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चरित्र प्रमाणपत्र के लिए नारेबाजी, पुलिस ने संभाला मोर्चा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 15 Oct 2022 02:24 AM IST
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sloganeering for character certificate
sloganeering for character certificate - फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। जिला परिषद, ब्लॉक समिति, सरपंच और पंच पद का चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशियों में पुलिस विभाग से चरित्र प्रमाणपत्र लेने की होड़ मच गई है। चरित्र प्रमाणपत्र को लेकर स्पष्ट जानकारी न होने के कारण शुक्रवार को हजारों की संख्या में प्रत्याशी लघु सचिवालय में पहुंच गए। लोगों की भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मियों को अपने मेज लघु सचिवालय की पार्किंग में मंच के ऊपर लगाने पड़े। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि नाम बोलने के लिए पुलिसकर्मियों को माइक लगाना पड़ गया। दोपहर बाद जब कर्मचारी वापस जाने लगे तो प्रत्याशी भी रोष स्वरूप लघु सचिवालय में घुस गए और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाने लगे।
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करीब पौना घंटा प्रत्याशियों ने डीसी कार्यालय और एसपी कार्यालय जाने वाली सीढ़ियों के सामने बैठकर प्रदर्शन किया। बाद में एसपी मोहित हांडा व डीडीपीओ शंकर लाल गोयल ने प्रत्याशियों को समझाकर शांत किया। जिसके बाद सभी वापस लौट गए।
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चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों ने चरित्र प्रमाणपत्र के लिए पुलिस विभाग के पास ऑनलाइन आवेदन किया था। कई दिनों से आवेदन कर रहे प्रत्याशियों को तीन दिन बाद भी जब चरित्र प्रमाणपत्र नहीं मिले तो वह सैकड़ों की संख्या में लघु सचिवालय पहुंच गए। सचिवालय की तीसरी मंजिल पर जब भीड़ लगने लगी तो पुलिसकर्मी अपनी मेज को बाहर ले आए। पार्किंग स्थल में बनाए गए मंच पर मेज लगाई गई। समय के साथ भीड़ भी बढ़ती जा रही थी। इसलिए पुलिस को माइक लगाना पड़ा। माइक से पुलिसकर्मी एक-एक प्रत्याशी का नाम बोलते गए और चरित्र प्रमाणपत्र देते गए।
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चरित्र प्रमाणपत्र लेने आए नरेंद्र, रवि, गगन व सुरेंद्र ने बताया कि तीन दिन पहले उन्होंने सीएससी से चरित्र प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। वह थाने में गए तो वहां से बताया गया कि आप लघु सचिवालय में स्थित सिक्योरिटी ब्रांच में चले जाएं, वहीं से प्रमाणपत्र मिलेगा। चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, परंतु अभी तक किसी को भी चरित्र प्रमाणपत्र नहीं मिला है। यहां आए तो बहुत ज्यादा भीड़ थी। जबकि होना यह चाहिए था कि भीड़ को देखते हुए थाने से ही प्रमाणपत्र देने चाहिए थे। पहले उन्हें सीएससी में ऑनलाइन आवेदन के लिए 200 रुपये दिए, जो लोग ऑफलाइन प्रमाणपत्र ले रहे हैं उन्हें 500 रुपये का चालान कटवाना पड़ रहा है। इसके अलावा आने जाने का किराया अलग से है।

स्पष्ट जानकारी न होने से आई दिक्कत
चुनाव की घोषणा के समय यह कहा गया था कि जिन लोगों पर थानों में केस दर्ज हैं या फिर उन्हें किसी मामले में सजा हुई है इसके लिए उन्हें पुलिस विभाग द्वारा जारी चरित्र प्रमाणपत्र भी नामांकन के साथ देना होगा। इसलिए लोगों ने सीएससी से ऑनलाइन आवेदन करवाने शुरू कर दिए। लोग कभी थाने में तो कभी सिक्योरिटी ब्रांच में चक्कर काटने लगे। नामांकन के लिए केवल छह दिन होने से प्रत्याशियों को लगा कि यदि पुलिस से चरित्र प्रमाणपत्र नहीं मिला तो वह चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएंगे। प्रशासन की तरफ से भी इस बारे में कोई सही जानकारी लोगों को नहीं दी गई। रही सही कसर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों ने पूरी कर दी। जब लोग चरित्र प्रमाणपत्रों के लिए लाखों रुपये खर्च कर चुके है तो जिला निर्वाचन अधिकारी ने शाम को प्रेस नोट जारी करवाया कि पुलिस से चरित्र प्रमाणपत्र का नामांकन में कोई जिक्र नहीं है।
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