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...सुरक्षित नहीं बच्चों का स्कूली सफर
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर।
Updated Sun, 18 Sep 2016 02:28 AM IST
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यमुनानगर
- फोटो : यमुनानगर
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यमुनानगर। साढौरा के जनता हाई स्कूल की वैन 14 सितंबर को गांव रातौली के समीप पलट गई थी और 20 बच्चे घायल हो गए थे। वैन में क्षमता से अधिक बच्चे थे और बना कागजात और लाइसेंस के बिना प्रिंसिपल ही वैन दौड़ा रहा था। बावजूद इसके स्कूल संचालकों ने सबक नहीं लिया और अब भी कई स्कूली वाहन सरेआम कायदे-कानून की धज्जियां उड़ाते हुए सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस ने शनिवार को एक घंटे की सरप्राइज चेकिंग में ऐसे ही 15 वाहनों के चालान किए। इनमें शामिल 10 स्कूली बसें और पांच ऑटो रिक्शा में क्षमता से अधिक बच्चे ले जाए जा रहे थे। कई बिना परमिट और बिना कोर्ट की गाइडलाइन को पूरा किए सड़कों पर दौड़ते पाए गए।
ट्रैफिक पुलिस की टीम ने यातायात थाना प्रभारी निर्मल सिंह के नेतृत्व में यह सरप्राइज चेकिंग शनिवार दोपहर शहर के कन्हैया साहिब चौक पर की। टीम ने मार्ग से स्कूली बच्चों को लेकर गुजरने वाहन प्रत्येक वाहन को रोक कर चेकिंग की। इस दौरान पांच ऑटो रिक्शा ऐसे मिले, जिनमें क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाया जा रहा था। ऑटो में आगे की तरफ ड्राइवर सीट के दोनों ओर भी तीन-चार बच्चों को बैठाया हुआ था वहीं, पीछे भी सीटों के अलावा खिड़की पर भी बच्चों को बैठाया गया था। साथ ही ऑटो चालकों के पास न पूरे कागजात और न ही वाहनों में जरूरी उपकरण मिले। इस पर ट्रैफिक पुलिस की टीम ने पांच ऑटो चालकों के चालान की कार्रवाई की।
बसों पर स्कूल का नाम, न कोर्ट की गाइडलाइन पूरी
चेकिंग में कुल 15 चालान किए गए। इनमें पांच आटो रिक्शा के अलावा ऐसी दस स्कूली बसें भी शामिल रहीं, जिनमें से कइयों पर न तो स्कूल का नाम लिखा मिला और न वह कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन को पूरा कर रही थीं। कई मिनी स्कूल बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाया जा रहा था। जबकि कई वाहन चालक जानबूझकर सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं नहीं कर रहे थे, जिन्हें टीम द्वारा सख्त चेतावनी दी गई।
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ऑटो रिक्शा के लिए तय हैं ये मापदंड
बीते वर्षों में स्कूली वाहनों के हादसों के बाद ऑटो में स्कूली बच्चों को घर से स्कूल व स्कूल से घर लाने-ले जाने के लिए मापदंड तय किए थे। इसके अनुसार अगर ऑटो में सुरक्षा के सभी प्रबंध हों, तो थ्री सीटर ऑटो में ज्यादा से ज्यादा पांच स्कूली बच्चों को बैठाया जा सकता है। इसके अलावा ड्राइवर सीट के साथ दोनों ओर से सीट हटाने (ताकि आगे बच्चों को न बैठाया जा सके।), चारों ओर सेफ गार्ड व रिफ्लेक्टर लगाने के निर्देश दिए गए थे। किंतु मौजूदा समय में पांच के बजाय ऑटो में 10 से 15 स्कूली बच्चों को ले जाया जा रहा है। इसमें दो से तीन बच्चे ड्राइवर के साथ दोनों ओर बनी सीटों पर बैठे होते हैं, जबकि ऑटो की खिड़की में फट्टे पर भी एक-दो बच्चे को बैठा दिया जाता है, जोकि अपने आप में खतरनाक है। इसके अलावा अधिकतर ऑटो में सेफ गार्ड व रिफ्लेक्टर भी नहीं हैं। ऐसे में ऑटो से स्कूली सफर सुरक्षित नहीं है।
जरा-सी चूक या गड्ढा दे सकता है हादसे को अंजाम
स्कूली बच्चों को क्षमता से अधिक भरकर ऑटो रिक्शा व अन्य वाहन शहर से गुजर रहे एनएच-73 व 73ए सहित स्टेट हाईवे व अन्य सड़कों पर सरपट दौड़ते देखे जा सकते हैं। इस बीच मार्ग पर कोई गड्ढा न दिखने पर या चालक के जरा-सी चूक में नियंत्रण खो देने पर बड़ा हादसा हो सकता है। सबसे ज्यादा ऑटो रिक्शा के पलटने की संभावना रहती है, चूंकि चालक के साथ वाली दोनों ओर बनी सीट पर बच्चे बैठे होते हैं, ऐसे में स्टेयरिंग (हैंडल) को चलाने में दिक्कत होती है।
मोटर व्हीकल एक्ट में ऑटो से स्कूली सफर नहीं मान्य
बता दें कि मोटर व्हीकल एक्ट में ऑटो से स्कूली सफर मान्य नहीं है। एक्ट व कोर्ट की गाइडलाइन को पूरा करने वाली स्कूल बस व वैन में ही बच्चों को घर से स्कूल व स्कूल से घर ले जाया जा सकता हैं। किंतु मौजूदा समय में धन-साधन व समय की कमी में अभिभावक ऑटो व अन्य विकल्प से बच्चों को स्कूल भेजने पर मजबूर हैं।
सप्ताह भर जारी रहेगी सरप्राइज चेकिंग: यातायात थाना प्रभारी निर्मल सिंह ने कहा कि सरप्राइज चेकिंग सप्ताह भर जारी रखेंगे। दोपहर में किसी भी चौक पर टीम पहुंचकर स्कूली वाहनों को चेक करेगी और नियमों के उल्लंघन पर सीधे चालान किया जाएगा। शनिवार को 15 चालान किए है, जिनमें पांच ऑटो व दस बसों के हैं।
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ट्रैफिक पुलिस की टीम ने यातायात थाना प्रभारी निर्मल सिंह के नेतृत्व में यह सरप्राइज चेकिंग शनिवार दोपहर शहर के कन्हैया साहिब चौक पर की। टीम ने मार्ग से स्कूली बच्चों को लेकर गुजरने वाहन प्रत्येक वाहन को रोक कर चेकिंग की। इस दौरान पांच ऑटो रिक्शा ऐसे मिले, जिनमें क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाया जा रहा था। ऑटो में आगे की तरफ ड्राइवर सीट के दोनों ओर भी तीन-चार बच्चों को बैठाया हुआ था वहीं, पीछे भी सीटों के अलावा खिड़की पर भी बच्चों को बैठाया गया था। साथ ही ऑटो चालकों के पास न पूरे कागजात और न ही वाहनों में जरूरी उपकरण मिले। इस पर ट्रैफिक पुलिस की टीम ने पांच ऑटो चालकों के चालान की कार्रवाई की।
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बसों पर स्कूल का नाम, न कोर्ट की गाइडलाइन पूरी
चेकिंग में कुल 15 चालान किए गए। इनमें पांच आटो रिक्शा के अलावा ऐसी दस स्कूली बसें भी शामिल रहीं, जिनमें से कइयों पर न तो स्कूल का नाम लिखा मिला और न वह कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन को पूरा कर रही थीं। कई मिनी स्कूल बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाया जा रहा था। जबकि कई वाहन चालक जानबूझकर सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं नहीं कर रहे थे, जिन्हें टीम द्वारा सख्त चेतावनी दी गई।
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ऑटो रिक्शा के लिए तय हैं ये मापदंड
बीते वर्षों में स्कूली वाहनों के हादसों के बाद ऑटो में स्कूली बच्चों को घर से स्कूल व स्कूल से घर लाने-ले जाने के लिए मापदंड तय किए थे। इसके अनुसार अगर ऑटो में सुरक्षा के सभी प्रबंध हों, तो थ्री सीटर ऑटो में ज्यादा से ज्यादा पांच स्कूली बच्चों को बैठाया जा सकता है। इसके अलावा ड्राइवर सीट के साथ दोनों ओर से सीट हटाने (ताकि आगे बच्चों को न बैठाया जा सके।), चारों ओर सेफ गार्ड व रिफ्लेक्टर लगाने के निर्देश दिए गए थे। किंतु मौजूदा समय में पांच के बजाय ऑटो में 10 से 15 स्कूली बच्चों को ले जाया जा रहा है। इसमें दो से तीन बच्चे ड्राइवर के साथ दोनों ओर बनी सीटों पर बैठे होते हैं, जबकि ऑटो की खिड़की में फट्टे पर भी एक-दो बच्चे को बैठा दिया जाता है, जोकि अपने आप में खतरनाक है। इसके अलावा अधिकतर ऑटो में सेफ गार्ड व रिफ्लेक्टर भी नहीं हैं। ऐसे में ऑटो से स्कूली सफर सुरक्षित नहीं है।
जरा-सी चूक या गड्ढा दे सकता है हादसे को अंजाम
स्कूली बच्चों को क्षमता से अधिक भरकर ऑटो रिक्शा व अन्य वाहन शहर से गुजर रहे एनएच-73 व 73ए सहित स्टेट हाईवे व अन्य सड़कों पर सरपट दौड़ते देखे जा सकते हैं। इस बीच मार्ग पर कोई गड्ढा न दिखने पर या चालक के जरा-सी चूक में नियंत्रण खो देने पर बड़ा हादसा हो सकता है। सबसे ज्यादा ऑटो रिक्शा के पलटने की संभावना रहती है, चूंकि चालक के साथ वाली दोनों ओर बनी सीट पर बच्चे बैठे होते हैं, ऐसे में स्टेयरिंग (हैंडल) को चलाने में दिक्कत होती है।
मोटर व्हीकल एक्ट में ऑटो से स्कूली सफर नहीं मान्य
बता दें कि मोटर व्हीकल एक्ट में ऑटो से स्कूली सफर मान्य नहीं है। एक्ट व कोर्ट की गाइडलाइन को पूरा करने वाली स्कूल बस व वैन में ही बच्चों को घर से स्कूल व स्कूल से घर ले जाया जा सकता हैं। किंतु मौजूदा समय में धन-साधन व समय की कमी में अभिभावक ऑटो व अन्य विकल्प से बच्चों को स्कूल भेजने पर मजबूर हैं।
सप्ताह भर जारी रहेगी सरप्राइज चेकिंग: यातायात थाना प्रभारी निर्मल सिंह ने कहा कि सरप्राइज चेकिंग सप्ताह भर जारी रखेंगे। दोपहर में किसी भी चौक पर टीम पहुंचकर स्कूली वाहनों को चेक करेगी और नियमों के उल्लंघन पर सीधे चालान किया जाएगा। शनिवार को 15 चालान किए है, जिनमें पांच ऑटो व दस बसों के हैं।