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लंपी वायरस से बेसहारा गोवंशों को बचाने में गोरक्षक बने ढाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Aug 2022 01:51 AM IST
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The cow protector became a shield to save the destitute cows from the lumpi virus
The cow protector became a shield to save the destitute cows from the lumpi virus - फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। जिले में लंपी वायरस के केस बढ़ रहे हैं। इसके संदिग्ध केस 10 हजार पार हो चुके हैं। इनमें गोशालाओं, डेयरी कॉम्प्लेक्स व पशुपालकों के लंपी वायरस सेे ग्रस्त गोवंशों को तो निजी व सरकारी स्तर पर देखरेख व इलाज की सुविधा है, पर सड़कों पर भी बेसहारा गोवंश लंपी वायरस के लक्षणों से तड़प रहे हैं। इनकी सेवा में 15 दिन से गोरक्षक दिन-रात जुटे दिख रहे हैं। जो रात में जागकर सड़कों पर घूमते गोवंश पर स्प्रे करने सहित उन्हें दवा व खाना दे रहे हैं। इन युवाओं की टोली के सेवाभाव को देखकर लोग भी मदद के लिए आगे आने लगे हैं, जो घरों से रोज 500 से 700 रोटियां गोवंशों के लिए गोरक्षकों तक पहुंचा रहे हैं।
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गोसेवा में लगे दीक्षित शर्मा ने बताया कि उनकी करीब 15 युवाओं की टीम है। इसमें गुरदित्ता सिंह, आकाशदीप सिंह, जतिन, यश, मोहित चौहान, शम्भू, दीक्षित, रोहित, विवेक, अनिल पुनानी, पंकज, मनीष चौधरी शामिल हैं। यमुनानगर जगाधरी, दोनों शहरों में सड़कों पर बेसहारा गोवंश को लंपी वायरस से बचाने के लिए पिछले 15 दिन से दिन-रात सेवा में लगे हैं। इसमें दोपहर के समय पानी उबालकर व उसमें नीम की पत्तियां डालकर स्प्रे तैयार करते हैं। जिसे रात में शहर की सड़कों पर घूमते गोवंशों पर मशीनों से स्प्रे करते हैं। चाहे गोवंश में लंपी वायरस के लक्षण हो या नहीं, सभी पर यह स्प्रे करते हैं। इसके लिए दो स्प्रे मशीने हैं, जिससे एक टीम यमुनानगर से जगाधरी और दूसरी जगाधरी से यमुनानगर आते हुए स्प्रे करती है। साथ ही चिकित्सकों की सलाह पर दूसरे सैनिटाइजर भी स्प्रे कर रहे हैं और होम्योपैथिक दवा दे रहे हैं। ज्यादा बीमार गोवंश को रेस्क्यू कर गोशालाओं तक भी पहुंचा रहे हैं। इन सब पर आने वाला खर्च के लिए आपस में मिलकर राशि जुटाते हैं।
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सेवा देख घरों से रोज आने लगीं 500-700 रोटियां
दीक्षित ने बताया कि उनकी सेवा को देख काफी लोग भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं। जो उन्हें गोवंश के लिए घरों से रोटियां बनाकर दे रहे हैं। पहले घरों से 200-300 रोटियां आ रही थीं, पर सोशल मीडिया पर अपील के बाद अब रोज 500 से 700 रोटियां लोग दे रहे हैं। इन रोटियों को रात में टीम गोवंश तक पहुंचा रही है।
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