फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   The color of faith started rising, devotees started gathering

Yamuna Nagar News: चढ़ने लगा आस्था का रंग, जुटने लगे श्रद्धालु

Sun, 10 Nov 2024 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 10 Nov 2024 01:05 AM IST
विज्ञापन
The color of faith started rising, devotees started gathering
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

यमुनानगर। ऐतिहासिक तीर्थराज श्री कपालमोचन मेला इस बार 11 से 15 नवंबर तक लगेगा। वहीं अभी से ही कपालमोचन और आसपास के क्षेत्र में आस्था का रंग चढ़ने लगा है। ऐतिहासिक कपालमोचन, ऋणमोचन व सूरजकुंड सरोवरों में स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए।
प्रशासन ने भी तैयारियों को अंतिम रूप देने को पूरी ताकत झोक दी। कपालमोचन के आसपास टेंट से पूरा शहर बसाया जा रहा है। यह तीर्थ हिंदुओं और सिखों के लिए यात्रा का एक प्राचीन स्थान है। तीर्थराज कपाल मोचन मेला आस्था का प्रतीक है। यहां हरियाणा के अलावा दिल्ली, पंजाब, यूपी और हिमाचल के श्रद्धालु यहां तीनों सरोवरों में स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से मेला परिसर की रौनक भी बढ़ने लगी है।
विज्ञापन

कपालमोचन स्थिति गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की माने तो शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के कारण मेले से पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। मेले में श्रद्धालुओं के पहुंचने के लिए जगह-जगह टेंट लगाकर शेड बनाई गई है। प्रशासनिक अफसरों के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। जबकि, पुलिस के लिए मेला परिसर में ही अस्थाई पुलिस लाइन बना दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक कथा के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम जी रावण को मारने के बाद ब्रह्म हत्या दूर करने के लिए परिवार सहित आए। द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण व पांडव यहीं आए। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य का वध किया था। इसी कारण पांडवों ने यही पर स्नान कर ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति पाई। ब्राह्मण की हत्या करने के कारण बछड़े व उसकी माता को ब्रह्म हत्या का घोर पाप लगा जिससे बछड़े व गाय का रंग काला पड़ गया। गाय और बछड़े ने इसी सरोवर में स्नान किया और वह इस पाप से मुक्त हो गये। दोबारा दोनों का रंग सफेद हो गया था।
प्रथम स्नान कपाल मोचन सरोवर
स्कन्द पुराण के अनुसार कपालमोचन बहुत प्राचीन तथा ब्रह्म हत्या नाशक पुत्रधन आदि सब कामनाएं पुरी करने वाला पवित्र तीर्थ है। प्राचीन काल में पद्मकल्प में ब्रह्मा जी ने यज्ञ कराने के लिए तीन कुंड बनावाए। ब्रह्म का सिर काटने के कारण भगवान शंकर को ब्रह्म हत्या का भयंकर पाप लगा। उनके हाथ में ब्रह्म के सिर के समान चिन्ह (निशान) हो गया। सब तीर्थों में स्नान, दान आदि करने से भी वह चिन्ह (निशान) दूर न हुआ। उन्होंने उसी क्षेत्र की भद्रावती नाम के नगरी में देव शर्मा नाम के ब्राह्मण के घर उसकी गऊ के बछडे़ से सोन सरोवर की ब्रह्म हत्या दूर करने की महिमा सुनी और देव शर्मा को मारने के कारण गऊ के बछडे़ तथा गऊ को लगी ब्रह्म हत्या को इसमें स्नान से दूर होते देखा, तब भगवान शंकर ने उसका नाम कपाल मोचन रख दिया।
द्वित्तीय स्नान ऋणमोचन सरोवर
एक जन श्रुति के अनुसार इस तालाब में स्नान करने सभी प्रकार के ऋणों से मुक्त हो जाता है। यहां भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों के साथ ठहर कर यज्ञ किया और पांडवों के पूर्वजों का पिंडदान करवाया तथा पांडव पितृ ऋण से मुक्त हुए। पितृ ऋण से मुक्त होने के कारण यह सरोवर ऋण मोचन के नाम से प्रसिद्ध हुआ।


तृतीय स्नान सूरजकुंड सरोवर
पौराणिक कथा के अनुसार सिंधु वन के इस पवित्र स्थान पर माता कुंती ने सूर्य देव की तपस्या की, जिसके कारण उन्हें कर्ण नामक पुत्र की प्राप्ति हुई। सूरजकुंड सरोवर में स्नान करने से आत्मिक शांति मिलती है तथा दुखों से छुटकारा मिलता है और व्यक्त्ति के सूरजकुंड सरोवर में स्नान करने से ज्ञान में वृद्धि होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed