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Yamuna Nagar News: पत्थर चोरी से सरकार को 2.12 करोड़ का नुकसान
Mon, 22 Dec 2025 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 22 Dec 2025 12:49 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बरसात के मौसम में नदियों की बाढ़ से किसानों की फसल और गांवों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2025 में कराए गए फ्लड प्रोटेक्शन वर्क में सिंचाई विभाग ने बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती। आरोप है विभागीय अधिकारियों की मनमानी के चलते सरकार को रॉयल्टी और जीएसटी के रूप में करीब 2 करोड़ 12 लाख 76 हजार 667 रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। यह खुलासा सिंचाई विभाग की विजिलेंस की ओर से की गई जांच में हुआ है।
बताया जा रहा है इस मामले में फ्लड प्रोटेक्शन वर्क में नदियों और वन क्षेत्र से पत्थर चोरी कर उपयोग किए जाने को लेकर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने लिखित शिकायत साक्ष्यों सहित दी थी। इस पर चीफ इंजीनियर ने मामले की जांच विजिलेंस विंग करनाल डिविजन के एक्सईएन एचडी कांबोज को सौंपी। जांच अधिकारी ने जिन-जिन स्थानों पर बाढ़ बचाव कार्य किए गए थे, वहां मौके पर जाकर निरीक्षण किया। साथ ही पत्थर खरीद से जुड़े रिकॉर्ड और बिल विभागीय अधिकारियों से मांगे गए, लेकिन जगाधरी और दादूपुर डिविजन द्वारा तय समय पर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
4.25 लाख मीट्रिक टन चोरी किया पत्थर
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि बाढ़ सुरक्षा कार्यों में करीब 4 लाख 25 हजार 533 मीट्रिक टन पत्थर का प्रयोग किया गया, जो अवैध रूप से चोरी किया गया था। इसी कारण सरकार को रॉयल्टी और जीएसटी का भारी नुकसान हुआ। एक्सईएन ने अपनी रिपोर्ट चीफ इंजीनियर को सौंपी, जिसके बाद इसे विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) को भेज दिया गया। एसीएस ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सरकार को हुए नुकसान की रिकवरी के आदेश दिए हैं। सरकार ने बरसात में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए यमुना, सोम, बोली, पथराला नदी और अन्य बरसाती खोरों पर करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से 38 फ्लड प्रोटेक्शन वर्क को मंजूरी दी थी। इनमें से सात कार्य इको सेंसिटिव जोन में होने और ठेकेदार के भाग जाने के कारण अधूरे रह गए। शेष 31 कार्य जगाधरी और दादूपुर डिविजन की देखरेख में पूरे किए गए।
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यह मामला पिछले साल का है। इस मामले में कुछ नहीं है। 2023 की बाढ़ के बाद 2024 में जो कार्य होने थे। इस दौरान सरकार की तरफ से कोई गाइडलाइन नहीं थी रॉयल्टी को लेकर इनसे कोई प्रूफ लिया जाए। इस साल सरकार ने इस बारे में लिखा तो उसी प्रकार से कार्य किया जाने लगा है। - विनोद कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
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यमुनानगर। बरसात के मौसम में नदियों की बाढ़ से किसानों की फसल और गांवों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2025 में कराए गए फ्लड प्रोटेक्शन वर्क में सिंचाई विभाग ने बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती। आरोप है विभागीय अधिकारियों की मनमानी के चलते सरकार को रॉयल्टी और जीएसटी के रूप में करीब 2 करोड़ 12 लाख 76 हजार 667 रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। यह खुलासा सिंचाई विभाग की विजिलेंस की ओर से की गई जांच में हुआ है।
बताया जा रहा है इस मामले में फ्लड प्रोटेक्शन वर्क में नदियों और वन क्षेत्र से पत्थर चोरी कर उपयोग किए जाने को लेकर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने लिखित शिकायत साक्ष्यों सहित दी थी। इस पर चीफ इंजीनियर ने मामले की जांच विजिलेंस विंग करनाल डिविजन के एक्सईएन एचडी कांबोज को सौंपी। जांच अधिकारी ने जिन-जिन स्थानों पर बाढ़ बचाव कार्य किए गए थे, वहां मौके पर जाकर निरीक्षण किया। साथ ही पत्थर खरीद से जुड़े रिकॉर्ड और बिल विभागीय अधिकारियों से मांगे गए, लेकिन जगाधरी और दादूपुर डिविजन द्वारा तय समय पर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
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4.25 लाख मीट्रिक टन चोरी किया पत्थर
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि बाढ़ सुरक्षा कार्यों में करीब 4 लाख 25 हजार 533 मीट्रिक टन पत्थर का प्रयोग किया गया, जो अवैध रूप से चोरी किया गया था। इसी कारण सरकार को रॉयल्टी और जीएसटी का भारी नुकसान हुआ। एक्सईएन ने अपनी रिपोर्ट चीफ इंजीनियर को सौंपी, जिसके बाद इसे विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) को भेज दिया गया। एसीएस ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सरकार को हुए नुकसान की रिकवरी के आदेश दिए हैं। सरकार ने बरसात में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए यमुना, सोम, बोली, पथराला नदी और अन्य बरसाती खोरों पर करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से 38 फ्लड प्रोटेक्शन वर्क को मंजूरी दी थी। इनमें से सात कार्य इको सेंसिटिव जोन में होने और ठेकेदार के भाग जाने के कारण अधूरे रह गए। शेष 31 कार्य जगाधरी और दादूपुर डिविजन की देखरेख में पूरे किए गए।
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यह मामला पिछले साल का है। इस मामले में कुछ नहीं है। 2023 की बाढ़ के बाद 2024 में जो कार्य होने थे। इस दौरान सरकार की तरफ से कोई गाइडलाइन नहीं थी रॉयल्टी को लेकर इनसे कोई प्रूफ लिया जाए। इस साल सरकार ने इस बारे में लिखा तो उसी प्रकार से कार्य किया जाने लगा है। - विनोद कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।