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Yamuna Nagar News: सुचेता महाराजा ने श्रद्धालुओं को समझाया चातुर्मास का अर्थ
Fri, 11 Jul 2025 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 11 Jul 2025 12:30 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मॉडल टाउन स्थित एसएस जैन सभा में चल रहे प्रवचनों में सुचेता महाराज ने संगत को चातुर्मास का अर्थ विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया चातुर्मास का दूसरा अर्थ वर्षावास भी होता है। इस दौरान जैन साधु एक ही स्थान पर चार महीने व्यतीत करते हैं ताकि उनके चलने फिरने से वर्षा के कारण जो जीव जंतु जमीन से बाहर आ जाते हैं ताकि उनके प्राण की हानि न हो।
इस दौरान सुचेता महाराज ने जैन समाज को प्रतिक्रमण करने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि जैन शास्त्र के अनुसार प्रतिक्रमण करने से आने वाले पाप नष्ट होते हैं। साथ ही उन्होंने लगातार प्रवचन में आने की, अखंड पाठ में बारी देने की और तपस्या करने की प्रेरणा दी। महाराज ने उदाहरण देते हुए कहा जैसे किसान चार महीने फसल की रखवाली करता है और पूरी दुनिया 12 महीने उस फसल को खाती है।
इसी प्रकार चार महीने यदि हम अपने कर्मों की निर्जरा करने के लिए तप संयम साधना करें तो 12 महीने की हमारी जिंदगी सफल हो जाएगी। इसके पश्चात समीक्षा महाराज ने एक भजन के द्वारा माहौल को भक्तिमय कर दिया। उन्होंने फरमाया कि मेरे मन की आस मेरे गुरुवर है।
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गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने गुरु की महत्ता बताते हुए कहा कि जीवन गुरु के बिना शुरू ही नहीं होता। जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में गुरु धारण नहीं किया और उस गुरु की सच्चे मन और श्रद्धा से पूजा नहीं कि उसका जीवन व्यर्थ है। इस मौके पर जैन समाज के बंधु अच्छी खासी संख्या में हर्षोल्लास के साथ मौजूद रहे।
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यमुनानगर। मॉडल टाउन स्थित एसएस जैन सभा में चल रहे प्रवचनों में सुचेता महाराज ने संगत को चातुर्मास का अर्थ विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया चातुर्मास का दूसरा अर्थ वर्षावास भी होता है। इस दौरान जैन साधु एक ही स्थान पर चार महीने व्यतीत करते हैं ताकि उनके चलने फिरने से वर्षा के कारण जो जीव जंतु जमीन से बाहर आ जाते हैं ताकि उनके प्राण की हानि न हो।
इस दौरान सुचेता महाराज ने जैन समाज को प्रतिक्रमण करने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि जैन शास्त्र के अनुसार प्रतिक्रमण करने से आने वाले पाप नष्ट होते हैं। साथ ही उन्होंने लगातार प्रवचन में आने की, अखंड पाठ में बारी देने की और तपस्या करने की प्रेरणा दी। महाराज ने उदाहरण देते हुए कहा जैसे किसान चार महीने फसल की रखवाली करता है और पूरी दुनिया 12 महीने उस फसल को खाती है।
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इसी प्रकार चार महीने यदि हम अपने कर्मों की निर्जरा करने के लिए तप संयम साधना करें तो 12 महीने की हमारी जिंदगी सफल हो जाएगी। इसके पश्चात समीक्षा महाराज ने एक भजन के द्वारा माहौल को भक्तिमय कर दिया। उन्होंने फरमाया कि मेरे मन की आस मेरे गुरुवर है।
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गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने गुरु की महत्ता बताते हुए कहा कि जीवन गुरु के बिना शुरू ही नहीं होता। जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में गुरु धारण नहीं किया और उस गुरु की सच्चे मन और श्रद्धा से पूजा नहीं कि उसका जीवन व्यर्थ है। इस मौके पर जैन समाज के बंधु अच्छी खासी संख्या में हर्षोल्लास के साथ मौजूद रहे।