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पवित्र सरोवरों में छह लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
यमुनानगर
Updated Sun, 17 Nov 2013 01:28 AM IST
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कपालमोचन के पवित्र सरोवरों में इस बार करीब छह लाख श्रद्धालुओं ने आस्था
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की डुबकी लगाई। मेले में पंजाब के श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक रही।
मेले की व्यवस्था संभालने के लिए उपायुक्त मंदीप सिंह बराड़ के नेतृत्व में
लगभग सभी विभागों के अधिकारी दिन-रात यहां जुटे रहे।
शनिवार को हर तरफ श्रद्धालुओं का सैलाब नजर आया। श्रद्धालुओं से भरे वाहनों का मेला क्षेत्र की ओर जाने का सिलसिला शाम तक जारी रहा। अनुमान के मुताबिक रात 12 बजे तक मेले में करीब छह लाख श्रद्धालु पहुंच चुके थे। शाम ढलते ही ऋणमोचन, कपालमोचन और सूरजकुंड सरोवरों के अलावा गुरुद्वारा कपालमोचन में दीपदान के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा।
दीपदान के बाद सरोवरों पर नाममात्र के श्रद्धालु नजर आए। अधिकतर श्रद्धालु तंबुओं, धर्मशालाओं और किराए के कमरों में आराम फरमाते नजर आए। रात को जैसे ही घड़ी की सुईयां एक सीध में आईं, श्रद्धालु पवित्र सरोवरों में डुबकी लगाने के लिए निकल पड़े। कुछ मिनटों में ही हर तरफ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
एक-दूसरे से बिछुड़ने के डर से महिला श्रद्धालु एक-दूसरे का पल्लू थामकर सरोवरों की ओर बढ़ती नजर आईं। किसी ने मन्नत पूरी होने पर डुबकी लगाई तो कोई डुबकी लगाकर मन्नत मांगता नजर आया।
किसी ने एक तो किसी ने सात डुबकियां लगाईं। पिछले कई वर्षों तक प्रशासन पर मेले में बदइंतजामी का लगा दाग इस बार लगभग पूरी तरह धुल गया। इस बार प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं से मेले में आने वाले साधु-संतों के साथ-साथ श्रद्धालु भी खुश नजर आए।
मेले में झलका सांप्रदायिक सद्भाव
यमुनानगर। कपालमोचन मेले में सांप्रदायिक सद्भाव साफ तौर पर नजर आता है। मंदिरों में सिख पूरे श्रद्धाभाव से नमन करते हैं, वहीं हिंदू कपालमोचन गुरुद्वारे में शीश नवाते हैं। मेले में मुस्लिम समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में नजर आए। सभी धर्मों की इस पवित्र तीर्थ स्थल के प्रति प्रगाढ़ आस्था है। मेले में सबसे अधिक पंजाब के श्रद्धालु आते हैं। कपालमोचन सरोवर के किनारे स्थित गऊ बच्छा घाट के मंदिरों के प्रति मेले में आने वाले सिख श्रद्धालुओं की असीम आस्था है। मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ-साथ दीप भी जलाते हैं। उधर, कपालमोचन गुरुद्वारे में हिंदू श्रद्धालु भी माथा टेकने अवश्य जाते हैं। गुरुद्वारा साहिब में दीपदान करने वालों में बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु होते हैं। मेला क्षेत्र में लगने वाली दुकानों में मुस्लिम दुकानदारों की संख्या काफी अधिक है। सहारनपुर से आए पत्थर का सामान बेचने वाले असलम ने बताया कि वह पिछले बीस वर्षों से इस मेले में दुकान लगा रहे हैं। मेले में मुस्लिम समुदाय के लोग भी नजर आते हैं। जाति-धर्म का बंधन इस मेले में कही नजर नहीं आता।
श्रद्धालु चलाते हैं भंडारे और लंगर
करीब चार किलोमीटर क्षेत्र में लगने वाले मेले में हर साल पांच से सात लाख श्रद्धालु आते हैं। पांच दिनों तक मेला क्षेत्र में हर तरफ श्रद्धालु नजर आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के खाने-पीने का इंतजाम आसान नहीं है। प्रशासन की ओर से इसकी कोई व्यवस्था नहीं की जाती है। इसके बावजूद हर श्रद्धालु को यहां मुफ्त भरपेट खाने को मिलता है। मेले में करीब 80 भंडारे और लंगर दिन-रात चलते रहते हैं, जिनमें भोजन के अलावा दूध, चाय, ब्रेड पकोड़ा, जलेबी, हलवा, खीर और अन्य व्यंजन प्रसाद के तौर पर बांटे जाते हैं। पंजाब से आने वाले श्रद्धालु मेले में भंडारा और लंगर चलाने के लिए खाद्य सामग्री ट्रकों में भरकर यहां लाते हैं। इन भंडारों और लंगरों में 24 घंटे कुछ न कुछ बनता रहता है। जिला लुधियाना तहसील रायकोट से श्री उदासीन गोबिंद गऊ धाम की ओर से सूरजकुंड सरोवर के नजदीक भंडारा लगाया गया है। पंडित कृष्ण कुमार जोशी की देखरेख में लगने वाले इस भंडारे में 35 हलवाई 24 घंटे कुछ न कुछ बनाते रहते हैं। भंडारे के साथ 350 सेवादार आए हैं, जो भंडारा चलाने में मदद करते हैं। भंडारा चलाने के लिए दो ट्रकों में भरकर खाद्य सामग्री यहां लाई गई है। पंडित कृष्ण कुमार जोशी ने बताया कि श्री उदासीन गोबिंद गऊ धाम की ओर से कपालमोचन में पिछले 18 साल से भंडारा लगाया जा रहा है। इसके अलावा संत प्रभजोत सिंह बठिंडा, बंत सिंह बरनाला, माता मनसा देवी मंदिर धूरी, लुधियाना, राम स्वरूप ब्रह्मचारी, महंत ज्ञानदास, महंत बलविंद्र सिंह महंत ताराचंद होशियारपुर, महंत मेवा सिंह पटियाला, सहजयोग आश्रम यमुनानगर की ओर से पिछले 20-25 वर्षों से मेले में भंडारा और लंगर लगाया जा रहा है।
कदम के पेड़ पर बांधा और खोला सूत का धागा
सूरजकुंड सरोवर पर स्थित कदम के पेड़ के प्रति श्रद्धालुओं की असीम आस्था है। महिला श्रद्धालुओं ने पेड़ के चक्कर काटकर सूत का धागा बांधा। जिनकी मन्नत पूरी हुई, उन्होंने पेड़ पर बंधा धागा खोला। मान्यता है कि इस पेड़ पर सूत का धागा बांधकर मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है। मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु यहां आकर पेड़ पर बंधा सूत का धागा खोलते हैं।
जलेबी का साइज देखकर हैरत में पड़े श्रद्धालु
मेले में आने वाले श्रद्धालु यहां बिक रही गोहाना की मशहूर जलेबी को देखकर आश्चर्यचकित हो रहे हैं। जलेबी का साइज करीब नौ इंच चौड़ा है। शुद्ध देसी घी से बनने वाली इस जलेबी की खुशबू से श्रद्धालु स्टाल की ओर खिंचे चले आते हैं। जलेबी का साइज देखकर श्रद्धालुओं यह कहते नजर आए-एन्नी बड्डी जलेबी तां पैल्ली वार वेखी आ....गोहाना की जलेबी का स्टाल लगाने वाले बलजीत सिंह गोहाना ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से जलेबी का स्टाल लगा रहे हैं।
धृतराष्ट्र भी पहुंचे कपालमोचन
यमुनानगर। मशहूर फिल्म अभिनेता और महाभारत में धृतराष्ट्र का रोल निभाने वाले गिरिजा शंकर शुक्रवार देर रात कपालमोचन मेले में पहुंचे। गिरिजा शंकर का मेले में पहुंचने पर अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. सतबीर सिंह सैनी ने स्वागत किया। गिरिजा शंकर ने कहा कि धार्मिक स्थल कपाल मोचन विभिन्न वर्गों, धर्मों और जातियोें की एकता का प्रतीक है। प्रदेश में असंख्य तीर्थ स्थल है और कपाल मोचन तीर्थ स्थल अपने आप में अनूठा एवं बेमिसाल है। धर्म ग्रंथों के अनुसार महाभारत के रचयिता महर्षि पराशर के पुत्र भगवान वेद व्यास की कर्मभूमि भी बिलासपुर रही है। उन्होंने अभी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म वेक अप इंडिया और एक चैनल पर चल रहे धारावाहिक उत्तरण की भी चर्चा की। वे मेले में अपने परिवार के साथ भी घूमने गए। उन्होंने मेले में अपने प्रशंसकों को ऑटोग्राफ दिए। इस मौके पर प्रशासनिक खंड में मिनिस्ट्ररी ऑफ हेल्थ के निदेशक डॉ. टीसी शर्मा, दिल्ली के दयाधाम से आए पंडित चंद्रमणि मिश्र, अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. सतबीर सिंह सैनी, जिला सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी सुरेश यादव, जिला सूचना अधिकारी रमेश गुप्ता, बीडीपीओ व मेला अधिकारी जोगेश कुमार, बिलासपुर के एआईपीआरओ रणबीर सेन, कुरुक्षेत्र के एआईपीआरओ बलराम शर्मा मौजूद रहे।
ड्यूटी से नदारद मिले अधिकारी
यमुनानगर। उपायुक्त एवं कपाल मोचन तीर्थ श्राइन बोर्ड के मुख्य प्रशासक मंदीप सिंह बराड़ ने शुक्रवार रात 11:30 बजे कपालमोचन मेले का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कई ऐसे अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई जो ड्यूटी से नदारद मिले। इसमें उन्होंने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को तो आड़े हाथों लिया। ड्यूटी से नदारद मिलने के बारे में करीब पांच मिनट डीसी ने उनसे सवाल जवाब किए। डीसी ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से कहा कि मेले में आने जाने वाले श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न आए इसका ख्याल रखा जाए। उन्होंने सभी ड्यूटी मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने सेक्टरों में निरंतर दौरा करते रहें और कर्मचारियों को भी हिदायतें देते रहें। उन्होंने मीडिया सेंटर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश देते हुए कहा कि मेटल डिटेक्टर पूरी तरह से काम करें और सुरक्षा में कोई चूक न होने दें। निरीक्षण के दौरान उनके साथ बिलासपुर की उपमंडलाधीश एवं मेला प्रशासक पूजा चावरिया, मेला अधिकारी जोगेश कुमार, डीआईओ रमेश गुप्ता, बिलासपुर के तहसीलदार ईश्वर चंद मौजूद रहे।
2500 घोड़े पहुंचे घोड़ा मंडी
बिलासपुर के बीडीपीओ व मेला अधिकारी जोगेश कुमार ने बताया कि घोड़ा मंडी में अब तक लगभग 2500 घोड़े विजिट कर चुके हैं। मंडी में उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब, उत्तरप्रदेश व हरियाणा से व्यापारी आए हैं। इस बार व्यापारियों में वृद्धि हुई है। यहां पर व्यापारियों को बताया जाता है कि उनके पशु कैसे हेल्दी हों और कैसे उन्हें बीमारियाें से बचाया जा सकता है। इसके लिए यूके बेस्ड फर्म बुक्र इंडिया कंपनी से मेले में विशेषज्ञ बुलाए गए हैं, जो व्यापारियों को घोड़े और खच्चर संबंधी नस्ल सुधारने और उनकी गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए नए-नए सुझाव दे रहे हैं।
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साढ़े तीन लाख को दिए सिक्के
मेेले में पंजाब नेशनल बैंक की ओर से मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं को एक रुपया, दो रुपये, पांच रुपये और 10 रुपये के सिक्के उपलब्ध करवाने के लिए विशेष स्टाल की कमान उप प्रबंधक एचएस सोहल, डीएस मक्कड़ और एपी धीमान संभाले हुए हैं। अब तक श्रद्धालुओं को लगभग तीन लाख 50 हजार रुपये के खुले सिक्के उपलब्ध करवाए गए हैं।
महिलाएं भी लगीं श्रद्धालुओं की सेवा में
यमुनानगर। कपालमोचन में श्रद्धालुओं की सहायता और मेले में व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामाजिक संगठनों के पुरुष ही नहीं, कई महिलाएं भी काम कर रही हैं। ये महिलाएं घरों के काम के साथ-साथ मेले में भी ड्यूटी पूरे श्रद्धा भाव से निभा रही हैं। मेले में काम कर रहीं महिला सीमा शर्मा ने बताया कि वह पहली बार मेले में इस तरह की सेवा कर रही हैं। प्रशासन की ओर से उसकी ड्यूटी बुजुर्ग महिलाओं की सहायता के लिए लगाई गई है। सरोवरों के पास नहाते समय किसी बुजुर्ग महिला को चोट न लग जाए, उन्हें सीढ़ियों पर चढ़ाना और उतारा इस प्रकार के कार्य उनकी ओर से किए जा रहे हैं। उसका कहना है कि वह सुबह दस से चार बजे तक ड्यूटी देती हैं। उसके बाद घर आकर घर का भी काम करती हैं। उन्होंने बताया कि वह मेले में बस में आना-जाना कर रही हैं। मेले में श्रद्धालुओं की सेवा कर उन्हें सुकून मिलता है।
आंगनबाड़ी वर्कर भी लगी सेवा में
मेले में कई आंगनबाड़ी वर्कर भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। वर्कर सुनीता और रानी ने बताया कि उनकी ड्यूटी महिला श्रद्धालुओं की सहायता के लिए लगाई गई है। इसमें वे सरोवर और पूजा स्थल पर उनकी हेल्प करती हैं। उनका कहना है कि ऐसे पुण्य कार्य में सभी को बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।
हौसले के सामने उम्र पड़ी बौनी
सीनियर सिटीजन क्लब के कई ऐसे सदस्य भी मेले में काम कर रहे हैं, जिनकी उम्र 60 वर्ष से ऊपर है। मेले में सेवा करने का हौसला इतना विशाल है कि इनके हौसले के आगे उम्र भी बौनी पड़ने लगी है। क्लब के सचिव नरेश गुप्ता ने बताया कि उनके क्लब के दस सदस्य मेला क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसमें सभी सदस्य सरोवरों के आसपास हैं। कुछ को सरोवरों की सफाई की जिम्मेदारी दी गई है, तो कुछ को सरोवरों के अंदर दीप जलाने से श्रद्धालुओं को रोकने की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि उसके कुछ सदस्य मेले में शरारती तत्वों पर भी नजर रखे हुए हैं। उनका कहना है कि इस उम्र में श्रद्धालुओं की सेवा कर उन्हें आत्मिक शांति मिल रही है।
लग्जरी गाड़ी के बराबर मारवाड़ी घोड़े की कीमत
यमुनानगर। कपालमोचन मेले में लग रही घोड़ा मंडी में लग्जरी गाड़ी के बराबर रेट घोड़ों का लग रहा है। मंडी में दो लाख से पांच लाख के तो कई घोड़े बिकने के लिए खड़े हैं, वहीं इस बार सबसे महंगा घोड़ा अंबाला जिले के गांव नगल निवासी अनिल लेकर पहुंचे हैं। ये अपने घोड़े की कीमत दस लाख रुपये बता रहे हैं। उनका कहना है कि चार लाख रुपये तो घोड़े के कई खरीदार लगा चुके हैं। वह मंडी में मारवाड़ी नस्ल के दो घोड़े लेेकर आए हैं। अनिल ने बताया कि बचपन से उन्हें पशुओं से बेहद लगाव था। धीरे-धीरे यह लगाव शोक में बदल गया। उनका कहना है कि अब यह उनका व्यापार बन गया है। पिछले वर्ष भी इसी नस्ल के दो घोड़े लेकर वह कपालमोचन मेला में लगने वाली मंडी में आया था और इस बार भी। उसका कहना है कि घोड़ों में यह नस्ल अच्छी मानी जाती है।
पांच सौ रुपये करते हैं प्रतिदिन खर्च
अनिल ने बताया कि वह रोजाना एक घोड़े का खर्च 500 रुपये आता है। उसने बताया कि प्रतिदिन इन्हें नहलाना, 15 से 20 दिन में बालों की कटिंग, दवाओं का खर्च और डाइट का खर्च लगाकर प्रतिदिन 500 रुपये कम से कम खर्च एक घोड़े पर होता है। उनका कहना है कि उसे द्वारा पाले घोडे़ उसकी आवाज तक को पहचानते हैं। वह इनकी मन से सेवा करता है।
घोड़े के डांस ने मोहा मन
घोड़ा मंडी में शनिवार को नुगरी नस्ल के घोड़े का डांस आकर्षण का केंद्र रहा। घोडे़ के मालिक ने बताया कि उसका घोड़ा पंजाब गीत पर डांस करता है। ट्रैक्टर पर लगे स्टीरियो में चल रहे गानों पर यह घोड़ा काफी देर नाचता रहा। इससे मेले में और सड़क से जा रहे लोग इस घोड़े का डांस देखने के लिए दौड़े चले आए, वहीं पटियाला के सरला खुर्द से घोड़ा लेकर पहुंचे नत्था सिंह ने बताया कि वे मेले में घोड़े की प्रदर्शनी लगाते हैं। करनाल के गांव फुरलक से आए नरेंद्र ने बताया कि वह मारवाड़ी नस्ल का घोड़ा लेकर मंडी पहुंचा है। उसके घोड़े के कई ग्राहक आ चुके हैं, लेकिन रेट नहीं बन पाया है। उसका कहना है कि उसके घोड़े की खासीयत है कि वह चलने में अन्य घोड़े से अच्छा है, देखने में सुंदर है और नस्ल काफी अच्छी है। जिला मोहाली के गांव राजोमाजरा से आए जसबीर सिंह ने बताया कि वह मेले के दौरान लगने वाली मंडी में 2008 से आ रहे हैं। वह नुकरा नस्ल का घोड़ा लेकर आया है। वह अपने घोड़े का रेट पांच लाख रुपये बता रहे हैं।
महिला की हृदय गति रुकने से मौत
बिलासपुर। कपालमोचन मेले से शनिवार को आदिबद्री मंदिर में माथा टेकने गई एक महिला की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। महिला फिरोजपुर के गांव मोदगी की रहने वाली थी। महिला के परिजनों ने बताया कि आदिबद्री और मंत्रा देवी पर माथा टेक जैसे ही वापस कपालमोचन मेले के लिए जा रहे थे, तो रास्ते में मेलकौर की अचानक तबीयत बिगड़ गई। जब तक उसे अस्पताल पहुंचाया गया, उसकी मौत हो गई।
उधर, कपालमोचन मेले में किसी व्यक्ति ने छह श्रद्धालुओं को चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर दे दिया। जिससे वे बेहोश हो गए। इनमें एक महिला भी शामिल है। सभी को पहले एंबुलेंस से बिलासपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां पर तबीयत में सुधार न होता देख डाक्टर ने उन्हें यमुनानगर ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। जानकारी के अनुसार कुछ श्रद्धालु कपालमोचन सरोवर में स्नान कर रहे थे, जैसे ही वे स्नान कर वापस निकले, तो घाट पर खड़े एक व्यक्ति ने उन्हें चाय दी। चाय पीते ही दलीप सिंह, नक्षत्र सिंह, श्याम सिंह, पान सिंह, इंद्रपाल और करनैल कौर लोग बेहोश हो गई।
चाय पीने से छह श्रद्धालु बेहोश
यमुनानगर। कपालमोचन मेले में चाय पीने से आधा दर्जन लोग बेहोश हो गए। इनका उपचार बिलासपुर पीएचसी और ट्रामा सेंटर में चल रहा है।
ट्रामा सेंटर में उपचाराधीन पंजाब के बरवाला जिले के गांव सैहना निवासी नछत्तर सिंह ने बताया कि उसने और उनकी रिश्तेदार दलीप कौर ने कपालमोचन गुरुद्वारे के पास तंबूवाला से चाय पी थी। चाय पीने के बाद वह बेहोश हो गए। इसके बाद आसपास के लोगाें ने उन्हें पीएचसी बिलासपुर में पहुंचाया। जहां से उन्हें ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। इसके अलावा पांच लोग कपाल मोचन टेंट में बेसुध अवस्था में मिले। जिन्हें बिलासपुर के पीएचसी में लाया गया। इनकी पहचान जींद के उंचाना गांव निवासी बलीराम, पान सिंह, लुधियाना निवासी इंद्रपाल सिंह, पंजाब के संगरूर जिले के गांव खेड़ीकला निवासी करनैल कौर के रूप में हुई। जींद निवासी बलीराम का कहना है कि उन्होंने चाय पी थी।
कपालमोचन को संवारा, आदिबद्री से किनारा
यमुनानगर। आदिबद्री जाने वाले रास्तों पर वाहनों से उड़ती धूल और टूटी सड़कें श्रद्धालुओं को परेशान कर रही हैं। वे यहां आने से ही तौबा करने लगे हैं। प्रशासन के इंतजाम सिर्फ कपालमोचन मेला क्षेत्र तक ही सिमट कर रह गए हैं। आदिबद्री कपालमोचन मेले से 12 किलोमीटर दूर हैं। मेले में प्र्रशासन लाखों श्रद्धालुओं के आने का दावा करता है, यदि इनमें से एक चौथाई श्रद्धालु आदिबद्री आ जाएं तो यह क्षेत्र भी प्रचार और प्रसार पा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है, इसका कारण एक ही कपालमोचन मेले में सैकड़ों किलोमीटर से आने वाले इन श्रद्धालुओं को आदिबद्री स्थल तक खींचने वाला कोई भी कदम प्रशासन द्वारा नहीं उठाया जाता।
चार किलोमीटर सड़क पर धूल ही धूल
आदिबद्री के पास चार किलोमीटर का रास्ता कच्चे रास्ते जैसा है। वाहनों के आने जाने से यहां पर धूल ही धूल उड़ती रहती है। कपालमोचन में आए श्रद्धालु आदिबद्री भी जाएं, इसके लिए प्रशासन ने इस चार किलोमीटर की खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत कराना उचित नहीं समझा। गड्ढों को मिट्टी से भरकर इतिश्री कर दी गई, वहीं आदिबद्री से मंदिर तक जाने वाले पहाड़ी रास्ते पर तो हादसे के पूरे इंतजाम हैं। यहां पर कई तीव्र मोड़ हैं, जिन पर मिट्टी डाल हादसे को न्योता देने का काम किया गया है।
मंदिर के सामने ही डाल दी मिट्टी
आदिबद्री स्थित मंदिर एक ऐसा स्थान जहां पर हजारों की संख्या में मेले के दौरान श्रद्धालु शीश झुकाने आते हैं, लेकिन यहां के हालात भी अच्छे नहीं हैं। मंदिर की सीढ़ियाें के सामने पड़े मिट्टी के ढेर को उठाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
सरस्वती सरोवर पड़ा विरान
सरस्वती के पानी को जमा करने के लिए उद्गम स्थल के नीचे सरोवर बनाया गया है। इसमें पानी जरूर है, लेकिन यहां पर एक भी श्रद्धालु स्नान करने नहीं आता। आएगा भी कैसे। इस सरोवर का महत्व इन श्रद्धालुओं को बताने वाला कोई नहीं है। सरोवर की सीढ़ियों पर जमी काई से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसकी सफाई किए कितने दिन हो गए हैं।
बना था श्राइन बोर्ड
श्राइन बोर्ड के नाम पर भले ही प्रशासन ने अपने अंडर ले लिया हो, लेकिन यहां की बदहाली प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रही है। क्षेत्र में प्रसाद की दुकानें लगाए बैठे आसपास के गांव के लोगों का कहना है कि श्राइन बोर्ड सिर्फ यहां से बाबाओं और संतों को भगाने के लिए ही बनाया गया है। पर्यटक को बढ़ावा देने के लिए यहां पर कोई काम नहीं हो रहा है। अगर यह क्षेत्र पर्यटक के रूप में विकसित हो जाए, तो क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या भी काफी हद तक दूर हो सकती है।
शनिवार को हर तरफ श्रद्धालुओं का सैलाब नजर आया। श्रद्धालुओं से भरे वाहनों का मेला क्षेत्र की ओर जाने का सिलसिला शाम तक जारी रहा। अनुमान के मुताबिक रात 12 बजे तक मेले में करीब छह लाख श्रद्धालु पहुंच चुके थे। शाम ढलते ही ऋणमोचन, कपालमोचन और सूरजकुंड सरोवरों के अलावा गुरुद्वारा कपालमोचन में दीपदान के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा।
दीपदान के बाद सरोवरों पर नाममात्र के श्रद्धालु नजर आए। अधिकतर श्रद्धालु तंबुओं, धर्मशालाओं और किराए के कमरों में आराम फरमाते नजर आए। रात को जैसे ही घड़ी की सुईयां एक सीध में आईं, श्रद्धालु पवित्र सरोवरों में डुबकी लगाने के लिए निकल पड़े। कुछ मिनटों में ही हर तरफ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
एक-दूसरे से बिछुड़ने के डर से महिला श्रद्धालु एक-दूसरे का पल्लू थामकर सरोवरों की ओर बढ़ती नजर आईं। किसी ने मन्नत पूरी होने पर डुबकी लगाई तो कोई डुबकी लगाकर मन्नत मांगता नजर आया।
किसी ने एक तो किसी ने सात डुबकियां लगाईं। पिछले कई वर्षों तक प्रशासन पर मेले में बदइंतजामी का लगा दाग इस बार लगभग पूरी तरह धुल गया। इस बार प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं से मेले में आने वाले साधु-संतों के साथ-साथ श्रद्धालु भी खुश नजर आए।
मेले में झलका सांप्रदायिक सद्भाव
यमुनानगर। कपालमोचन मेले में सांप्रदायिक सद्भाव साफ तौर पर नजर आता है। मंदिरों में सिख पूरे श्रद्धाभाव से नमन करते हैं, वहीं हिंदू कपालमोचन गुरुद्वारे में शीश नवाते हैं। मेले में मुस्लिम समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में नजर आए। सभी धर्मों की इस पवित्र तीर्थ स्थल के प्रति प्रगाढ़ आस्था है। मेले में सबसे अधिक पंजाब के श्रद्धालु आते हैं। कपालमोचन सरोवर के किनारे स्थित गऊ बच्छा घाट के मंदिरों के प्रति मेले में आने वाले सिख श्रद्धालुओं की असीम आस्था है। मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ-साथ दीप भी जलाते हैं। उधर, कपालमोचन गुरुद्वारे में हिंदू श्रद्धालु भी माथा टेकने अवश्य जाते हैं। गुरुद्वारा साहिब में दीपदान करने वालों में बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु होते हैं। मेला क्षेत्र में लगने वाली दुकानों में मुस्लिम दुकानदारों की संख्या काफी अधिक है। सहारनपुर से आए पत्थर का सामान बेचने वाले असलम ने बताया कि वह पिछले बीस वर्षों से इस मेले में दुकान लगा रहे हैं। मेले में मुस्लिम समुदाय के लोग भी नजर आते हैं। जाति-धर्म का बंधन इस मेले में कही नजर नहीं आता।
श्रद्धालु चलाते हैं भंडारे और लंगर
करीब चार किलोमीटर क्षेत्र में लगने वाले मेले में हर साल पांच से सात लाख श्रद्धालु आते हैं। पांच दिनों तक मेला क्षेत्र में हर तरफ श्रद्धालु नजर आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के खाने-पीने का इंतजाम आसान नहीं है। प्रशासन की ओर से इसकी कोई व्यवस्था नहीं की जाती है। इसके बावजूद हर श्रद्धालु को यहां मुफ्त भरपेट खाने को मिलता है। मेले में करीब 80 भंडारे और लंगर दिन-रात चलते रहते हैं, जिनमें भोजन के अलावा दूध, चाय, ब्रेड पकोड़ा, जलेबी, हलवा, खीर और अन्य व्यंजन प्रसाद के तौर पर बांटे जाते हैं। पंजाब से आने वाले श्रद्धालु मेले में भंडारा और लंगर चलाने के लिए खाद्य सामग्री ट्रकों में भरकर यहां लाते हैं। इन भंडारों और लंगरों में 24 घंटे कुछ न कुछ बनता रहता है। जिला लुधियाना तहसील रायकोट से श्री उदासीन गोबिंद गऊ धाम की ओर से सूरजकुंड सरोवर के नजदीक भंडारा लगाया गया है। पंडित कृष्ण कुमार जोशी की देखरेख में लगने वाले इस भंडारे में 35 हलवाई 24 घंटे कुछ न कुछ बनाते रहते हैं। भंडारे के साथ 350 सेवादार आए हैं, जो भंडारा चलाने में मदद करते हैं। भंडारा चलाने के लिए दो ट्रकों में भरकर खाद्य सामग्री यहां लाई गई है। पंडित कृष्ण कुमार जोशी ने बताया कि श्री उदासीन गोबिंद गऊ धाम की ओर से कपालमोचन में पिछले 18 साल से भंडारा लगाया जा रहा है। इसके अलावा संत प्रभजोत सिंह बठिंडा, बंत सिंह बरनाला, माता मनसा देवी मंदिर धूरी, लुधियाना, राम स्वरूप ब्रह्मचारी, महंत ज्ञानदास, महंत बलविंद्र सिंह महंत ताराचंद होशियारपुर, महंत मेवा सिंह पटियाला, सहजयोग आश्रम यमुनानगर की ओर से पिछले 20-25 वर्षों से मेले में भंडारा और लंगर लगाया जा रहा है।
कदम के पेड़ पर बांधा और खोला सूत का धागा
सूरजकुंड सरोवर पर स्थित कदम के पेड़ के प्रति श्रद्धालुओं की असीम आस्था है। महिला श्रद्धालुओं ने पेड़ के चक्कर काटकर सूत का धागा बांधा। जिनकी मन्नत पूरी हुई, उन्होंने पेड़ पर बंधा धागा खोला। मान्यता है कि इस पेड़ पर सूत का धागा बांधकर मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है। मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु यहां आकर पेड़ पर बंधा सूत का धागा खोलते हैं।
जलेबी का साइज देखकर हैरत में पड़े श्रद्धालु
मेले में आने वाले श्रद्धालु यहां बिक रही गोहाना की मशहूर जलेबी को देखकर आश्चर्यचकित हो रहे हैं। जलेबी का साइज करीब नौ इंच चौड़ा है। शुद्ध देसी घी से बनने वाली इस जलेबी की खुशबू से श्रद्धालु स्टाल की ओर खिंचे चले आते हैं। जलेबी का साइज देखकर श्रद्धालुओं यह कहते नजर आए-एन्नी बड्डी जलेबी तां पैल्ली वार वेखी आ....गोहाना की जलेबी का स्टाल लगाने वाले बलजीत सिंह गोहाना ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से जलेबी का स्टाल लगा रहे हैं।
धृतराष्ट्र भी पहुंचे कपालमोचन
यमुनानगर। मशहूर फिल्म अभिनेता और महाभारत में धृतराष्ट्र का रोल निभाने वाले गिरिजा शंकर शुक्रवार देर रात कपालमोचन मेले में पहुंचे। गिरिजा शंकर का मेले में पहुंचने पर अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. सतबीर सिंह सैनी ने स्वागत किया। गिरिजा शंकर ने कहा कि धार्मिक स्थल कपाल मोचन विभिन्न वर्गों, धर्मों और जातियोें की एकता का प्रतीक है। प्रदेश में असंख्य तीर्थ स्थल है और कपाल मोचन तीर्थ स्थल अपने आप में अनूठा एवं बेमिसाल है। धर्म ग्रंथों के अनुसार महाभारत के रचयिता महर्षि पराशर के पुत्र भगवान वेद व्यास की कर्मभूमि भी बिलासपुर रही है। उन्होंने अभी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म वेक अप इंडिया और एक चैनल पर चल रहे धारावाहिक उत्तरण की भी चर्चा की। वे मेले में अपने परिवार के साथ भी घूमने गए। उन्होंने मेले में अपने प्रशंसकों को ऑटोग्राफ दिए। इस मौके पर प्रशासनिक खंड में मिनिस्ट्ररी ऑफ हेल्थ के निदेशक डॉ. टीसी शर्मा, दिल्ली के दयाधाम से आए पंडित चंद्रमणि मिश्र, अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. सतबीर सिंह सैनी, जिला सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी सुरेश यादव, जिला सूचना अधिकारी रमेश गुप्ता, बीडीपीओ व मेला अधिकारी जोगेश कुमार, बिलासपुर के एआईपीआरओ रणबीर सेन, कुरुक्षेत्र के एआईपीआरओ बलराम शर्मा मौजूद रहे।
ड्यूटी से नदारद मिले अधिकारी
यमुनानगर। उपायुक्त एवं कपाल मोचन तीर्थ श्राइन बोर्ड के मुख्य प्रशासक मंदीप सिंह बराड़ ने शुक्रवार रात 11:30 बजे कपालमोचन मेले का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कई ऐसे अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई जो ड्यूटी से नदारद मिले। इसमें उन्होंने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को तो आड़े हाथों लिया। ड्यूटी से नदारद मिलने के बारे में करीब पांच मिनट डीसी ने उनसे सवाल जवाब किए। डीसी ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से कहा कि मेले में आने जाने वाले श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न आए इसका ख्याल रखा जाए। उन्होंने सभी ड्यूटी मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने सेक्टरों में निरंतर दौरा करते रहें और कर्मचारियों को भी हिदायतें देते रहें। उन्होंने मीडिया सेंटर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश देते हुए कहा कि मेटल डिटेक्टर पूरी तरह से काम करें और सुरक्षा में कोई चूक न होने दें। निरीक्षण के दौरान उनके साथ बिलासपुर की उपमंडलाधीश एवं मेला प्रशासक पूजा चावरिया, मेला अधिकारी जोगेश कुमार, डीआईओ रमेश गुप्ता, बिलासपुर के तहसीलदार ईश्वर चंद मौजूद रहे।
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2500 घोड़े पहुंचे घोड़ा मंडी
बिलासपुर के बीडीपीओ व मेला अधिकारी जोगेश कुमार ने बताया कि घोड़ा मंडी में अब तक लगभग 2500 घोड़े विजिट कर चुके हैं। मंडी में उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब, उत्तरप्रदेश व हरियाणा से व्यापारी आए हैं। इस बार व्यापारियों में वृद्धि हुई है। यहां पर व्यापारियों को बताया जाता है कि उनके पशु कैसे हेल्दी हों और कैसे उन्हें बीमारियाें से बचाया जा सकता है। इसके लिए यूके बेस्ड फर्म बुक्र इंडिया कंपनी से मेले में विशेषज्ञ बुलाए गए हैं, जो व्यापारियों को घोड़े और खच्चर संबंधी नस्ल सुधारने और उनकी गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए नए-नए सुझाव दे रहे हैं।
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साढ़े तीन लाख को दिए सिक्के
मेेले में पंजाब नेशनल बैंक की ओर से मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं को एक रुपया, दो रुपये, पांच रुपये और 10 रुपये के सिक्के उपलब्ध करवाने के लिए विशेष स्टाल की कमान उप प्रबंधक एचएस सोहल, डीएस मक्कड़ और एपी धीमान संभाले हुए हैं। अब तक श्रद्धालुओं को लगभग तीन लाख 50 हजार रुपये के खुले सिक्के उपलब्ध करवाए गए हैं।
महिलाएं भी लगीं श्रद्धालुओं की सेवा में
यमुनानगर। कपालमोचन में श्रद्धालुओं की सहायता और मेले में व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामाजिक संगठनों के पुरुष ही नहीं, कई महिलाएं भी काम कर रही हैं। ये महिलाएं घरों के काम के साथ-साथ मेले में भी ड्यूटी पूरे श्रद्धा भाव से निभा रही हैं। मेले में काम कर रहीं महिला सीमा शर्मा ने बताया कि वह पहली बार मेले में इस तरह की सेवा कर रही हैं। प्रशासन की ओर से उसकी ड्यूटी बुजुर्ग महिलाओं की सहायता के लिए लगाई गई है। सरोवरों के पास नहाते समय किसी बुजुर्ग महिला को चोट न लग जाए, उन्हें सीढ़ियों पर चढ़ाना और उतारा इस प्रकार के कार्य उनकी ओर से किए जा रहे हैं। उसका कहना है कि वह सुबह दस से चार बजे तक ड्यूटी देती हैं। उसके बाद घर आकर घर का भी काम करती हैं। उन्होंने बताया कि वह मेले में बस में आना-जाना कर रही हैं। मेले में श्रद्धालुओं की सेवा कर उन्हें सुकून मिलता है।
आंगनबाड़ी वर्कर भी लगी सेवा में
मेले में कई आंगनबाड़ी वर्कर भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। वर्कर सुनीता और रानी ने बताया कि उनकी ड्यूटी महिला श्रद्धालुओं की सहायता के लिए लगाई गई है। इसमें वे सरोवर और पूजा स्थल पर उनकी हेल्प करती हैं। उनका कहना है कि ऐसे पुण्य कार्य में सभी को बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।
हौसले के सामने उम्र पड़ी बौनी
सीनियर सिटीजन क्लब के कई ऐसे सदस्य भी मेले में काम कर रहे हैं, जिनकी उम्र 60 वर्ष से ऊपर है। मेले में सेवा करने का हौसला इतना विशाल है कि इनके हौसले के आगे उम्र भी बौनी पड़ने लगी है। क्लब के सचिव नरेश गुप्ता ने बताया कि उनके क्लब के दस सदस्य मेला क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसमें सभी सदस्य सरोवरों के आसपास हैं। कुछ को सरोवरों की सफाई की जिम्मेदारी दी गई है, तो कुछ को सरोवरों के अंदर दीप जलाने से श्रद्धालुओं को रोकने की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि उसके कुछ सदस्य मेले में शरारती तत्वों पर भी नजर रखे हुए हैं। उनका कहना है कि इस उम्र में श्रद्धालुओं की सेवा कर उन्हें आत्मिक शांति मिल रही है।
लग्जरी गाड़ी के बराबर मारवाड़ी घोड़े की कीमत
यमुनानगर। कपालमोचन मेले में लग रही घोड़ा मंडी में लग्जरी गाड़ी के बराबर रेट घोड़ों का लग रहा है। मंडी में दो लाख से पांच लाख के तो कई घोड़े बिकने के लिए खड़े हैं, वहीं इस बार सबसे महंगा घोड़ा अंबाला जिले के गांव नगल निवासी अनिल लेकर पहुंचे हैं। ये अपने घोड़े की कीमत दस लाख रुपये बता रहे हैं। उनका कहना है कि चार लाख रुपये तो घोड़े के कई खरीदार लगा चुके हैं। वह मंडी में मारवाड़ी नस्ल के दो घोड़े लेेकर आए हैं। अनिल ने बताया कि बचपन से उन्हें पशुओं से बेहद लगाव था। धीरे-धीरे यह लगाव शोक में बदल गया। उनका कहना है कि अब यह उनका व्यापार बन गया है। पिछले वर्ष भी इसी नस्ल के दो घोड़े लेकर वह कपालमोचन मेला में लगने वाली मंडी में आया था और इस बार भी। उसका कहना है कि घोड़ों में यह नस्ल अच्छी मानी जाती है।
पांच सौ रुपये करते हैं प्रतिदिन खर्च
अनिल ने बताया कि वह रोजाना एक घोड़े का खर्च 500 रुपये आता है। उसने बताया कि प्रतिदिन इन्हें नहलाना, 15 से 20 दिन में बालों की कटिंग, दवाओं का खर्च और डाइट का खर्च लगाकर प्रतिदिन 500 रुपये कम से कम खर्च एक घोड़े पर होता है। उनका कहना है कि उसे द्वारा पाले घोडे़ उसकी आवाज तक को पहचानते हैं। वह इनकी मन से सेवा करता है।
घोड़े के डांस ने मोहा मन
घोड़ा मंडी में शनिवार को नुगरी नस्ल के घोड़े का डांस आकर्षण का केंद्र रहा। घोडे़ के मालिक ने बताया कि उसका घोड़ा पंजाब गीत पर डांस करता है। ट्रैक्टर पर लगे स्टीरियो में चल रहे गानों पर यह घोड़ा काफी देर नाचता रहा। इससे मेले में और सड़क से जा रहे लोग इस घोड़े का डांस देखने के लिए दौड़े चले आए, वहीं पटियाला के सरला खुर्द से घोड़ा लेकर पहुंचे नत्था सिंह ने बताया कि वे मेले में घोड़े की प्रदर्शनी लगाते हैं। करनाल के गांव फुरलक से आए नरेंद्र ने बताया कि वह मारवाड़ी नस्ल का घोड़ा लेकर मंडी पहुंचा है। उसके घोड़े के कई ग्राहक आ चुके हैं, लेकिन रेट नहीं बन पाया है। उसका कहना है कि उसके घोड़े की खासीयत है कि वह चलने में अन्य घोड़े से अच्छा है, देखने में सुंदर है और नस्ल काफी अच्छी है। जिला मोहाली के गांव राजोमाजरा से आए जसबीर सिंह ने बताया कि वह मेले के दौरान लगने वाली मंडी में 2008 से आ रहे हैं। वह नुकरा नस्ल का घोड़ा लेकर आया है। वह अपने घोड़े का रेट पांच लाख रुपये बता रहे हैं।
महिला की हृदय गति रुकने से मौत
बिलासपुर। कपालमोचन मेले से शनिवार को आदिबद्री मंदिर में माथा टेकने गई एक महिला की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। महिला फिरोजपुर के गांव मोदगी की रहने वाली थी। महिला के परिजनों ने बताया कि आदिबद्री और मंत्रा देवी पर माथा टेक जैसे ही वापस कपालमोचन मेले के लिए जा रहे थे, तो रास्ते में मेलकौर की अचानक तबीयत बिगड़ गई। जब तक उसे अस्पताल पहुंचाया गया, उसकी मौत हो गई।
उधर, कपालमोचन मेले में किसी व्यक्ति ने छह श्रद्धालुओं को चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर दे दिया। जिससे वे बेहोश हो गए। इनमें एक महिला भी शामिल है। सभी को पहले एंबुलेंस से बिलासपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां पर तबीयत में सुधार न होता देख डाक्टर ने उन्हें यमुनानगर ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। जानकारी के अनुसार कुछ श्रद्धालु कपालमोचन सरोवर में स्नान कर रहे थे, जैसे ही वे स्नान कर वापस निकले, तो घाट पर खड़े एक व्यक्ति ने उन्हें चाय दी। चाय पीते ही दलीप सिंह, नक्षत्र सिंह, श्याम सिंह, पान सिंह, इंद्रपाल और करनैल कौर लोग बेहोश हो गई।
चाय पीने से छह श्रद्धालु बेहोश
यमुनानगर। कपालमोचन मेले में चाय पीने से आधा दर्जन लोग बेहोश हो गए। इनका उपचार बिलासपुर पीएचसी और ट्रामा सेंटर में चल रहा है।
ट्रामा सेंटर में उपचाराधीन पंजाब के बरवाला जिले के गांव सैहना निवासी नछत्तर सिंह ने बताया कि उसने और उनकी रिश्तेदार दलीप कौर ने कपालमोचन गुरुद्वारे के पास तंबूवाला से चाय पी थी। चाय पीने के बाद वह बेहोश हो गए। इसके बाद आसपास के लोगाें ने उन्हें पीएचसी बिलासपुर में पहुंचाया। जहां से उन्हें ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। इसके अलावा पांच लोग कपाल मोचन टेंट में बेसुध अवस्था में मिले। जिन्हें बिलासपुर के पीएचसी में लाया गया। इनकी पहचान जींद के उंचाना गांव निवासी बलीराम, पान सिंह, लुधियाना निवासी इंद्रपाल सिंह, पंजाब के संगरूर जिले के गांव खेड़ीकला निवासी करनैल कौर के रूप में हुई। जींद निवासी बलीराम का कहना है कि उन्होंने चाय पी थी।
कपालमोचन को संवारा, आदिबद्री से किनारा
यमुनानगर। आदिबद्री जाने वाले रास्तों पर वाहनों से उड़ती धूल और टूटी सड़कें श्रद्धालुओं को परेशान कर रही हैं। वे यहां आने से ही तौबा करने लगे हैं। प्रशासन के इंतजाम सिर्फ कपालमोचन मेला क्षेत्र तक ही सिमट कर रह गए हैं। आदिबद्री कपालमोचन मेले से 12 किलोमीटर दूर हैं। मेले में प्र्रशासन लाखों श्रद्धालुओं के आने का दावा करता है, यदि इनमें से एक चौथाई श्रद्धालु आदिबद्री आ जाएं तो यह क्षेत्र भी प्रचार और प्रसार पा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है, इसका कारण एक ही कपालमोचन मेले में सैकड़ों किलोमीटर से आने वाले इन श्रद्धालुओं को आदिबद्री स्थल तक खींचने वाला कोई भी कदम प्रशासन द्वारा नहीं उठाया जाता।
चार किलोमीटर सड़क पर धूल ही धूल
आदिबद्री के पास चार किलोमीटर का रास्ता कच्चे रास्ते जैसा है। वाहनों के आने जाने से यहां पर धूल ही धूल उड़ती रहती है। कपालमोचन में आए श्रद्धालु आदिबद्री भी जाएं, इसके लिए प्रशासन ने इस चार किलोमीटर की खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत कराना उचित नहीं समझा। गड्ढों को मिट्टी से भरकर इतिश्री कर दी गई, वहीं आदिबद्री से मंदिर तक जाने वाले पहाड़ी रास्ते पर तो हादसे के पूरे इंतजाम हैं। यहां पर कई तीव्र मोड़ हैं, जिन पर मिट्टी डाल हादसे को न्योता देने का काम किया गया है।
मंदिर के सामने ही डाल दी मिट्टी
आदिबद्री स्थित मंदिर एक ऐसा स्थान जहां पर हजारों की संख्या में मेले के दौरान श्रद्धालु शीश झुकाने आते हैं, लेकिन यहां के हालात भी अच्छे नहीं हैं। मंदिर की सीढ़ियाें के सामने पड़े मिट्टी के ढेर को उठाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
सरस्वती सरोवर पड़ा विरान
सरस्वती के पानी को जमा करने के लिए उद्गम स्थल के नीचे सरोवर बनाया गया है। इसमें पानी जरूर है, लेकिन यहां पर एक भी श्रद्धालु स्नान करने नहीं आता। आएगा भी कैसे। इस सरोवर का महत्व इन श्रद्धालुओं को बताने वाला कोई नहीं है। सरोवर की सीढ़ियों पर जमी काई से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसकी सफाई किए कितने दिन हो गए हैं।
बना था श्राइन बोर्ड
श्राइन बोर्ड के नाम पर भले ही प्रशासन ने अपने अंडर ले लिया हो, लेकिन यहां की बदहाली प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रही है। क्षेत्र में प्रसाद की दुकानें लगाए बैठे आसपास के गांव के लोगों का कहना है कि श्राइन बोर्ड सिर्फ यहां से बाबाओं और संतों को भगाने के लिए ही बनाया गया है। पर्यटक को बढ़ावा देने के लिए यहां पर कोई काम नहीं हो रहा है। अगर यह क्षेत्र पर्यटक के रूप में विकसित हो जाए, तो क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या भी काफी हद तक दूर हो सकती है।