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Yamuna Nagar News: अध्यापकों को संस्कृत भाषा के बारे में बताया
Sun, 10 Nov 2024 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 10 Nov 2024 01:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) तेजली में प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। यह प्रशिक्षण डायट प्राचार्य दुष्यंत चहल के नेतृत्व में लगाया गया। पांच दिवसीय संस्कृत प्राध्यापक प्रशिक्षण शिविर में संस्कृत भाषा के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा विश्वगुरु भारत की गरिमा है जो कि पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरौती है। कंप्यूटर प्रवक्ता नरेंद्र राणा, केमिस्ट्री प्रवक्ता अश्विनी गर्ग व इतिहास प्रवक्ता सुमन की देखरेख में नागल स्कूल से मास्टर ट्रेनर नीरज, मछरौली से सुबे सिंह और करेड़ा खुर्द से नरेश कुमार ने संस्कृत विषय के बारे बताया।
ट्रेनर सूबे सिंह ने संस्कृत गद्य पाठ योजना और पद्य पाठ योजना के बारे बताया। उन्होंने कहा कि पाठ योजना संस्कृत शिक्षण की आत्मा होती है। इस दौरान मां अभव्या ज्योतिष विचार-विमर्श कार्यालय के आचार्य राजकुमार शास्त्री ने बताया कि संस्कृत को रोजगारपरक बनाने के लिए इसे तकनीकी शिक्षा के साथ जोड़ा जाए।
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ज्योतिष शास्त्र से जुड़कर संस्कृत प्रेमी न केवल रोजगार पा सकते हैं अपितु रोजगार देने में सक्षम भी हो सकते हैं। इस दौरान में प्रशिक्षुकों को दुष्यंत चहल ने प्रमाणपत्र दिए गए। इस दौरान शादीपुर स्कूल से जंगशेर शास्त्री, सरिता नारंग, मानसिंह, हरिराम, नरेश कुमार, जसविंद्र, राजकुमारी, संगीता, कर्मवीर सिंह, रजनी देवी, नारायण स्वरूप, रेनू सैनी, ममता रानी, नीलम कुमारी आदि मौजूद रहे।
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जगाधरी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) तेजली में प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। यह प्रशिक्षण डायट प्राचार्य दुष्यंत चहल के नेतृत्व में लगाया गया। पांच दिवसीय संस्कृत प्राध्यापक प्रशिक्षण शिविर में संस्कृत भाषा के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा विश्वगुरु भारत की गरिमा है जो कि पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरौती है। कंप्यूटर प्रवक्ता नरेंद्र राणा, केमिस्ट्री प्रवक्ता अश्विनी गर्ग व इतिहास प्रवक्ता सुमन की देखरेख में नागल स्कूल से मास्टर ट्रेनर नीरज, मछरौली से सुबे सिंह और करेड़ा खुर्द से नरेश कुमार ने संस्कृत विषय के बारे बताया।
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ट्रेनर सूबे सिंह ने संस्कृत गद्य पाठ योजना और पद्य पाठ योजना के बारे बताया। उन्होंने कहा कि पाठ योजना संस्कृत शिक्षण की आत्मा होती है। इस दौरान मां अभव्या ज्योतिष विचार-विमर्श कार्यालय के आचार्य राजकुमार शास्त्री ने बताया कि संस्कृत को रोजगारपरक बनाने के लिए इसे तकनीकी शिक्षा के साथ जोड़ा जाए।
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ज्योतिष शास्त्र से जुड़कर संस्कृत प्रेमी न केवल रोजगार पा सकते हैं अपितु रोजगार देने में सक्षम भी हो सकते हैं। इस दौरान में प्रशिक्षुकों को दुष्यंत चहल ने प्रमाणपत्र दिए गए। इस दौरान शादीपुर स्कूल से जंगशेर शास्त्री, सरिता नारंग, मानसिंह, हरिराम, नरेश कुमार, जसविंद्र, राजकुमारी, संगीता, कर्मवीर सिंह, रजनी देवी, नारायण स्वरूप, रेनू सैनी, ममता रानी, नीलम कुमारी आदि मौजूद रहे।