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Yamuna Nagar News: पौराणिक धाम पंचतीर्थी मेले का समापन, अंतिम दिन उमड़े श्रद्धालु
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यमुनानगर। ऐतिहासिक पंचतीर्थी मेले का वीरवार को समापन को गया। अंतिम दिन मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यही नहीं मेले के अंतिम दिन दंगल का भी आयोजन किया गया। जिसमें हरियाणा के अलग-अलग जिलों से आए पहलवानों ने प्रतिभाग किया। कुश्ती के दांवपेंच देखने के लिए भी दर्शक काफी संख्या में मेले में उमड़े।
पंचतीर्थी मेले का शुभारंभ 19 नवंबर को हुआ था। मंदिर के महंत राम किशोरी महाराज बताते हैं कि महाभारत समय में जब कुरुक्षेत्र में युद्ध हुआ। उसमें लाखों सैनिक का रक्त बहा। रक्तरंजित भूमि हो जाने से पांडवों को अस्त्र शस्त्र धोने के लिए कही कोई स्थान नहीं मिला। तलाश करते हुए पांडव यहां पहुंचे। उन्होंने सरोवर बनाया। इसके पानी से अपने अस्त्र-शस्त्र धोए। द्रोपदी ने अपने केश धोए थे।
जिस कारण सनातन धर्म में इस स्थान का विशेष महत्व है। इस मंदिर का नाम भी पांडवों के नाम रखा गया है। सभी की मूर्ति भी स्थापित की गई है। इसके साथ ही बनवास के दौरान भगवान श्री राम भी यहां आए थे। उन्होंने भी कुछ समय यहां व्यतीत किया था। जिससे इस धाम का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। वीरवार को मेले का समापन कर दिया गया। अंतिम दिन कमेटी की ओर से दंगल का आयोजन किया गया।
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पंचतीर्थी मेले का शुभारंभ 19 नवंबर को हुआ था। मंदिर के महंत राम किशोरी महाराज बताते हैं कि महाभारत समय में जब कुरुक्षेत्र में युद्ध हुआ। उसमें लाखों सैनिक का रक्त बहा। रक्तरंजित भूमि हो जाने से पांडवों को अस्त्र शस्त्र धोने के लिए कही कोई स्थान नहीं मिला। तलाश करते हुए पांडव यहां पहुंचे। उन्होंने सरोवर बनाया। इसके पानी से अपने अस्त्र-शस्त्र धोए। द्रोपदी ने अपने केश धोए थे।
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जिस कारण सनातन धर्म में इस स्थान का विशेष महत्व है। इस मंदिर का नाम भी पांडवों के नाम रखा गया है। सभी की मूर्ति भी स्थापित की गई है। इसके साथ ही बनवास के दौरान भगवान श्री राम भी यहां आए थे। उन्होंने भी कुछ समय यहां व्यतीत किया था। जिससे इस धाम का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। वीरवार को मेले का समापन कर दिया गया। अंतिम दिन कमेटी की ओर से दंगल का आयोजन किया गया।
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