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शहीद भगत सिंह ने किताबों को सच्चा दोस्त माना
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माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। गांव करेड़ा खुर्द स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर उनके जीवन और विचार विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता हिंदी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि आजादी की लड़ाई में भगत सिंह का व्यक्तित्व और शहादत उच्च आदर्शों के प्रतीक है। उन्होंने किताबों को सच्चा दोस्त माना था।
मुख्य वक्ता कैहरबा ने कहा कि छोटे से जीवन में शहीद भगत सिंह ने विश्व इतिहास में ऐसी छाप छोड़ी, जो कि देश के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई। शहीद करतार सिंह सराभा से भगत सिंह प्रेरणा लेते थे और शोषण पर आधारित व्यवस्था को वो बदलना चाहते थे। अंग्रेजी राज का समाप्त करना व्यवस्था परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। नौजवान भारत सभा और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन संगठनों को बनाकर उन्होंने आजादी के लिए देश के युवाओं को लामबंद किया। उनकी सादगी भी काबिले मिसाल है। भगत सिंह की अध्ययनशीलता, लेखन और विचार-विमर्श को समझना सभी अध्यापकों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।
बचपन में ही भगत सिंह को किताबें पढ़ने का चस्का लग गया था। 23 मार्च 1931 को फांसी पर झूलने तक यह चस्का बरकरार रहा। जब अंग्रेज सिपाही जेल में भगत सिंह को फांसी के लिए बुलाने को आता है तो वह देखकर हैरान होता था कि भगत सिंह किताब पढ़ रहे हैं। भगत सिंह किताब के आखिरी दो पन्ने पढ़ कर चलने की बात कहते हैं और किताब पूरी करने के बाद बेखौफ होकर फांसी के लिए चल देते हैं।
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भगत सिंह किताब को सच्ची दोस्त और साथी मानते थे। जेल में रहते हुए उन्होंने अनेक किताबें पढ़ी और उन पर टिप्पणियां लिखी। भगत सिंह ने अपने समय की समस्याओं को लेकर जो लेख लिखे हैं, वह आज भी हमें रास्ता दिखा रहे हैं। कैहरबा ने कहा कि हमें भगत सिंह के जीवन और विचारों के किस्सों से प्रेरणा लेनी चाहिए। नवीं कक्षा की छात्रा मुस्कान ने एक लेख पढ़कर भगत सिंह के जीवन के विभिन्न प्रसंगों के बारे में बताया।
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यमुनानगर। गांव करेड़ा खुर्द स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर उनके जीवन और विचार विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता हिंदी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि आजादी की लड़ाई में भगत सिंह का व्यक्तित्व और शहादत उच्च आदर्शों के प्रतीक है। उन्होंने किताबों को सच्चा दोस्त माना था।
मुख्य वक्ता कैहरबा ने कहा कि छोटे से जीवन में शहीद भगत सिंह ने विश्व इतिहास में ऐसी छाप छोड़ी, जो कि देश के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई। शहीद करतार सिंह सराभा से भगत सिंह प्रेरणा लेते थे और शोषण पर आधारित व्यवस्था को वो बदलना चाहते थे। अंग्रेजी राज का समाप्त करना व्यवस्था परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। नौजवान भारत सभा और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन संगठनों को बनाकर उन्होंने आजादी के लिए देश के युवाओं को लामबंद किया। उनकी सादगी भी काबिले मिसाल है। भगत सिंह की अध्ययनशीलता, लेखन और विचार-विमर्श को समझना सभी अध्यापकों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।
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बचपन में ही भगत सिंह को किताबें पढ़ने का चस्का लग गया था। 23 मार्च 1931 को फांसी पर झूलने तक यह चस्का बरकरार रहा। जब अंग्रेज सिपाही जेल में भगत सिंह को फांसी के लिए बुलाने को आता है तो वह देखकर हैरान होता था कि भगत सिंह किताब पढ़ रहे हैं। भगत सिंह किताब के आखिरी दो पन्ने पढ़ कर चलने की बात कहते हैं और किताब पूरी करने के बाद बेखौफ होकर फांसी के लिए चल देते हैं।
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भगत सिंह किताब को सच्ची दोस्त और साथी मानते थे। जेल में रहते हुए उन्होंने अनेक किताबें पढ़ी और उन पर टिप्पणियां लिखी। भगत सिंह ने अपने समय की समस्याओं को लेकर जो लेख लिखे हैं, वह आज भी हमें रास्ता दिखा रहे हैं। कैहरबा ने कहा कि हमें भगत सिंह के जीवन और विचारों के किस्सों से प्रेरणा लेनी चाहिए। नवीं कक्षा की छात्रा मुस्कान ने एक लेख पढ़कर भगत सिंह के जीवन के विभिन्न प्रसंगों के बारे में बताया।