फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Story of British rule: British used to beat with whips for opposing atrocities

अंग्रेजी हुकूमत की कहानी : अत्याचार का विरोध करने पर अंग्रेज कोड़ों से करते थे पिटाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 02:33 AM IST
विज्ञापन
Story of British rule: British used to beat with whips for opposing atrocities
जठलाना। उन दिनों अंग्रेजी हुकूमत का राज हुआ करता था। तब मैं भी काफी छोटी थी। अंग्रेज जब घोड़े पर सैनिकों के साथ निकलते थे तब महिलाएं व लड़कियां उन्हें देखकर घबरा जाती और घरों में छिप जाती थी। कई बार अंग्रेज सुंदर महिला को उठाकर अपने साथ ले जाते थे और काफी अत्याचार करते थे और जब पुरुष इसका विरोध करते थे तब उन्हें कोड़ों से पीटा जाता था। वे तब तक पीटते रहते जब तक व्यक्ति के शरीर से खून न बहने लगे। अंग्रेजी हुकूमत के जुल्मों की यह दर्दनाक कहानी जठलाना के गांव पालेवाला की लगभग 100 वर्षीय बुजुर्ग शांति देवी की जुबानी है। जिसे सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। शांति देवी ने अंग्रेजी हुकूमत के दौरान की यह संघर्ष की कहानी अमर उजाला को बताई। जिसके अंश कुछ इस प्रकार हैं।
विज्ञापन

शादी और अन्य पर्व पर समारोह करने की नहीं थी इजाजत
भले ही अब बुजुर्ग शांति देवी लगभग 100 साल की हो चुकी हैं लेकिन उस दौरान अंग्रेजों ने भारतीयों पर क्या-क्या जुल्म किए उन्हें अपनी आंखों से देखा सब कुछ अभी भी याद है। शांति देवी ने रुंधे गले से बताया कि अंग्रेज कई बार तो महिलाओं को घर से खींचकर बाल पकड़कर उनसे मारपीट करते थे। यहां तक शादी या अन्य पर्व पर समारोह करने की इजाजत नहीं थी। आजादी से पूर्व हिंदू और मुस्लिमों में काफी भाईचारा होता था। जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ उस समय अंग्रेजों ने पता नहीं क्या चाल चली की इकट्ठा रहने वाले हिंदू मुस्लिम परिवारों के बीच जमकर खूनी संघर्ष हुआ। उनके घर के आगे एक कुआं होता था, उसमें लाशें ही लाशें नजर आई थी जिसे याद करने पर आज भी वह सहम उठती हैं। उन्होंने बताया कि शादी के एक साल बाद ही उनके पति फूल सिंह की मृत्यु हो गई थी। उसके बाद उसके देवर बदन सिंह ने पूरे परिवार का पालन-पोषण किया।
विज्ञापन

दादी बचपन से सुनाती आ रही उस दौरान की कहानियां
वहीं बुजुर्ग शांति देवी के पौत्र कामेश राणा ने बताया कि उसकी दादी बचपन से ही उन्हें आजादी से पूर्व की बातें बताती आ रही हैं। आज भी देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के प्रति सम्मान देने के लिए उन्हें प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा उसकी दादी को तिरंगा भेंटकर सम्मान किए जाने से उन्हें काफी अच्छा लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed