{"_id":"9fe78fb3aeaae266e657a5de7fb2605a","slug":"spat-grew-disillusioned-with-the-students-25-per-cent-arrived","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्पैट से विद्यार्थियों का हुआ मोहभंग, 25 फीसदी ही पहुंचे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्पैट से विद्यार्थियों का हुआ मोहभंग, 25 फीसदी ही पहुंचे
यमुनानगर
Updated Sat, 14 Dec 2013 05:25 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्पैट योजना लगातार विद्यार्थियों के दिलों से उतरती जा रही है। यही वजह
विज्ञापन
है कि दूसरे चरण के लिए हुए 2500 बच्चों का चयन हुआ था, लेकिन पहुंचे सिर्फ
779।
इससे साफ है कि जिस उद्देश्य से सरकार ने यह योजना चलाई थी, वह बच्चों को लुभाने में फ्लॉप साबित हो रही है। स्पैट टेस्ट में भाग लेने वाले बच्चाें की संख्या जिले में हर साल कम होती जा रही है। इस बार पहले चरण में टेस्ट लेने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की थी।
इस कारण बच्चों अच्छी खासी संख्या में भाग लिया। लेकिन दूसरे चरण में टेस्ट की जिम्मेदारी खेल विभाग की थी, इसमें बच्चों को टेस्ट स्कूल के मैदान में नहीं बल्कि ब्लाक स्तर पर बने स्टेडियम में जाकर देना था। लेकिन यहां पर 25 प्रतिशत बच्चे ही टेस्ट देने के लिए मैदान में पहुंच पाए।
सरकार ने साल 2009-10 में नई प्रतिभा तलाशने के लिए स्पैट योजना शुरू की थी। पहले साल बच्चों ने बड़े ही उत्साहपूर्वक टेस्ट दिए थे, लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरा बच्चे स्पैट से दूर होते गए। खेल विभाग के अधिकारी भी इसके कई कारण गिनवा रहे हैं। उनका कहना है कि एक तो टेस्ट में जो इवेंट रखे गए हैं वे काफी मुश्किल हैं और दूसरा टेस्ट देने वाले बच्चों को डाइट के लिए या आने जाने के लिए कोई बजट जारी नहीं किया जाता।
परीक्षा का भी नहीं दौर
2500 बच्चों में से 779 बच्चे टेस्ट देने के लिए पहुंच रहे हैं अगर इसका कारण स्कूलों में शिक्षा का दबाव या परीक्षा का दौर कहा जाए यह भी नहीं है। इन दिनाें तो स्कूलों में बच्चों पर परीक्षा का दबाव भी ज्यादा नहीं है। क्योंकि अभी बोर्ड कक्षाओं के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं खत्म हुई हैं और टीचर भी पेपर चेकिंग में उलझे हुए हैं। इसके साथ ही अभी ठंड भी इतनी नहीं है कि बच्चे अधिक ठंड के चलते मैदान तक नहीं पहुंच पाए हों। कारण चाहे जो भी रहा है खेल विभाग के अधिकारियों को तलाशना होगा।
रादौर और मुस्तफाबाद पिछड़
ब्लॉक के हिसाब से की जाए तो रादौर और मुस्तफाबाद सबसे पीछे है। इन दोनों ही ब्लाक से 51 बच्चे ही स्पैट देने के लिए पहुंचे थे। इसके साथ ही अगर जगाधरी ब्लॉक को निकाल दें तो जिले के पांच ब्लाक से 300 से भी कम बच्चों ने टेस्ट दिया है। जगाधरी से 487, बिलासपुर और सढोरा से 184, छछरौली से 57 बच्चों ने टेस्ट दिया। गुरुवार को स्पैट का दूसरा चरण खत्म हो गया है। पांच दिन चले स्पैट में खेल विभाग के अधिकारियों को टेस्ट लेने के लिए मैदान में घंटों इंतजार करना पड़ा। कई ब्लॉकों से तो अधिकारियों को फोन कर पीटीआई को बच्चे भेजने को कहना पड़ा। तब जाकर ही 2500 में से 779 बच्चे टेस्ट देने के लिए पहुंचे हैं।
खेल विभाग की योजना
खेल विभाग की ओर से नई प्रतिभा की खोज के लिए स्पैट योजना शुरू की गई है। इसमें बच्चों के तीन स्तर पर टेस्ट लेकर उनकी फिटनेस जानी जाती है। हर वर्ष प्रदेश से पांच हजार बच्चे योजना में चुने जाते हैं। चुने गए बच्चों को उनकी प्रतिभा के हिसाब से खेल प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें 1500 से दो हजार रुपये प्रति माह स्कालरशिप भी दी जाती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए नए खिलाड़ियों को तैयार करना है।
इससे साफ है कि जिस उद्देश्य से सरकार ने यह योजना चलाई थी, वह बच्चों को लुभाने में फ्लॉप साबित हो रही है। स्पैट टेस्ट में भाग लेने वाले बच्चाें की संख्या जिले में हर साल कम होती जा रही है। इस बार पहले चरण में टेस्ट लेने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की थी।
इस कारण बच्चों अच्छी खासी संख्या में भाग लिया। लेकिन दूसरे चरण में टेस्ट की जिम्मेदारी खेल विभाग की थी, इसमें बच्चों को टेस्ट स्कूल के मैदान में नहीं बल्कि ब्लाक स्तर पर बने स्टेडियम में जाकर देना था। लेकिन यहां पर 25 प्रतिशत बच्चे ही टेस्ट देने के लिए मैदान में पहुंच पाए।
सरकार ने साल 2009-10 में नई प्रतिभा तलाशने के लिए स्पैट योजना शुरू की थी। पहले साल बच्चों ने बड़े ही उत्साहपूर्वक टेस्ट दिए थे, लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरा बच्चे स्पैट से दूर होते गए। खेल विभाग के अधिकारी भी इसके कई कारण गिनवा रहे हैं। उनका कहना है कि एक तो टेस्ट में जो इवेंट रखे गए हैं वे काफी मुश्किल हैं और दूसरा टेस्ट देने वाले बच्चों को डाइट के लिए या आने जाने के लिए कोई बजट जारी नहीं किया जाता।
परीक्षा का भी नहीं दौर
2500 बच्चों में से 779 बच्चे टेस्ट देने के लिए पहुंच रहे हैं अगर इसका कारण स्कूलों में शिक्षा का दबाव या परीक्षा का दौर कहा जाए यह भी नहीं है। इन दिनाें तो स्कूलों में बच्चों पर परीक्षा का दबाव भी ज्यादा नहीं है। क्योंकि अभी बोर्ड कक्षाओं के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं खत्म हुई हैं और टीचर भी पेपर चेकिंग में उलझे हुए हैं। इसके साथ ही अभी ठंड भी इतनी नहीं है कि बच्चे अधिक ठंड के चलते मैदान तक नहीं पहुंच पाए हों। कारण चाहे जो भी रहा है खेल विभाग के अधिकारियों को तलाशना होगा।
रादौर और मुस्तफाबाद पिछड़
ब्लॉक के हिसाब से की जाए तो रादौर और मुस्तफाबाद सबसे पीछे है। इन दोनों ही ब्लाक से 51 बच्चे ही स्पैट देने के लिए पहुंचे थे। इसके साथ ही अगर जगाधरी ब्लॉक को निकाल दें तो जिले के पांच ब्लाक से 300 से भी कम बच्चों ने टेस्ट दिया है। जगाधरी से 487, बिलासपुर और सढोरा से 184, छछरौली से 57 बच्चों ने टेस्ट दिया। गुरुवार को स्पैट का दूसरा चरण खत्म हो गया है। पांच दिन चले स्पैट में खेल विभाग के अधिकारियों को टेस्ट लेने के लिए मैदान में घंटों इंतजार करना पड़ा। कई ब्लॉकों से तो अधिकारियों को फोन कर पीटीआई को बच्चे भेजने को कहना पड़ा। तब जाकर ही 2500 में से 779 बच्चे टेस्ट देने के लिए पहुंचे हैं।
खेल विभाग की योजना
खेल विभाग की ओर से नई प्रतिभा की खोज के लिए स्पैट योजना शुरू की गई है। इसमें बच्चों के तीन स्तर पर टेस्ट लेकर उनकी फिटनेस जानी जाती है। हर वर्ष प्रदेश से पांच हजार बच्चे योजना में चुने जाते हैं। चुने गए बच्चों को उनकी प्रतिभा के हिसाब से खेल प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें 1500 से दो हजार रुपये प्रति माह स्कालरशिप भी दी जाती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए नए खिलाड़ियों को तैयार करना है।