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Yamuna Nagar News: साध्वी ने श्रद्धालुओं को बताई मन के विचारों की शक्ति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jul 2025 12:37 AM IST
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Sadhvi told the devotees about the power of thoughts of the mind
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन हुआ। साध्वी सरस्वती भारती ने मन के विचारों की शक्ति का व्याख्यान किया। उन्होंने कहा कि मन विचारों का समूह है, परंतु मन का कोई अपना अस्तित्व नहीं है, बावजूद इसके मन बहुत शक्तिशाली है।
उन्होंने बताया कि हमारी वाणी और हमारे द्वारा किया हर कर्म मन के विचारों के अनुरूप ही होता है। मन में उठी एक विचार तरंग किसी घटना या दुर्घटना को जन्म दे सकती है। संत कहते हैं कि मन में उठने वाले हर विचार की ओर ध्यान दें। मन का एक विचार मानव जीवन को सर्वश्रेष्ठ ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त है। परंतु मन विचारों को अनदेखा कर दिया जाए तो वह विचार ही विकारों में परिवर्तित होकर जीवन का पतन कर देते हैं।
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नकारात्मक और विध्वंसक विचार ही विकारों का रूप धारण कर मनुष्य को आत्मघाती बना देते हैं। आज संपूर्ण मानव समाज को ब्रह्मज्ञान रूपी संजीवनी की आवश्यकता है। चूंकि हम अपने आस-पास इन विकारों के प्रभाव को स्पष्ट देख पा रहे हैं। मनुष्य कहीं भी सुरक्षित नहीं है, जिस परिवार व संबंधों को मनुष्य का सुरक्षित दायरा माना जाता था, वे घात लगाए बैठे हैं। साध्वी ने कहा कि यदि समाज की स्थिति को सुधारना है तो हर मनुष्य को अपनी मनोस्थिति पर कार्य करना ही होगा।
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उन्होंने कहा कि यदि हमारे पास ब्रह्मज्ञान रूपी संजीवनी है और हम निरंतर गुरु आज्ञा में चल ध्यान साधना से आत्म साक्षात्कार करते हैं, तो निश्चित ही मन के विकारों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। चूंकि ब्रह्मज्ञान हमारे मन पर कार्य करता है। ब्रह्मज्ञान मन के विकारों को सहज रूप से ही दूर करने में सक्षम है।

ब्रह्मज्ञान ऐसी ब्रह्म विद्या है, जिससे आत्मा अपने वास्तविक सच्चिदानंद स्वरूप से जुड़ जाती है। फिर ऐसी ब्रह्मज्ञानी साधक से निरंतर जो दिव्य तरंगें प्रवाहित होती हैं, उनके द्वारा उसका स्वयं का जीवन और आस-पास का वातावरण भी पावन हो जाता है। परंतु मानव का दुर्भाग्य है कि वह इतनी भयावह परिस्थितियों में भी ब्रह्मज्ञान से जुड़ना आवश्यक नहीं समझता है।
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