फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Slow progress in making ICU, patient's life in danger

Yamuna Nagar News: आईसीयू बनाने की चाल सुस्त, मुश्किल में मरीज की जान

Mon, 30 Dec 2024 03:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 30 Dec 2024 03:02 AM IST
विज्ञापन
Slow progress in making ICU, patient's life in danger
यमुनानगर। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में आईसीयू बनाने की फाइल आगे खिसकने का नाम ही नहीं ले रही। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे।
विज्ञापन

यही वजह है कि बिना उपकरणों वाला आईसीयू वार्ड तो बन चुका है, लेकिन इससे ताला खुलने का नाम नहीं ले रहा। अब तो कई दिन से ताला न खुलने के कारण यहां रखे बेड व उपकरणों पर भी धूल की परत जम गई है। पांच मंजिला 200 बेड के अस्पताल में आईसीयू न होने का खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं। उनकी तबीयत थोड़ी सी खराब हुई नहीं की डॉक्टर पीजीआई रेफर की पर्ची बना देते हैं। इसके बाद मरीज इलाज के लिए पीजीआई में भटकते रहते हैं।
विज्ञापन

जब तक मरीज पीजीआई पहुंचता है तब तक वह जान से हाथ धो बैठता है या फिर हालत इतनी खराब हो जाता है कि वहां के डॉक्टर भी जान बचने की कोई गारंटी नहीं दे पाते। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को सभी सुविधाएं देने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिला नागरिक अस्पताल में आईसीयू शुरू करने की प्रक्रिया छह माह पहले शुरू हुई थी, परंतु बात आगे नहीं बढ़ पाई। ऑपरेशन थियेटर के सामने आईसीयू वार्ड बनाकर इसमें छह वेंटिलेटर रख दिए गए। तब से लेकर आज तक इस पर ताला लटका हुआ है। 
आईसीयू में रखे वेंटिलेटर चलाने के लिए फिजिशियन का होना जरूरी है। परंतु स्वास्थ्य विभाग के पास दो साल से न तो फिजिशियन है और न ही अन्य स्टाफ। इसके अलावा इंटर्नविस्ट, मेडिकल ऑफिसर, स्वीपर, चतुर्थ श्रेणी स्टाफ नहीं है। वहीं वेंटिलेटर के लिए सबसे जरूरी मल्टी पैरामीटर मॉनिटर, इंफल्यूजन पंप जैसे जरूरी उपकरणों के साथ-साथ इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां भी नहीं है। आईसीयू के लिए पांच एनेस्थेटिस्ट व पांच ही मेडिकल ऑफिसर चाहिए जो नहीं हैं। स्टाफ की कमी को पूरा करना सरकार का काम है। वहीं वेंटिलेटर के लिए अन्य उपकरणों की डिमांड स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा मुख्यालय भेजी गई थी, लेकिन अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया।
रेफर मरीजों के साथ उनके परिजनों की भी दिक्कत बढ़ जाती है। क्योंकि कई दिनों तक उन्हें घर से दूर पीजीआई में रहना पड़ता है। जिससे लोगों का काम-धंधा तो छूटता ही है साथ ही वहां बार-बार चक्कर लगाने में भी परेशानी होती है। परंतु स्वास्थ्य विभाग को इससे कोई सरोकार नहीं है।

सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह का कहना है कि आईसीयू को चलाने के लिए स्टाफ की जरूरत है। स्टाफ व डॉक्टरों के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा हुआ है। आईसीयू को शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed