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Yamuna Nagar News: ऑनलाइन फीस भरने में सर्वर डाउन का अड़ंगा

Sun, 08 Dec 2024 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 08 Dec 2024 12:56 AM IST
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Server down is a hindrance in paying fees online
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। सरल केंद्रों या फिर वाहन रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के कार्यालयों में वाहनों के पंजीकरण से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस समेत अन्य सुविधाओं की ऑनलाइन फीस जमा कराने के नाम बड़ा खेल चल रहा है। कभी सिस्टम नहीं चलने का बहाना तो कभी इंटरनेट की धीमी रफ्तार बताकर क्लर्क आवेदकों की ऑनलाइन फीस नहीं काट रहे।
आवेदकों को ऑनलाइन फीस भरने के लिए सीधे दलालों के पास भेजा जा रहा है। जहां दलाल फीस जमा कराने के नाम पर लोगों से 70 से 100 रुपये तक ज्यादा ले रहे हैं। अतिरिक्त फीस जमा कराने से लोगों की जेब ढीली हो रही है। क्या एसडीएम कार्यालयाें में बैठे क्लर्कों की दलालों से कमीशन तय है? यदि ऐसा है तो यह जांच का विषय है। जिले में इस समय जगाधरी, बिलासपुर व रादौर में वाहनों के रजिस्ट्रेशन का कार्य हो रहा है।
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किसी वाहन का रजिस्ट्रेशन एक्सपायर होने के बाद उसे दोबारा रिन्यू कराना हो या फिर ड्राइविंग लाइसेंस की फीस जमा करानी वह सब अब ऑनलाइन होती है। सरल केंद्रों या फिर वाहन रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के कार्यालयों में बैठे क्लर्क कंप्यूटर में सारी डिटेल दर्ज करने के बाद किसी यूपीआई आईडी से फीस ऑनलाइन जमा करने को कहते हैं।
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जैसे ही फीस जमा करने का समय आता है तो अचानक सर्वर डाउन हो जाता है या फिर सिस्टम धीमा चलने की बात आवेदकों से कही जाती है। इससे लोगों को थोड़ा इंतजार करने के लिए कहा जाता है। बिना फीस भरने काम पूरा नहीं होगा इसलिए इंतजार करना लोगों की मजबूरी है। वहीं कंप्यूटर की स्क्रीन क्लर्क की तरफ होती है इसलिए आवेदक को पता भी नहीं चलता कि सच में ही सर्वर डाउन है या फिर क्लर्क जानबूझ कर कर रहा है।
इस पर 10 से 15 मिनट इंतजार कराने के बाद लोगों से कहा जाता है कि वह बाहर से ही किसी से ऑनलाइन फीस जमा करवा दें। लोगों को पता नहीं होता कि बाहर से फीस कौन जमा करता है। इसलिए क्लर्क खुद ही फीस भरने वाले का नंबर देते हैं या फिर दलाल एक कॉल पर वहीं उपलब्ध हो जाता है।

दलाल आवेदक को बताता है कि फीस तो वह जमा करवा देगा, लेकिन इसके 70 से 100 रुपये ज्यादा लगेंगे। ऑनलाइन फीस जमा कराने के नाम पर लोगों को कहीं टीडीएस कटने तो कभी टैक्स लगने का डर दिखाया जाता है। समय के अभाव और परेशानी से बचने के लिए लोग निर्धारित फीस के अलावा ज्यादा रुपये देने को तैयार हो जाते हैं।
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