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Yamuna Nagar News: सरकारी नौकरी छोड़ बच्चों को कर रहीं शिक्षित
Sun, 14 Sep 2025 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:24 AM IST
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शनि मंदिर के पास झुग्गी बस्ती में बच्चों को पाठ्य सामग्री देती कोमल। संवाद
- फोटो : धूता गोशाला के सामने खडंजा में भरे पानी से निकलते लोग।
अशोक कुमार
यमुनानगर। जगाधरी की सरस्वती कॉलोनी की रहने वाली कोमल ने पढ़ लिखकर आयकर विभाग में सहायक ऑडिट ऑफिसर के पद पर सरकारी नौकरी पाई। इसमें कोमल का मन नहीं लगा तो नौकरी छोड़ कर असहाय जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करना शुरू कर दिया।
आज कोमल समाज की महिलाओं के लिए मिसाल बन गईं हैं। कोमल ने बताया कि पिता बालेश गुर्जर व परिवार से प्रेरित होकर उसने जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। सरकारी नौकरी में उसका मन नहीं लगा। फिर भी जिंदगी जीने का जो आनंद बच्चों को पढ़ाने में आ रहा है, वह कहीं नहीं मिला। बच्चों को पढ़ाने में उसके साथी प्रदीप व भावना भी सहयोग कर रहे हैं। बच्चों को पढ़ाने से फुर्सत नहीं है, इसलिए अभी तक शादी करने का भी विचार मन में नहीं आया। 31 वर्षीय कोमल ने बताया 2013 में उसने स्नातक पास किया। उसके बाद सरकारी नौकरी लगी। ,वह जीवन में कुछ अलग करना चाहती थीं। इसलिए भीख मांगकर गुजारा करने व स्लम एरिया में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने के बारे में सोचा। वह सुबह नौ बजे घर से निकल जाती हंै। शाम चार बजे तक यह सिलसिला चलता है। संवाद
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यमुनानगर। जगाधरी की सरस्वती कॉलोनी की रहने वाली कोमल ने पढ़ लिखकर आयकर विभाग में सहायक ऑडिट ऑफिसर के पद पर सरकारी नौकरी पाई। इसमें कोमल का मन नहीं लगा तो नौकरी छोड़ कर असहाय जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करना शुरू कर दिया।
आज कोमल समाज की महिलाओं के लिए मिसाल बन गईं हैं। कोमल ने बताया कि पिता बालेश गुर्जर व परिवार से प्रेरित होकर उसने जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। सरकारी नौकरी में उसका मन नहीं लगा। फिर भी जिंदगी जीने का जो आनंद बच्चों को पढ़ाने में आ रहा है, वह कहीं नहीं मिला। बच्चों को पढ़ाने में उसके साथी प्रदीप व भावना भी सहयोग कर रहे हैं। बच्चों को पढ़ाने से फुर्सत नहीं है, इसलिए अभी तक शादी करने का भी विचार मन में नहीं आया। 31 वर्षीय कोमल ने बताया 2013 में उसने स्नातक पास किया। उसके बाद सरकारी नौकरी लगी। ,वह जीवन में कुछ अलग करना चाहती थीं। इसलिए भीख मांगकर गुजारा करने व स्लम एरिया में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने के बारे में सोचा। वह सुबह नौ बजे घर से निकल जाती हंै। शाम चार बजे तक यह सिलसिला चलता है। संवाद
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