{"_id":"60f877318ebc3e6ce61a3656","slug":"sit-will-also-interrogate-those-who-buy-church-shops-yamunanagar-yamuna-nagar-news-knl77287244","type":"story","status":"publish","title_hn":"चर्च की दुकानें खरीदने वालों से भी एसआईटी करेगी पूछताछ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चर्च की दुकानें खरीदने वालों से भी एसआईटी करेगी पूछताछ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। फव्वारा चौक पर स्थित चर्च की 27 दुकान बेचने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली से नाखुश चर्च ऑफ नार्थ इंडिया (सीएनआई) ने सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई से जांच के लिए याचिका लगाई है। याचिका को कोर्ट ने सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता सीएनआई की तरफ से कहा गया है कि पुलिस द्वारा सही इंवेस्टिगेशन नहीं किया जा रहा है। इसलिए मामले की सीबीआई से जांच की जाएं। वहीं एसआईटी ने भी नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। दुकान खरीदने वाले उन लोगों से भी दोबारा पूछताछ की जाएगी, जिनके नाम एफआईआर में दर्ज हैं।
एफआईआर में तत्कालीन तहसीलदार को भी आरोपी बनाया गया था। दरअसल झांसी निवासी मुख्य आरोपी स्टीफन सिंह ने कथित रूप से फर्जी पावर ऑफ अथॉरिटी के माध्यम से जगाधरी तहसील में 27 दुकानों की रजिस्ट्री करवा दी थी। जिन लोगों को दुकानें बेची गई, उनमें से कई तो यहां दुकानदार भी नहीं है। जबकि इन दुकानों का किराया चर्च प्रबंधन के पास ही जमा होता रहा है और नगर निगम में टैक्स भी चर्च की तरफ से ही जमा करवाया जाता था। चर्च के पादरी प्रमोद तांडी द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर के मुताबिक उप्र के झांसी के खाटी बाबा निवासी स्टीफन सिंह ने नगर निगम से इस संपत्ति की आईडी भी ली थी। उसने अपने एक जून 2017 को अपने नाम की नकली पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की। इसमें स्टीफन सिंह के नाम पर दार्जिलिंग के सिलीगुड़ी जिले के पटेल रोड निवासी मनीष संधयांग व पैनलुक ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई थी। जिसमें उसने खुद को युनाइटेड चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया मुंबई का पदाधिकारी बताया। छह मार्च को इन सभी दुकानों की एक साथ रजिस्ट्री कराई गई।
तहसील के अधिकारी भी रडार पर
जिस तरीके से बेशकीमती दुकानों की बेहद कम कीमत पर रजिस्ट्री की गई, उसमें तहसील के अधिकारी भी एसआईटी के रडार पर हैं। चर्च से जुड़े लोगों ने तत्कालीन तहसीलदार के साथ-साथ नंबरदार पर भी पूरे मामले में मिलीभगत होने के आरोप लगाएं हैं। तहसीलदार ने कमर्शियल बेल्ट में इन दुकानों की कम कीमत में रजिस्ट्री कर दी और मौके पर आकर जांच तक नहीं की। जिस वजह से पूरे मामले में तहसील के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। अगर मौके पर जाकर दुकानों पर काबिज किरायेदारों और चर्च के पदाधिकारियों से बात की जाती तो धोखाधड़ी नहीं हो सकती थी।
विज्ञापन
एसआईटी इंचार्ज और डीएसपी राजेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस बेहतर तरीके से जांच कर रही है। एफआईआर में जिन लोगों के नाम हैं, उन्हें जांच में शामिल किया जाएगा। जांच के दौरान इस पूरे मामले में जो भी शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल मुख्य आरोपी स्टीफन सिंह की तलाश की जा रही है। सीबीआई जांच की मांग संबंधी याचिका बारे मुझे जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
यमुनानगर। फव्वारा चौक पर स्थित चर्च की 27 दुकान बेचने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली से नाखुश चर्च ऑफ नार्थ इंडिया (सीएनआई) ने सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई से जांच के लिए याचिका लगाई है। याचिका को कोर्ट ने सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता सीएनआई की तरफ से कहा गया है कि पुलिस द्वारा सही इंवेस्टिगेशन नहीं किया जा रहा है। इसलिए मामले की सीबीआई से जांच की जाएं। वहीं एसआईटी ने भी नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। दुकान खरीदने वाले उन लोगों से भी दोबारा पूछताछ की जाएगी, जिनके नाम एफआईआर में दर्ज हैं।
एफआईआर में तत्कालीन तहसीलदार को भी आरोपी बनाया गया था। दरअसल झांसी निवासी मुख्य आरोपी स्टीफन सिंह ने कथित रूप से फर्जी पावर ऑफ अथॉरिटी के माध्यम से जगाधरी तहसील में 27 दुकानों की रजिस्ट्री करवा दी थी। जिन लोगों को दुकानें बेची गई, उनमें से कई तो यहां दुकानदार भी नहीं है। जबकि इन दुकानों का किराया चर्च प्रबंधन के पास ही जमा होता रहा है और नगर निगम में टैक्स भी चर्च की तरफ से ही जमा करवाया जाता था। चर्च के पादरी प्रमोद तांडी द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर के मुताबिक उप्र के झांसी के खाटी बाबा निवासी स्टीफन सिंह ने नगर निगम से इस संपत्ति की आईडी भी ली थी। उसने अपने एक जून 2017 को अपने नाम की नकली पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की। इसमें स्टीफन सिंह के नाम पर दार्जिलिंग के सिलीगुड़ी जिले के पटेल रोड निवासी मनीष संधयांग व पैनलुक ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई थी। जिसमें उसने खुद को युनाइटेड चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया मुंबई का पदाधिकारी बताया। छह मार्च को इन सभी दुकानों की एक साथ रजिस्ट्री कराई गई।
विज्ञापन
तहसील के अधिकारी भी रडार पर
जिस तरीके से बेशकीमती दुकानों की बेहद कम कीमत पर रजिस्ट्री की गई, उसमें तहसील के अधिकारी भी एसआईटी के रडार पर हैं। चर्च से जुड़े लोगों ने तत्कालीन तहसीलदार के साथ-साथ नंबरदार पर भी पूरे मामले में मिलीभगत होने के आरोप लगाएं हैं। तहसीलदार ने कमर्शियल बेल्ट में इन दुकानों की कम कीमत में रजिस्ट्री कर दी और मौके पर आकर जांच तक नहीं की। जिस वजह से पूरे मामले में तहसील के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। अगर मौके पर जाकर दुकानों पर काबिज किरायेदारों और चर्च के पदाधिकारियों से बात की जाती तो धोखाधड़ी नहीं हो सकती थी।
विज्ञापन
एसआईटी इंचार्ज और डीएसपी राजेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस बेहतर तरीके से जांच कर रही है। एफआईआर में जिन लोगों के नाम हैं, उन्हें जांच में शामिल किया जाएगा। जांच के दौरान इस पूरे मामले में जो भी शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल मुख्य आरोपी स्टीफन सिंह की तलाश की जा रही है। सीबीआई जांच की मांग संबंधी याचिका बारे मुझे जानकारी नहीं है।