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लैब टेक्नीशियन हड़ताल पर, टेस्ट के लिए भटके मरीज
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर।
Updated Tue, 20 Sep 2016 12:30 AM IST
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यमुनानगर
- फोटो : यमुनानगर
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यमुनानगर। वेतन विसंगतियों को दूर नहीं किए जाने के विरोध में सोमवार को सभी सरकारी अस्पतालों के लैब टेक्नीशियन दो दिन की हड़ताल पर चले गए। टेक्नीशियनों के हड़ताल पर चले जाने से मरीज टेस्ट कराने के लिए भटकते नजर आए। ब्लड बैंक में ही केवल अपातकाल टेस्ट कराए गए। अधिकतर गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी बिना टेस्ट करवाए ही की गई। वहीं मरीजों को प्राइवेट लैब का सहारा लेना पड़ा। टेक्नीशियनों ने इस दौरान सीएमओ कार्यालय के नजदीक धरने पर बैठ सरकार व विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगें पूरी नहीं की गई तो वे अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर जा सकते हैं।
लैब टेक्नीशियन पवनेश कुमार, अनिल कुमार, दयावती, इंदू ने कहा कि वेतन विसंगतियों को दूर करने की यह मांग उनकी सालों पुरानी है। परंतु किसी भी सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। वर्तमान सरकार के सत्ता में आने से उन्हें कुछ उम्मीद बंधी थी कि उनकी मांगें पूरी होंगी परंतु इस सरकार ने भी उन्हें निराश किया है। उनकी किसी भी मांग को नहीं माना गया है। उनका कहना है कि वे अब तक 5200-20200 और ग्रेड पर 2800 रुपये के वेतनमान पर कार्य कर रहे हैं। जबकि केंद्र सरकार द्वारा 9300-34800 और ग्रेड पे 4200 रुपये का वेतनमान स्वीकृत किया जा चुका है। इसलिए उनकी मांग है कि उनका वेतनमान केंद्र के बराबर किया जाए। हरियाणा सरकार द्वारा लैब टेक्नीशियन (सामान्य) व लैब टेक्नीशियन (मलेरिया) का कैडर एक करने का जो निर्णय लिया गया था उसकी अधिसूचना अब तक जारी नहीं की गई है। वहीं, जो कर्मचारी कच्चे हैं उन्हें जल्द से जल्द पक्का किया जाए।
किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं हुआ कोई टेस्ट :
ट्रामा सेंटर सहित जिले में सभी सरकारी अस्पतालों में हर दिन लगभग दो हजार मरीजों का टेस्ट होते हैं। अकेले सिविल अस्पताल यमुनानगर में ही हर दिन लगभग 200 मरीजों के टेस्ट होते हैं। यहां पर दो लैब हैं। दोनों में हर प्रकार के टेस्ट किए जाते है। लेकिन सोमवार को एक भी टेस्ट नहीं हुआ। पूरे जिले में 35 से 40 लैब टेक्नीशियन हैं। जो सोमवार को हड़ताल पर रहे।
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बिना टेस्ट के हुई महिलाओं की डिलीवरी
लैब टेक्नीशियन की हड़ताल के कारण अस्पताल के डाक्टरों ने गर्भवती महिलाओं व उनके नवजात बच्चों के साथ खिलवाड़ किया। बतां दे कि गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी से पहले उनके टेस्ट किए जाते हैं। इसमें महिला में रक्त की मात्रा, शुगर, बुखार अन्य बीमारियों को चैक किया जाता है। टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही डिलीवरी की जाती है। परंतु सोमवार को अधिकतर महिलाओं की डिलीवरी बिना टेस्ट के ही कर दी गई। हालांकि कुछ महिलाओं को पहले से टेस्ट रिपोर्ट मिली हुई थी।
निजी लैबों का लिया सहारा :
सरकारी अस्पतालों में लैब टेक्रीशियन हड़ताल पर चले जाने से सिविल अस्पताल में मरीज टेस्ट के लिए भटकते नजर आए। जिन लोगों को जरूरी टेस्ट कराने थे। उन्हें निजी लैबों को सहारा लेना पड़ा। अधिकतर मरीजों को बाहर से टेस्ट कराने पड़े।
लैब टेक्नीशियनों की हड़ताल के चलते अपातकालीन टेस्ट ही अस्पताल में हुए हैं। जिन गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी हुई उनमें से कइयों की टेस्ट रिपोर्ट पहले से साथ थी। जिनकी रिपोर्ट नहीं थी उनके टेस्ट ब्लड बैंक की लैब में करवाए गए।
- डॉ. रितु चौधरी, सीएमओ, सिविल अस्पताल यमुनानगर।
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लैब टेक्नीशियन पवनेश कुमार, अनिल कुमार, दयावती, इंदू ने कहा कि वेतन विसंगतियों को दूर करने की यह मांग उनकी सालों पुरानी है। परंतु किसी भी सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। वर्तमान सरकार के सत्ता में आने से उन्हें कुछ उम्मीद बंधी थी कि उनकी मांगें पूरी होंगी परंतु इस सरकार ने भी उन्हें निराश किया है। उनकी किसी भी मांग को नहीं माना गया है। उनका कहना है कि वे अब तक 5200-20200 और ग्रेड पर 2800 रुपये के वेतनमान पर कार्य कर रहे हैं। जबकि केंद्र सरकार द्वारा 9300-34800 और ग्रेड पे 4200 रुपये का वेतनमान स्वीकृत किया जा चुका है। इसलिए उनकी मांग है कि उनका वेतनमान केंद्र के बराबर किया जाए। हरियाणा सरकार द्वारा लैब टेक्नीशियन (सामान्य) व लैब टेक्नीशियन (मलेरिया) का कैडर एक करने का जो निर्णय लिया गया था उसकी अधिसूचना अब तक जारी नहीं की गई है। वहीं, जो कर्मचारी कच्चे हैं उन्हें जल्द से जल्द पक्का किया जाए।
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किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं हुआ कोई टेस्ट :
ट्रामा सेंटर सहित जिले में सभी सरकारी अस्पतालों में हर दिन लगभग दो हजार मरीजों का टेस्ट होते हैं। अकेले सिविल अस्पताल यमुनानगर में ही हर दिन लगभग 200 मरीजों के टेस्ट होते हैं। यहां पर दो लैब हैं। दोनों में हर प्रकार के टेस्ट किए जाते है। लेकिन सोमवार को एक भी टेस्ट नहीं हुआ। पूरे जिले में 35 से 40 लैब टेक्नीशियन हैं। जो सोमवार को हड़ताल पर रहे।
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बिना टेस्ट के हुई महिलाओं की डिलीवरी
लैब टेक्नीशियन की हड़ताल के कारण अस्पताल के डाक्टरों ने गर्भवती महिलाओं व उनके नवजात बच्चों के साथ खिलवाड़ किया। बतां दे कि गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी से पहले उनके टेस्ट किए जाते हैं। इसमें महिला में रक्त की मात्रा, शुगर, बुखार अन्य बीमारियों को चैक किया जाता है। टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही डिलीवरी की जाती है। परंतु सोमवार को अधिकतर महिलाओं की डिलीवरी बिना टेस्ट के ही कर दी गई। हालांकि कुछ महिलाओं को पहले से टेस्ट रिपोर्ट मिली हुई थी।
निजी लैबों का लिया सहारा :
सरकारी अस्पतालों में लैब टेक्रीशियन हड़ताल पर चले जाने से सिविल अस्पताल में मरीज टेस्ट के लिए भटकते नजर आए। जिन लोगों को जरूरी टेस्ट कराने थे। उन्हें निजी लैबों को सहारा लेना पड़ा। अधिकतर मरीजों को बाहर से टेस्ट कराने पड़े।
लैब टेक्नीशियनों की हड़ताल के चलते अपातकालीन टेस्ट ही अस्पताल में हुए हैं। जिन गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी हुई उनमें से कइयों की टेस्ट रिपोर्ट पहले से साथ थी। जिनकी रिपोर्ट नहीं थी उनके टेस्ट ब्लड बैंक की लैब में करवाए गए।
- डॉ. रितु चौधरी, सीएमओ, सिविल अस्पताल यमुनानगर।