{"_id":"61fadf45ad27d6387f31244c","slug":"teachers-were-given-training-on-child-crimes-and-protection-yamuna-nagar-news-knl977968129","type":"story","status":"publish","title_hn":"अध्यापकों को बाल अपराधों व संरक्षण का दिया प्रशिक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अध्यापकों को बाल अपराधों व संरक्षण का दिया प्रशिक्षण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यमुनानगर। चुहड़पुरकलां की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की ओर से ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें अध्यापकों को पॉक्सो व बाल अपराधों के प्रति जागरूक किया गया।
जिला बाल संरक्षण इकाई के ऑउटरिच वर्कर गौरव शर्मा ने पॉक्सो अधिनियम व किशोर न्याय अधिनियम के बारे में जानकारी दी। बताया कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त कानून बनाए गए हैं। कोई भी बच्चा किसी भी संकट में होता है तो इसकी जानकारी चाइल्ड हेल्प लाइन पर दी जा सकती है। अध्यापकों को बच्चों के अधिकारों व अपराधों के प्रति विशेष तौर पर जागरूक होना होगा। महिला एवं बाल विकास की ओर से जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। डॉ. ज्योति ने सामाजिक भावनात्मक शिक्षा और परीक्षा तनाव विषय पर विचार रखे। कहा कि विद्यार्थियों को परीक्षा के समय तनाव से बचना चाहिए, इसके लिए उन्हें विशेष रूप से तैयार करना होगा। कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर राजीव नंदा मास्टर ने सभी को बच्चों की मनोदशा समझने व परखने की जानकारी दी।
प्रिंसिपल ममता धीमान ने बताया की कोरोना के चलते कार्यशाला से 14 स्कूल के अध्यापकों को जागरूक किया गया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और बच्चों को उनके अधिकारियों के प्रति जानकारी होनी चाहिए। यदि बच्चे जागरूक होंगे तो देश जागरूक होगा। बाल अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए विद्यार्थियों को जागरूक किया जाना बेहद जरूरी है, इसके लिए सभी प्रयास करना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला बाल संरक्षण इकाई के ऑउटरिच वर्कर गौरव शर्मा ने पॉक्सो अधिनियम व किशोर न्याय अधिनियम के बारे में जानकारी दी। बताया कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त कानून बनाए गए हैं। कोई भी बच्चा किसी भी संकट में होता है तो इसकी जानकारी चाइल्ड हेल्प लाइन पर दी जा सकती है। अध्यापकों को बच्चों के अधिकारों व अपराधों के प्रति विशेष तौर पर जागरूक होना होगा। महिला एवं बाल विकास की ओर से जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। डॉ. ज्योति ने सामाजिक भावनात्मक शिक्षा और परीक्षा तनाव विषय पर विचार रखे। कहा कि विद्यार्थियों को परीक्षा के समय तनाव से बचना चाहिए, इसके लिए उन्हें विशेष रूप से तैयार करना होगा। कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर राजीव नंदा मास्टर ने सभी को बच्चों की मनोदशा समझने व परखने की जानकारी दी।
विज्ञापन
प्रिंसिपल ममता धीमान ने बताया की कोरोना के चलते कार्यशाला से 14 स्कूल के अध्यापकों को जागरूक किया गया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और बच्चों को उनके अधिकारियों के प्रति जानकारी होनी चाहिए। यदि बच्चे जागरूक होंगे तो देश जागरूक होगा। बाल अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए विद्यार्थियों को जागरूक किया जाना बेहद जरूरी है, इसके लिए सभी प्रयास करना होगा।
विज्ञापन