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Yamuna Nagar News: टीबी रोगियों की पहचान के लिए सर्वे शुरू
Wed, 11 Dec 2024 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 11 Dec 2024 01:57 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। टीबी मुक्त अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग अब घर-घर जाकर टीबी रोगियों की पहचान करेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पूरे जिले में सर्वे किया जाएगा। इतना ही नहीं टीबी के लक्षणों के अलावा अन्य रोगों का पता चलने पर उनका भी उपचार स्वास्थ्य विभाग की तरफ से निशुल्क कराया जाएगा।
टीबी के ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहचान हो सके इसके लिए एनटीईपी (नेशनल ट्यबरक्लोसिस इलीमिनेशन प्रोग्राम) एप के माध्यम से डाटा जुटाया जा रहा है। टीबी के संदिग्ध 4202 मरीजों के सैंपल लिए गए हैं। जिसमें से 3639 की रिपोर्ट आ गई। इसमें 22 मरीज टीबी के मिले हैं।
जिन लोगों को टीबी होती है उनमें तीन सप्ताह से ज्यादा खांस होना, जुकाम, बुखार, वजन कम होना, भूख न लगना पांच प्रमुख लक्षण पाए जाते हैं। सर्वे के दौरान इनमें से यदि कोई लक्षण मिलता है तो उसका मौके पर ही बलगम का सैंपल जांच के लिए लिया जाएगा। साथ ही उन मरीजों का भी डाटा जुटाया जाएगा, जिन्हें एचआईवी, हैपेटाइटिस बी व सी, ब्लड प्रेशर की शिकायत है।
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वहीं जिन लोगों के चेहरे पर दाग-धब्बे मिलते हैं या फिर वह धूम्रपान ज्यादा करते हैं तो उनके भी सैंपल लिए जाएंगे। चेहरे पर ज्यादा धब्बे होना कुष्ठ रोग भी हो सकता है। इसलिए इनका उपचार पहले सीएचओ से कराया जाएगा। यदि वहां से आराम नहीं लगता तो फिर मेडिकल ऑफिसर उनका निरीक्षण करेगा। आखिर में जिला नागरिक अस्पताल में उपचार कराया जाएगा।
टीबी उन्नमूलन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डाॅ. अनूप गाेयल ने एनटीईपी एप तैयार कराया है। अब इस एप के माध्यम से सर्वे किया जा रहा है। जिसमें 700 लोगों की टीम लगाई गई है। यह टीम घर-घर जाकर प्रति व्यक्ति से लेकर बच्चे तक बीमारी के बारे में पूछती है। टीम में एक आशा वर्कर सहित चार कर्मी हैं। एप में डाटा अपलोड किया जाता है।
मरीज का मोबाइल नंबर व आधार नंबर एप में अपलोड किया जाता है। इस एप में डाटा अपलोड होने से पूरे जिले में संबंधित बीमारी के मरीजों का पता लग जाएगा। इसके साथ ही जनसंख्या का पता लगेगा। यह भी पता रहेगा कि किस गांव में किस बीमारी के कितने मरीज हैं। कितने मरीजों की दवाई चल रही है, क्योंकि काफी मरीज ऐसे होते हैं जो संदिग्ध लक्षणों पर अस्पताल तक नहीं आते।
वर्ष 2030 तक टीबी मुक्त करना है जिला : नोडल अधिकारी
टीबी उन्मूलन अभियान के नोडल अधिकारी डाॅ. अनूप गोयल ने बताया कि एनटीईपी एप के माध्यम से संदिग्ध लोगों का डाटा जुटाया जा रहा है। जो लोग संदिग्ध मिल रहे हैं उनकी बलगम का सैंपल लेकर जांच कराई जा रही है। टीबी मिलने पर मुफ्त उपचार कराया जाता है। अब सरकार ने टीबी के मरीजों को मिलने वाली सहायता राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दी है।
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यमुनानगर। टीबी मुक्त अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग अब घर-घर जाकर टीबी रोगियों की पहचान करेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पूरे जिले में सर्वे किया जाएगा। इतना ही नहीं टीबी के लक्षणों के अलावा अन्य रोगों का पता चलने पर उनका भी उपचार स्वास्थ्य विभाग की तरफ से निशुल्क कराया जाएगा।
टीबी के ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहचान हो सके इसके लिए एनटीईपी (नेशनल ट्यबरक्लोसिस इलीमिनेशन प्रोग्राम) एप के माध्यम से डाटा जुटाया जा रहा है। टीबी के संदिग्ध 4202 मरीजों के सैंपल लिए गए हैं। जिसमें से 3639 की रिपोर्ट आ गई। इसमें 22 मरीज टीबी के मिले हैं।
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जिन लोगों को टीबी होती है उनमें तीन सप्ताह से ज्यादा खांस होना, जुकाम, बुखार, वजन कम होना, भूख न लगना पांच प्रमुख लक्षण पाए जाते हैं। सर्वे के दौरान इनमें से यदि कोई लक्षण मिलता है तो उसका मौके पर ही बलगम का सैंपल जांच के लिए लिया जाएगा। साथ ही उन मरीजों का भी डाटा जुटाया जाएगा, जिन्हें एचआईवी, हैपेटाइटिस बी व सी, ब्लड प्रेशर की शिकायत है।
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वहीं जिन लोगों के चेहरे पर दाग-धब्बे मिलते हैं या फिर वह धूम्रपान ज्यादा करते हैं तो उनके भी सैंपल लिए जाएंगे। चेहरे पर ज्यादा धब्बे होना कुष्ठ रोग भी हो सकता है। इसलिए इनका उपचार पहले सीएचओ से कराया जाएगा। यदि वहां से आराम नहीं लगता तो फिर मेडिकल ऑफिसर उनका निरीक्षण करेगा। आखिर में जिला नागरिक अस्पताल में उपचार कराया जाएगा।
टीबी उन्नमूलन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डाॅ. अनूप गाेयल ने एनटीईपी एप तैयार कराया है। अब इस एप के माध्यम से सर्वे किया जा रहा है। जिसमें 700 लोगों की टीम लगाई गई है। यह टीम घर-घर जाकर प्रति व्यक्ति से लेकर बच्चे तक बीमारी के बारे में पूछती है। टीम में एक आशा वर्कर सहित चार कर्मी हैं। एप में डाटा अपलोड किया जाता है।
मरीज का मोबाइल नंबर व आधार नंबर एप में अपलोड किया जाता है। इस एप में डाटा अपलोड होने से पूरे जिले में संबंधित बीमारी के मरीजों का पता लग जाएगा। इसके साथ ही जनसंख्या का पता लगेगा। यह भी पता रहेगा कि किस गांव में किस बीमारी के कितने मरीज हैं। कितने मरीजों की दवाई चल रही है, क्योंकि काफी मरीज ऐसे होते हैं जो संदिग्ध लक्षणों पर अस्पताल तक नहीं आते।
वर्ष 2030 तक टीबी मुक्त करना है जिला : नोडल अधिकारी
टीबी उन्मूलन अभियान के नोडल अधिकारी डाॅ. अनूप गोयल ने बताया कि एनटीईपी एप के माध्यम से संदिग्ध लोगों का डाटा जुटाया जा रहा है। जो लोग संदिग्ध मिल रहे हैं उनकी बलगम का सैंपल लेकर जांच कराई जा रही है। टीबी मिलने पर मुफ्त उपचार कराया जाता है। अब सरकार ने टीबी के मरीजों को मिलने वाली सहायता राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दी है।