैंसी स्ट्रीट लाइटों की रोशनी पर लापरवाही का अंधेरा
Wed, 10 Jun 2026 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 10 Jun 2026 01:17 AM IST
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शहर में लगी फैंसी लाइटें। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर को खूबसूरत और आकर्षक बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर लगाई गई फैंसी स्ट्रीट लाइटें नगर निगम और लोक निर्माण विभाग की खींचतान का शिकार हैं। इन लाइटों के बिजली कनेक्शन नगर निगम के नाम हैं और हर महीने बिजली का बिल भी निगम ही भर रहा है। जब इनके रखरखाव और मरम्मत की बात आती है तो कोई भी विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
नतीजतन शहर की प्रमुख सड़कों पर लगी बड़ी संख्या में फैंसी लाइटें बंद पड़ी हैं और रात के समय उनकी चमक अब फीकी पड़ चुकी है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि ये लाइटें मूल रूप से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की हैं। अभी नगर निगम को हैंडओवर नहीं हुई हैं। इसलिए उनकी मरम्मत करवाने की जिम्मेदारी भी उसी विभाग की बनती है। दूसरी ओर पीडब्ल्यूडी का इलेक्ट्रॉनिक विंग भी इन्हें ठीक कराने में रुचि नहीं दिखा रहा। दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि इन फैंसी लाइटों के बिजली कनेक्शन नगर निगम ने अपने नाम पर ले रखे हैं। हर माह आने वाला बिजली बिल भी निगम की ओर से भरा जा रहा है। इसके बावजूद जब लाइटें खराब होती हैं तो निगम उन्हें ठीक कराने से इंकार कर देता है। पीडब्ल्यूडी की ओर से इन फैंसी लाइटों की आखिरी बार व्यापक स्तर पर मरम्मत 14 अप्रैल 2025 से पहले कराई गई थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कैल में आयोजित जनसभा में आगमन प्रस्तावित था।
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वीवीआईपी दौरे को देखते हुए शहर की सभी फैंसी लाइटों को दुरुस्त किया गया था। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर तिरंगा थीम की विशेष लाइटें भी लगाई गई थीं। पूर्व पार्षद निर्मल चौहान का कहना है कि उस दौरान एक भी लाइट खराब नहीं थी और पूरी सड़कें रोशनी से जगमगा रही थीं। अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। न तिरंगा लाइटें दिखाई देती हैं और न ही अधिकांश फैंसी लाइटों में रोशनी बची है। शहर के कई हिस्सों में आधे से अधिक लाइटें बंद पड़ी हैं। लाखों रुपये की लागत से लगाई गई इन लाइटों का लाभ अब लोगों को नहीं मिल रहा।
गारंटी में अपने पास रखी लाइटें
जब फैंसी लाइटें लगाई गई थीं तब उनकी एक वर्ष की गारंटी थी। गारंटी अवधि के दौरान खराबी आने पर संबंधित एजेंसी को इन्हें नि:शुल्क ठीक करना था। आरोप है कि पीडब्ल्यूडी के इलेक्ट्रॉनिक विंग ने लाइटों को एक वर्ष तक अपने अधीन रखा, लेकिन गारंटी अवधि समाप्त होने तक व्यापक रखरखाव नहीं कराया। अब जब बड़ी संख्या में लाइटें खराब हो चुकी हैं, तब इन्हें नगर निगम को हैंडओवर करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पीडब्ल्यूडी की से लाइटें अभी नगर निगम को हैंडओवर नहीं हुई है। लाइटें अभी पीडब्ल्यूडी के पास ही हैं। जैसे ही हमारे पास आएंगी इन्हें तुरंत ठीक करवा दिया जाएगा।
- महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।
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यमुनानगर। शहर को खूबसूरत और आकर्षक बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर लगाई गई फैंसी स्ट्रीट लाइटें नगर निगम और लोक निर्माण विभाग की खींचतान का शिकार हैं। इन लाइटों के बिजली कनेक्शन नगर निगम के नाम हैं और हर महीने बिजली का बिल भी निगम ही भर रहा है। जब इनके रखरखाव और मरम्मत की बात आती है तो कोई भी विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
नतीजतन शहर की प्रमुख सड़कों पर लगी बड़ी संख्या में फैंसी लाइटें बंद पड़ी हैं और रात के समय उनकी चमक अब फीकी पड़ चुकी है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि ये लाइटें मूल रूप से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की हैं। अभी नगर निगम को हैंडओवर नहीं हुई हैं। इसलिए उनकी मरम्मत करवाने की जिम्मेदारी भी उसी विभाग की बनती है। दूसरी ओर पीडब्ल्यूडी का इलेक्ट्रॉनिक विंग भी इन्हें ठीक कराने में रुचि नहीं दिखा रहा। दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
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दिलचस्प बात यह है कि इन फैंसी लाइटों के बिजली कनेक्शन नगर निगम ने अपने नाम पर ले रखे हैं। हर माह आने वाला बिजली बिल भी निगम की ओर से भरा जा रहा है। इसके बावजूद जब लाइटें खराब होती हैं तो निगम उन्हें ठीक कराने से इंकार कर देता है। पीडब्ल्यूडी की ओर से इन फैंसी लाइटों की आखिरी बार व्यापक स्तर पर मरम्मत 14 अप्रैल 2025 से पहले कराई गई थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कैल में आयोजित जनसभा में आगमन प्रस्तावित था।
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वीवीआईपी दौरे को देखते हुए शहर की सभी फैंसी लाइटों को दुरुस्त किया गया था। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर तिरंगा थीम की विशेष लाइटें भी लगाई गई थीं। पूर्व पार्षद निर्मल चौहान का कहना है कि उस दौरान एक भी लाइट खराब नहीं थी और पूरी सड़कें रोशनी से जगमगा रही थीं। अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। न तिरंगा लाइटें दिखाई देती हैं और न ही अधिकांश फैंसी लाइटों में रोशनी बची है। शहर के कई हिस्सों में आधे से अधिक लाइटें बंद पड़ी हैं। लाखों रुपये की लागत से लगाई गई इन लाइटों का लाभ अब लोगों को नहीं मिल रहा।
गारंटी में अपने पास रखी लाइटें
जब फैंसी लाइटें लगाई गई थीं तब उनकी एक वर्ष की गारंटी थी। गारंटी अवधि के दौरान खराबी आने पर संबंधित एजेंसी को इन्हें नि:शुल्क ठीक करना था। आरोप है कि पीडब्ल्यूडी के इलेक्ट्रॉनिक विंग ने लाइटों को एक वर्ष तक अपने अधीन रखा, लेकिन गारंटी अवधि समाप्त होने तक व्यापक रखरखाव नहीं कराया। अब जब बड़ी संख्या में लाइटें खराब हो चुकी हैं, तब इन्हें नगर निगम को हैंडओवर करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पीडब्ल्यूडी की से लाइटें अभी नगर निगम को हैंडओवर नहीं हुई है। लाइटें अभी पीडब्ल्यूडी के पास ही हैं। जैसे ही हमारे पास आएंगी इन्हें तुरंत ठीक करवा दिया जाएगा।
- महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।